ज्योतिष

आज का पंचाग रविवार 04 सितम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

….. ✦••• जय श्री हरि •••✦ ….
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 04 सितम्बर 202
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु_
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- अष्टमी तिथि 10:40:00 तक तदोपरान्त नवमी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी हैं तथा नवमी तिथि की स्वामिनि दुर्गा जी हैं।
💫 नक्षत्रः- ज्येष्ठा 21:43:00 तक तदोपरान्त मूल
🪐 नक्षत्र स्वामीः- ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं तथा मूल नक्षत्र के स्वामी केतु देव हैं।
📢 योगः- विषकुंभ 14:23:00 तक तदोपरान्त प्रीति
⚡ प्रथम करण : बव – 10:39 ए एम तक
✨ द्वितीय करण: बालव – 09:36 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक 03:29:00 P.M से 05:04:00P.M तक
⚜️ दिशाशूलः रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो घर से पान या घी खाकर निकलें।
🤖 राहुकालः- राहु काल 05:04:00P.M से 06:39:00P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।_
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:35:19
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:06:28
🫅🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:30 ए एम से 05:15 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:52 ए एम से 06:00 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:55 ए एम से 12:45 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:26 पी एम से 03:17 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:27 पी एम से 06:51 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:39 पी एम से 07:48 पी एम
💧 अमृत काल : 01:22 पी एम से 02:53 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:57 पी एम से 12:43 ए एम, सितम्बर 05
☀️ सर्वार्थ सिद्धि योग : 09:43 पी एम से 06:01 ए एम, सितम्बर 05
❄️ रवि योग : 09:43 पी एम से 06:01 ए एम, सितम्बर 05
☄️ ज्येष्ठा नक्षत्र – 9 बजकर 43 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन- इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्री दुर्गाष्टमी व्रत, श्री राधाष्टमी व्रत, श्री दूर्वाष्टमी भौमाष्टमी, ज्येष्ठा नक्षत्र में ज्येष्ठा गौरी का व्रत, आज से 16 दिवसात्मक श्री महालक्ष्मी व्रतारम्भ, पुष्पांजलि व्रत पूर्ण (जैन ) , मेला भर्तृहरि (3 दिन ), महर्षि दधीचि जयंती, श्री पुष्प दन्त जी मोक्ष कल्याण, श्री दादा भाई नौरोजी जतन्ती, श्री सुशील कुमार शिंदे जन्म दिवस, मूल संज्ञक नक्षत्र जारी
✍🏽 विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल अर्थात कोहड़ा एवं कद्दू दोनों ही त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌸
साफ-सफाई का रखें ध्यान
आप जिस तरह घर और फर्श की साफ-सफाई करते हैं, ठीक उसी तरह दीवारों की भी साफ-सफाई करें। गंदी या धूल जमी दीवारों से घर पर नकारात्मकता आती है। दीवारों के कोनों पर मकड़ी के जाले भी हटाते रहें। यह दरिद्रता का कारण बनते हैं। दीवारों पर थूकना और पैर रखना भी गलत तरीका है।
दरार दीवारों से बढ़ता है वाद-विवाद
घर की दीवारों में दरारें बिल्कुन नहीं होनी चाहिए। इससे पारिवारिक वाद-विवाद और लड़ाई-झगड़े बढ़ते हैं। वास्तु के अनुसार घर की उत्तर दिशा की दीवार में दरार नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह दिशा भगवान कुबेर की दिशा मानी जाती है। यदि उत्तर दिशा की दीवारें सही होती है तो घर पर सुख और समृद्धि बनी रहती है।दीवारों पर रंग-रोगन कराते समय कलर्स का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। वास्तु के अनुसार, गहरा नीला, काला, गहरा पीला, नारंगी, चटक लाल रंग और बैंगनी कलर का पेंट नहीं कराना चाहिए। आप दिशा के अनुसार हल्के, सौम्य और सात्विक रंगों का ही प्रयोग करें।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अंतिम संस्कार नहीं करते हैं : गरुण पुराण के अनुसार सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार किया जाता है तो मरने वाले को परलोक में कष्ट भोगने पड़ते हैं। अगले जन्म में उसके अंगों में खराबी आ सकती है।
दही या चावल का सेवन : सूर्यास्त के बाद दही का सेवन करना भी वर्जित है। दही का दान भी नहीं करते हैं। दही का संबंध शुक्र ग्रह से है और शुक्र को धन वैभव का प्रदाता माना गया है। सूर्यास्त के समय या सूर्यास्त के बाद दही का दान करने से सुख-समृद्धि चली जाती है। इसी तरह सूर्यास्त के बाद चावल का सेवन भी नहीं किया जाता है। सनातन धर्म के अनुसार तो सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे रोग बढ़ते हैं। इसके और भी कई नुकसान होते हैं।
