
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
*जय श्री हरि*
🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*बुधवार 27 मई 2026_*
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *_दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
*_बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*_बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन – उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – अधिक ज्यैष्ठ मास_*
🌖 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष_*
📆 *_तिथि – बुधवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 06:22 AM तक उपरांत द्वादशी_*
📝 *_तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र हस्त 05:56 AM तक उपरांत चित्रा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। तथा राशि स्वामी बुध है। इसके अलावा, हस्त नक्षत्र के प्रमुख देवता सूर्य (सवितार) हैं।_*
⚜️ *_योग – व्यातीपात योग 03:24 AM तक, उसके बाद वरीयान योग_*
⚡ *_प्रथम करण – विष्टि 06:22 AM तक_*
✨ *_द्वितीय करण – बव 07:07 PM तक, बाद बालव_*
🔥 *_गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:24:10_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:11:57_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:03 ए एम से 04:44 ए एम_*
🌇 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:24 ए एम से 05:25 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:36 पी एम से 03:31 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:10 पी एम से 07:31 पी एम_*
🌃 *_सायाह्न सन्ध्या सायं काल 07:12 पी एम से 08:13 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : रात्रि में 01:09 ए एम, मई 28 से 02:54 ए एम, मई 28_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 11:58 पी एम से 12:39 ए एम, मई 28_*
⭐ *_सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रातः काल 05:25 ए एम से 05:56 ए एम_*
❄️ *_रवि योग : प्रातः काल 05:25 ए एम से 05:56 ए एम_*
🚓 *_यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।_*
🤷🏻♀️ *_आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 11वाँ दिन/ अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी/ पद्मिनी एकादशी व्रत/ भद्रा/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग, विडाल योग/ बकरीद/ राष्ट्रीय स्मृति दिवस/ स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति दिवस, प्रसिद्ध मलयाली कवि और गीतकार ओ. एन. वी. कुरुप जन्म दिवस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर रवि शास्त्री जन्म दिवस, डॉ. भीमराव आम्बेडकर की पत्नी रमाबाई आम्बेडकर पुण्य तिथि, (‘अशोक चक्र’ से सम्मानित) हंगपन दादा स्मृति दिवस, बाल दिवस, विश्व ऊदबिलाव दिवस, विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त वन्यजीव दिवस, राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य और फिटनेस दिवस, सक्रिय वृद्धावस्था के लिए मान्यता प्राप्त दिवस, राष्ट्रीय सनस्क्रीन दिवस, आपातकालीन चिकित्सा दिवस (World Emergency Medicine Day)
✍🏼 *_तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
🏘️ *_Vastu tips_* 🏡
घर की तिजोरी, कैश बॉक्स या पैसे रखने वाली अलमारी पर कलावा बांधना बेहद शुभ माना जाता है। इसे देवी लक्ष्मी का स्थान माना जाता है। यहां कलावा बांधने से धन की स्थिरता, बरकत और आर्थिक वृद्धि होती है।
*_पूजा के कलश या जल स्थान पर बांधें आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार कलश देवी-देवताओं और पवित्र नदियों का प्रतीक है। पूजा में रखे कलश के मुख पर कलावा बांधने से घर में शांति, पवित्रता और मानसिक शीतलता बनी रहती है।
*_कलावा बांधते समय इन बातों का ध्यान रखें कलावा किसी शुभ दिन ही बांधना चाहिए। पुराना हो जाने पर इसे उतारकर जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, आप चाहें तो हर शुक्रवार नया कलावा भी बांध सकते हैं, इससे घर में उर्जा संतुलित रहती है।
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*सर्वाइकल दर्द अक्सर इन कारणों से होता है—_*
*_खराब पोस्चर मोबाइल पर नीचे देखना देर तक लैपटॉप पर झुककर काम मांसपेशियों पर 25–28 किलो तक का दबाव बन जाता है, जिससे गर्दन की डिस्क कमजोर होती है।
*_डिस्क का डी-हाइड्रेशन उम्र या तनाव के कारण डिस्क सिकुड़ने लगती है।
