धिक्कार उवाच ! अब शंकर कैद से मुक्त होंगे या नहीं। हरि ही जाने …..
रिपोर्टर : हरीश मिश्र
नवरात्र में हिन्दू और रमजान में मुसलमान तप ( व्रत और रोजे ) कर रहा है। सूरज की तीखी किरणों से आसमान और ज़मीन भी बेहद तप रही है।
इतनी भीषण तपन में सरस्वती के वरद् पुत्र पंडित प्रदीप मिश्र के श्रीमुख से श्री त्रिपुंड शिवमहापुराण कथा सुनने हज़ारों भक्त दशहरा मैदान पहुंच रहे हैं।
शिवपुराण कथा में एक धिक्कार प्रसंग के माध्यम से पंडित मिश्र ने कहा *” तुम्हारे घर का बाप जेल में पड़ा हो और तुम दीपावली पर गुजिया पापड़ खाते हो धिक्कार है ” ।*
पंडित जी ने तपते हुए तवे पर आस्था की बूंद गिरा दी। बूंद गिरते ही राजनैतिक, धार्मिक क्षेत्र में उमस का वातावरण उत्पन्न हो गया। उमस के बाद बादल बरसेंगे या फटेंगे कोई नहीं जानता।
स्कंधपुराण में वर्णित रायसेन दुर्ग स्थित सोमेश्वर धाम शिव मंदिर में साल भर ताला लगा रहता है। शिवरात्रि के दिन ही पूजा अर्चना के लिए मंदिर के कपाट पुरातत्व विभाग द्वारा खोले जाते हैं। *अब शंकर कैद से मुक्त होंगे या नहीं। हरि ही जाने। क्योंकि हरि की इच्छा बलवान होती है।* लेकिन नरवाई की आग जौहर स्थली तक पहुंच गई। अब इस आग को प्रशासन को सख्ती से बुझाना होगा।
चैत्र की भीषण गर्मी में शिवराज के माथे पर भी तनाव है और पसीना भी आ रहा है। *तनाव पंडित जी की वाणी से और पसीना उमा भारती के कारण आ रहा है।*
पंडित मिश्र ने शिवरात्री पर रुद्राक्ष महोत्सव पर व्यास गद्दी से आंसू बहाते हुए कथा स्थगित की थी। उनके आंसुओं से भूचाल आ गया था। असली भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय ने शिव सरकार को घेरा था। उन्होंने कहा था “पंडित जी की आंखों में आंसू देखकर हर हिंदू को अत्यंत पीड़ा और वेदना पहुंची। ” तत्काल शिवराज ने नरोत्तम मिश्र को पंडित जी की शरण में भेजा और पंडित जी के आंसू सत्ता के रुमाल से साफ़ किए। रातों-रात पंडित जी राष्ट्रीय संत के रुप में स्थापित हो गए।
श्री त्रिपुंड शिवमहापुराण कथा के लिए शिवराज सरकार के निर्देश पर रायसेन प्रशासन ने लाल कालीन बिछा कर सबसे बेहतर व्यवस्था पंडित जी के लिए की। *लेकिन किसे पता था पंडित जी के आंसू के बाद उनकी वाणी सोमेश्वर धाम को दूसरा अयोध्या बना देगी और शिवराज को कटघरे में खड़ा कर देगी।*
फेसबुक, व्हाट्सएप, टि्वटर, इंस्टाग्राम पर पंडित जी की वाणी को टैग कर शिवभक्तों ने आक्रोश व्यक्त करते लिखा *” शिवराज के राज में अगर शंकर कैद में है तो फिर यह राज किसी काम का नहीं…” ।*
अब शंकर को कैद से मुक्त कराने और शिव से प्रदेश को मुक्त कराने उमा भारती मैदान में हैं। *उमा भारती का लक्ष्य शंकर के बहाने शिवराज मुक्ति का है।*
2004 में हरि की इच्छा से शिवराज को सत्ता और भाजपा की जन-जन से जुड़ी साध्वी उमा भारती को महामाया चौक, रायसेन का मैदान मिला था। राम मंदिर आंदोलन से जुड़कर भाजपा को 2 सीटों से 182 के शिखर पर पहुंचाने वाली उमा सत्ता की दौड़ से बाहर हो गई थी । सत्ता से ही नहीं भाजपा से भी निकाल कर बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
उमा भारती के व्यक्तित्व का चित्रण करना, आकलन करना आसान नहीं है। वह कभी सहज हो जाती हैं, कभी विकराल। *कुछ दिन पहले ही नशा मुक्ति का विरोध करते हुए विकराल रूप धारण करते हुए सोमरस पर ईंट फेंक कर उन्होंने शिवराज के माथे को लहूलुहान किया था। अब सोमेश्वर पर जल अभिषेक कर शंकर की कैद से मुक्ति और शिवराज की सत्ता का विसर्जन करने का संकल्प लिया है।* देखना है शिवराज संयम के बुल्डोजर पर बैठकर विरोधियों के इरादों को नेस्तनाबूद करते हुए शंकर को कैद से कैसे मुक्त कराते हैं। सोमेश्वर धाम से शंकर को मुक्त कराना ही होगा अन्यथा 2023 में जनता धिक्कार देगी।