झाड़ू-पोछा नहीं लगाते हैं : मान्यता अनुसार सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू-पोछा या साफ-सफाई नहीं करनी चाहिए। सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से धन हानि होने लगती है।
सोना वर्जित है : सूर्यास्त के ठीक बाद या सूर्यास्त के समय सोना वर्जित माना गया है साथ ही इस समय भोग और स्त्री संग सोना भी वर्जित है। इससे आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इससे धन और सेहत की हानि होती है। शास्त्रों में सूर्यास्त का समय पूजन-वंदन के लिए निश्चित किया गया है।
👉🏼 नोट : सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार करना, तुलसी के पौधे को छूना दही और चालव का सेवन करना सबसे बड़ा नुकसान माना जाता है, जिसकी भरपाई बहुत ही कठिन होती है। इससे देवी लक्ष्मी सदा के लिए रूठ जाती है।
🍸 आरोग्य संजीवनी 🍶
मुंह की दुर्गंध को भगाने के लिए खूब पिएं पानी
हमारे शरीर का ज्यादातर हिस्सा पानी से बना है इसलिए बॉडी में पानी की कभी कमी नहीं होने चाहिए वरना आप डिहाइड्रेशन के शिकार बन जाते हैं। इसके अलावा आपके मुंह में लार का प्रोडक्शन कम होने लगता है।इसकी वजह से सूखे मुंह में कीटाणु अपनी आबादी तेजी से बढ़ाने लगते हैं। कई बार खाना दांतों में फंस जाता है और कैविटी की वजह बन जाता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। इसके अलावा खाने के बाद नमक और गुनगुने पानी का कुल्ला करें। इससे मुंह की बदबू कम करने में मदद मिलेगी
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्री कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव है। योगेश्वर श्रीकृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को (अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए) मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे, अत: इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। स्कन्द पुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानबूझ कर श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को नहीं करता है, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। ब्रह्मपुराण का कथन है कि कलियुग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में अट्ठाइसवें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण अवतरित/उत्पन्न हुए थे। यदि दिन या रात में कलामात्र भी रोहिणी न हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि में इस व्रत को करें। भविष्य पुराण का वचन है- श्रावण मास (अमांत) के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। केवल अष्टमी तिथि में ही उपवास करना कहा गया है। यदि वही तिथि रोहिणी नक्षत्र से युक्त हो तो ‘जयंती’ नाम से संबोधित की जाएगी। वह्निपुराण का वचन है कि कृष्णपक्ष की जन्माष्टमी में यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसको जयंती नाम से ही संबोधित किया जाएगा। अतः उसमें प्रयत्न से उपवास करना चाहिए। विष्णुरहस्यादि वचन से- कृष्णपक्ष की अष्टमी रोहिणी नक्षत्र से युक्त भाद्रपद मास में हो तो वह जयंती नामवाली ही कही जाएगी। वशिष्ठ संहिता का मत है- यदि अष्टमी तथा रोहिणी इन दोनों का योग अहोरात्र में असम्पूर्ण भी हो तो मुहूर्त मात्र में भी अहोरात्र के योग में उपवास करना चाहिए। ‘मदन रत्न’ में स्कन्द पुराण का वचन है कि जो उत्तम पुरुष है, वे निश्चित रूप से जन्माष्टमी व्रत को इस लोक में करते हैं। उनके पास सदैव स्थिर लक्ष्मी होती है। इस व्रत के करने के प्रभाव से उनके समस्त कार्य सिद्ध होते हैं। विष्णुधर्म के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी विद्यमान हो तो उसमें कृष्ण का अर्चन और पूजन करने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। महर्षि भृगु ने कहा है- जन्माष्टमी, रोहिणी और शिवरात्रि ये पूर्वविद्धा ही करनी चाहिए तथा तिथि एवं नक्षत्र के अन्त में पारणा करें। इसमें केवल रोहिणी उपवास भी सिद्ध है।
भगवान श्रीकृष्ण ही थे, जिन्होंने अर्जुन को कायरता से वीरता, विषाद से प्रसाद की ओर जाने का दिव्य संदेश श्रीमदभगवदगीता के माध्यम से दिया। कालिया नाग के फन पर नृत्य किया, विदुराणी का साग खाया और गोवर्धन पर्वत को उठाकर गिरिधारी कहलाये।
समय पड़ने पर उन्होंने दुर्योधन की जंघा पर भीम से प्रहार करवाया, शिशुपाल की गालियाँ सुनी पर क्रोध आने पर सुदर्शन चक्र भी उठाया। अर्जुन के सारथी बनकर उन्होंने पाण्डवों को महाभारत के संग्राम में जीत दिलवायी। सोलह कलाओं से पूर्ण वह भगवान श्रीकृष्ण ही थे, जिन्होंने मित्र धर्म के निर्वाह के लिए ग़रीब सुदामा के पोटली के कच्चे चावलों को खाया और बदले में उन्हें राज्य दिया। बोलो कृष्ण कन्हैया लाल की जय।।
⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।
अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।

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