नस पर दबाव (Nerve Compression) इससे हाथ में झुनझुनी, कमजोरी, दर्द।_*
लाइफस्टाइल बैठे रहने की आदत, स्ट्रेस, सोने की गलत पोजिशन।_*
आयुर्वेद के अनुसार सर्वाइकल_*
आयुर्वेद इसे मुख्य रूप से “वात विकार” मानता है।_*
वात बढ़ता है –_*
ठंडी हवा_*
देर तक बैठना_*
तैलीयता की कमी_*
स्ट्रेस_*
अनियमित भोजन_*
पानी कम पीना_*
*_इससे अस्थि + स्नायु + मज्जा प्रभावित होती है।
🥝 *आरोग्य संजीवनी* 🍈
त्वचा के लिए फायदेमंद कीवी फ्रूट कीवी फल खाने से त्वचा को बहुत तरह के लाभ मिलते है। जिन पौष्टिक तत्वों की कमी से त्वचा मुरझा जाती है किवी फल उनकी पूर्ति करता है। इसमें विटामिन-c होता है जो त्वचा के कालेपन को दूर करता है और सूर्य की किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। कीवी का फल (kiwi fal) शरीर से विषैले तत्व को बाहर करता है जिस वजह से हमारी त्वचा चमकदार हो जाती है। कीवी फल हमारी त्वचा को रोग मुक्त और स्वथ्य बनाता है।
*_डेंगू में कीवी फ्रूट खाने का तरीका डेंगू में कीवी फ्रूट खाने का तरीका- डेंगू में कीवी के फायदे निम्नलिखित रूप से मिलते हैं क्योंकि डेंगू जैसी बीमारी में प्लेटलेट की संख्या कम हो जाती है और शरीर एक दम सुस्त हो जाता है। ऐसे में पपीता के पत्तियों का रस पीने से प्लेटलेट बढ़ने लगता है। कीवी के फल (Kiwi fruits) को भी खाने से शरीर का प्लेटलेट धीरे-धीरे बढ़ता है। किवी फल का स्वाद पपीता के पत्तियों के मुक़ाबले ज्यादा सही होता है।
📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
*घर की रक्षा के उपाय*_
*_हम जिस घर ( गृह, भवन, मकान ) में रहते हैं उसमें हमारे पुण्य से उत्पन्न दैवी शक्तियाँ और पाप से उत्पन्न विनाशक शक्तियाँ भी निवास करतीहैं। जहाँ प्रतिदिन धर्माचरण होता है वहाँ अशुभ का प्रवेश निषिद्ध होता है। एक सूक्ष्म अदृश्य कवच उस घर की रक्षा करता रहता है। सप्तशती में लिखा है कि जहाँ प्रतिदिन सप्तशती का पाठ होता है वहाँ मेरा ( देवी जी का ) निवास रहता है, मैं उस घर को कभी नहीं छोड़ती-
*जहाँ मेरे नित्य मन्दिर में इसका विधिवत पाठ होता है।मैं हमेशा उस उपस्थिति को जाने नहीं दूँगा जो मेरे साथ है घर पर कैसी कैसी विपत्तियाँ आती हैं ? इसका भी ध्यान रखना चाहिए।प्राकृतिक विपत्ति, शत्रु से विपत्ति, दस्यु ( डकैत ) से विपत्ति, राज्य की ओर से विपत्ति, शस्त्र उल्का आदि गिरने से विपत्ति, आग लगने से विपत्ति, ऊपरी बाधा से विपत्ति, भवन के फटने या ढहने से विपत्ति सम्भावित होती है। इन सभी आने वाली विपत्तियों को प्रति दिवसीय यजन से रोका जा सकता है-
*मैं घर के सदस्यों और इस घर के लोगों की रक्षा के लिए पाठ करूंगा और बलिदान दूंगा
*_बाह्य देवता की स्थापना– घर की रक्षा के लिए घर के बाहर ऊंचे स्थान पर जो दिखता रहे अपने किसी इष्ट देवता की स्थापना की जाती है। इस देवता की वार्षिकी पूजा भी की जाती है। इस वार्षिकी पूजा को बाधित नहीं करते हैं। घर के ईशान कोण या मध्य भाग में पूजन की व्यवस्था की जाती है। बड़े भवनों में प्रायः मध्य भाग में तुलसी का चौरा या हवन कुंड की व्यवस्था रहती है। घर के अन्दर शुभ वृक्षों को उत्तर दिशा में लगाया जाता है।
*न कि जहां धर्म का घर हो जिस घर में हर दिन पूजन नहीं होता, आरती की ज्वाला नहीं फूटती, घण्टी की आवाज नहीं उठती, मन्त्र स्तोत्र गूंजित नहीं होते वह घर नहीं होता। यदि प्रतिदिन हवन की व्यवस्था न हो तो भी पाठ और अमावस्या, पूर्णिमा को हवन करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
*_जिस घर में केवल शयन भोजन मात्र ही होता है वह घर धीरे धीरे सुप्त हो जाता है। उसका वास्तु पुरुष विकल हो उठता है। पूजन रहित घर में रोग, शोक, भय, आक्रमण, दीनता, संतान हानि, वंश हानि होती रहती है। बच्चे निस्तेज जन्म लेने लगते है। अकाल मृत्यु होने लगती है-
*बच्चे नष्ट हो जाते हैं, गर्भ नष्ट हो जाता है, ताकत रहती है, और कष्ट सहने वाले बच्चे बांझ होते हैं
*_बच्चे, ग्रह, भूत और रोग कोई घर नहीं जहां धर्म का आचरण हो।
*_अतः घर की आयु और उत्तमता को बनाये रखने के लिए गृह को पूजन से भरपूर रखना चाहिए। व्यक्ति के पुण्य से भूकम्प आदि में गृह सुरक्षित रहता है और गृह वासियों की रक्षा करता है।ध्यान रहे चेतन मनुष्य के प्रताप से ही जड़ जगत की भी रक्षा होती है।
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⚜️ *_एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
*_यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।


