धार्मिक
श्राद्ध पक्ष : माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है
रिपोर्टर : आकाश गोहिल
बेगमगंज । माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं। इसी को लेकर नगर की सेमरी नदी, बीना नदी, दूधई नदी, त्रिवेणी संगम सहित जलाशयों पर पितरों को जल अर्पित करने का कार्य विधि विधान के साथ प्रतिदिन संपन्न हो रहा है। अलग-अलग नदी के घाटों पर पंडितों द्वारा धार्मिक मंत्रों के उच्चारण के साथ तर्पण का कार्य कराया जा रहा है। पंडित नवीन चतुर्वेदी का कहना है 16 दिन का होता है पितरों को पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक चलता है ।

