वीरांगना गौरादेवी कतिया जी एवं वीर मनीराम अहिरवार जी के संघर्ष 1942 के आजादी का आन्दोलन : सरकारी सम्मान नहीं
23 अगस्त शहादत दिवस पर विशेष
लेखक : मूलचन्द मेधोनिया (शहीद सुपौत्र) अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार चीचली जिला नरसिंहपुर
देश की आजादी में कुर्बानी देने वाले वीर शहीदों और सेनानियों का नाम जब भी आदर से लिया जाता है। तब सभी को अपार गर्व होता है। तथा होना भी चाहिए कि हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में अनेकों लोगों ने बिना स्वार्थ, बिना लालच किये अपनी जान की बाजी लगाई। तब देश के लिए आजादी मिली।
भारत की स्वतंत्रता में किसी एक जाति या समुदाय ने ही लडाई लडीं। यह कहना और सरासर गलत है। महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन सन 19 42 में अगस्त क्रांति के नाम पर सम्पूर्ण देश के कोने-कोने में फैला। जिसकी चिन्गारी मध्यप्रदेश के जिला नरसिंहपुर तहसील गाडरवारा के नगर चीचली में अंग्रेजी सेना का एक दल चीचली 23 अगस्त 1942 को गोंडवाना राजमहल के सुना होने की सूचना पाकर गोंड महल पर कब्जा करने और लूट करने आ गये। महल की देखभाल उस समय अनुसूचित जाति के वीर मनीराम अहिरवार जी कर रहे थे। उन्होंने अंग्रेजी सेना को देख महल की ओर न आने की चेतावनी दी। अंग्रेजी सेना के न रुकने पर मनीराम अहिरवार जी ने उनके ऊपर पत्थरों से हमला कर दिया। अंग्रेजों ने समझने में देर नहीं की उन्होंने वीर मनीराम अहिरवार को महल का सेनिक के नाते पहली गोली चलाकर पत्थर न चलाने को रोका। मनीराम अहिरवार जी ने अंग्रेजी सेना को ललकारा और आमने-सामने युद्ध करने लगे।
अंग्रेजों से लड़ने की वीर मनीराम जी की खबर पूरे गाँव में फैली। चीचली के क्रांतिकारी युवाओं की एक टीम वीर मंशाराम जसाटी जी के नेतृत्व में महल आई। जिसमें नर्मदा प्रसाद ताम्रकार, बाबूलाल चौहरिया, इत्यादि गांव के क्रांतिकारी युवाओं ने भी आकर युद्ध रोकने का प्रयास किया। अंग्रेजी सेना के द्वारा मनीराम जी के ऊपर गोली की बौछार की जा रही थी। वीर मंशाराम जसाटी तिरंगा झंडा को लेकर इंकलाब जिंदाबाद, महात्मा गांधी अमर रहे के नारे लगा कर मनीराम अहिरवार जी का हौसला बड़ा रहे थे। उन्होंने आगे बढते हुए अपने साथीओ सहित अंग्रेजी सेना गांव छोडो का नारा लगाया। तभी अंग्रेजी सेना से चली गोली से वीर मंशाराम जसाटी जी घटना स्थल पर शहीद हो गये। मनीराम जी ने जब अपने साथी वीर मंशाराम जसाटी की शहादत पर आग बबूला होकर गाली देते हुए अपना सीना तान अंग्रेजी सेना को ललकारा। उन्होंने साले गोरे तुम धोके से मेरे साथी को गोली मारी। तुम्हारी औकात हो तो मुझ पर गोली चलाओं।
