कृषिमध्य प्रदेश

औषधीय फसलों से किसान की आय दुगुनी, जीवन स्तर में होगा सुधार: सारस्वत

औषधीय फसलों को बढ़ावा देने प्रशिक्षण सम्पन्न
सिलवानी। दुनिया की बड़ी चीज ज्ञान है, ज्ञान है तो पैसा है। ज्ञान से ही बड़े बड़े कार्य किये जा सकते है। रायसेन जिले का सिलवानी औषधीय फसलों के हब के रूप में उभर रहा है। रायसेन जिले में लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में इस वर्ष अश्वगंधा, कलौंजी, अकरकरा, हल्दी आदि की औषधि खेती की जा रही है।
उक्ताशयय की बात आयुष मंत्रालय भारत सरकार के नेशनल औषधीय पादप बोर्ड के तत्वाधान में क्षेत्रीय सह सुविधा केन्द्र मध्यक्षेत्र जबलपुर के द्वारा एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण शिविर में वरिष्ठ औषधीय कृषि वैज्ञानिक एस.एस. सारस्वत ने कही। एस.एस. सारस्वत ने कहाकि आज विश्व में जैविक फसलोें की मांग लगातार बढ़ रही है। रासानियक खेती से भूमि बंजर हो रही है। अष्वगंधी की फसल सिलवानी क्षेत्र में बहुतायात हो रही है। औषधीय फसलोें कल लागत, श्रम के साथ मुनाफा अधिक है। किसानों ने अश्वगंधा में पीलापन की समस्या उठाई तो उन्होंने कहाकि पीलापन को दूर करने के लिए गौमूत्र एवं सल्वर का छिड़काब करना चाहिये। किसानों से कहाकि गहरी जुताई, एवं 5 से 7 एकड़ बीज की बोबनी की जाना चाहिये। खरपतवार की समस्या के लिए दो बार पलेवा कर बोवनी की सलाह दी गई। भूमि मुलायम होने पर जड़े गहरी होगी जिससे मुनाफा होगा। इस फसल पर मौसम का प्रभाव रहता है। 30 से कम तापक्रम में बोवनी उचित है।
सिलवानी में एफपीएओ के माध्यम से भी अश्वगंधा, कलौंजी, अकरकरा, कालमेघ, हल्दी एवं अन्य औषधीय खेती की जा रही है। जिसमे कृषि विज्ञान केन्द्र नकतरा क कृषि वैज्ञानिक डाॅ मुकुल कुमार, रंजीतसिंह राघव मृदा वैज्ञानिक, पंकज सैनी परियोजना सहायक, प्रदीप कोरी, अमरदीप रजक क्षेत्रीय सह सुविधा केन्द्र मध्यक्षेत्र जबलपुर, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बी.एल. शर्मा, बीटीएम रघुवीरसिंह कुशवाहा समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।
रंजीतसिंह राघव मृदा वैज्ञानिक ने बताया हमने परंपरागत खेती को छोड़कर रासायनिक खेती को अपना लिया है। फसल चक्र अपनाना चाहिये, मिट्टी में 17 पोषक तत्व होने चाहिये, समय समय पर मृदा की जांच कराना चाहिये, और पोषकों की कमी होने पर उसकी भरपाई के लिए जैविक स्वयं के द्वारा तैयार की गई खाद का उपयोग करना चाहिये। डाॅ. मुकुलकुमार बीज उपचार से लागत कम आती है बीज उपचार एवं संतुलित खाद का उपयोग करें। गर्मी के मौसम में खेतों की गहरी जुताई करें। उन्होेंने किसानों से फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। उन्नत तकनीक से औषधीय फसलों की खेती करने वाले किसान अभयकुमार, अशोक शुक्ला, योगेन्द्रसिंह रघुवंशी ने अपने अनुभव साझा किये। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। अंत में उपस्थित किसानों को औषधीय पौधों का वितरण किया गया।

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