वीर मनीराम अहिरवार ने अपने कपड़े फैंक कर अंग्रेजी सेना से भीषण युद्ध करने लगे। पत्थर गुलेल में भर भर के एक एक अंग्रेजी सैनिकों को रक्त रंजित करने लगे। अंग्रेजी सेना के द्वारा मनीराम अहिरवार जी को लक्ष्य करके गोली पे गोली चलाई जा रही थी। कतिया समाज अनुसूचित जाति की महान वीरांगना गौरादेवी जी उनके घर के सामने खड़े होकर मनीराम जी युद्धरत थे। गौरादेवी जी मनीराम अहिरवार जी का सहयोग कर रही थी। तथा उनकी बेटी घर के बाहर घुम रही थी, जिसे सुरक्षित लेने वह भी युद्ध स्थल पर आ गई। मनीराम अहिरवार के पत्थरों की कमी देख उन्होंने ढेरों पत्थर मनीराम जी को दिये। उनके अचूक पत्थरों के निशाने से अंग्रेजी सेना घायल हो गई और लहू-लुहान होने पर पुनः मनीराम पर गोली चली। वह गोली वीरांगना गौरादेवी कतिया जी के सीने में लगी और वह भी शहीद हो गई।
अंग्रेजों ने मनीराम अहिरवार जी से स्वयं हार मान कर गांव छोड़ कर भाग गये। दूसरे दिन चीचली 24 अगस्त को अफसर के साथ अंग्रेजी सेना मनीराम अहिरवार जी को गिरफ्तार करने आई। बहुत खोज के बाद वह नहीं मिले। तब उनके साथियों को गिरफ्तार कर ले गये। मनीराम अहिरवार जी को अंग्रेजी सेना ने जाल फैला कर सूचना दी गई कि गोंड महल के राजा साहब गांव आ गये हैं। वह मनीराम अहिरवार को 20 एकड़ जमीन और नौकरी देकर पुरस्कार से सम्मानित कर रहे है। ऐसी खबरें देकर मनीराम अहिरवार जी को सैनिक धोखे से अपने साथ उनके गुप्त स्थान पर ले गई। वहां ले जाकर उन्हें जीवित रहने के लिए अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों के लोगों को अग्रेजी सेना में गुलामी एवं बेगारी करने हेतु लाने के दबाव दिया। लालच दिया कि तुम्हें सेना का सरदार बनाये। वीर मनीराम ने अंग्रेजी अफसरों की कोई भी शर्त नहीं मानी, तथा साफ कह दिया कि मेरी अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों से मै किसी भी प्रकार की गुलामी नहीं करने दूंगा। न ही मैं तुम्हारे लोभ में आने वाला नहीं हूँ। अपने स्वाभिमान और गोंडवाना साम्राज्य के राजमहल की धरोहर एवं मात्रृभूमी पर जान न्यौछावर करने वाले मनीराम अहिरवार जी पर अत्याचार, दमनकारी प्रताड़ना दी जाने लगी। उन पर लाठीचार्ज, गर्म पानी डाला जाकर अमानवीय क्रत्य अंग्रेजी सेना के द्वारा किये गये। वीर मनीराम जी ने अंग्रेजी सेना के विरुद्ध नारे लगाये। इंकलाब जिंदाबाद, महात्मा गांधी के नारा देते हुए वतन व मात्रृभूमि पर कुर्बानी देकर शहीद हो गये।
ऐसे महान बलिदानी क्रांतिकारी वीर सपूत मनीराम अहिरवार जी अनुसूचित जाति के और वीरांगना गौरादेवी जैसी साहसिक कतिया समाज की महान नायिका थी। जिन्होंने हंसते हंसते अपने प्राणों को न्यौछावर किया। आज हमारे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया गया। लेकिन बड़े दुख की बात है कि हमारे अनुसूचीत जाति के वीर शहीद मनीराम और गौरादेवी जी की समाधि का न जीर्णोद्धार किया और न ही कोई स्मारक बनाया है। क्योंकि जातिगत भेदभाव और नेताओं के द्वारा वीरांगना गौरादेवी व मनीराम अहिरवार जी जैसे महान पराक्रमी क्रांतिकारी शहीदों को आज तक कोई सम्मान नहीं दिया। न ही उत्तराधिकारी को सम्मान दिया। हमारे अहिरवार, कतिया समाज के आजादी में योगदान देने वाले वीर शहीदों को सम्मान कब दिया जायेगा? समाज मांग उठा रही अब अनुसूचित जाति के महापुरुषों की आवाज़ नहीं दबेगी।





