मध्य प्रदेश

जैन समाज ने अहिंसा दिवस पर आयोजित किए कई कार्यक्रम

व्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । अहिंसा दिवस के उपलक्ष में नगर में संपूर्ण जिला रायसेन की युवा शक्ति का जमावड़ा हुआ जिसने नगर के प्रमुख जैन बड़ा मंदिर से सफेद वस्त्रों में एक पंच रंगा यात्रा और अहिंसा बाइक रैली नगर के मुख्य मार्गों से निकाली जिसमें पावन आशीर्वाद पूज्य मुनि समता सागर, महासागर निष्काम सागर, लक्ष्य निश्चित सागर महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ और संपूर्ण जिले के युवा वर्ग में अति उत्साह के साथ भाग लिया । रैली का समापन वापस बड़े मंदिर जीके विद्यासागर सभागार में हुआ जहां पर मुनि श्री के मंगल देशना सभी को सुनने को मिली, शाकाहार प्रचारक भाई शफीक खान सागर अमित पथरिया आदि ने अपने विचार रखे ।
कार्यक्रम में संत समता सागर महाराज ने उपस्थित लोगों को नशा नहीं करने की प्रतिज्ञा दिलाई गई। साथ ही एकजुट होकर नशामुक्ति अभियान के तहत समुदाय, परिवार, दोस्तों को भी नशा नहीं करने हेतु प्रेरित करने की प्रतिज्ञा दिलाई गई। सभी लोगों से प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने का वचन लिया । उपस्थित करीब 1000 युवाओं ने शपथ ली कि अंडा, मुर्गा, शराब का त्याग जीवन भर नहीं करेंगें।
कार्यक्रम की समाप्ति पर प्रवचन हुए जिसमें समता सागर महाराज ने बताया कि जिन क्रियाओं से हिंसा हो उन्हें आरम्भ कहते हैं। गृहस्थ जब तक घर में है उसकी यह क्रियाएं छूट ही नहीं सकती। किसान भी कभी आरम्भ नहीं छोड़ सकता। कृषि से भी ज्यादा आरम्भ कभी- कभी संकेत (हस्ताक्षर) से भी हो जाता है। आरम्भ का परिधि क्षेत्र बहुत बड़ा है। किसी ने आचार्य श्री जी से पूछा कि- आरम्भ और सावद्य में क्या अंतर है? तब आचार्य श्री ने कहा कि- कुंआ खोदना आरम्भ है और उसमें से एक बाल्टी पानी निकालना सावद्य में आएगा। इसी विषय को आगे बढ़ाते हुए आचार्य श्री ने कहा कि- पटाखे की दुकान खोलना महान् आरम्भ (पाप) है। हिंसादान नाम के अनर्थदण्ड से भी अधिक पाप लगता है। पटाखे की दुकान खोलने वाले को घोर पाप बंध होता है जिससे दुर्गति में जाना पड़ता है। इसलिए दुर्गाति में ले जाने वाले इस प्रकार के धंधे श्रावकों को कभी नहीं करना चाहिए। जिससे संकल्पी हिंसा हो ऐसी कीटनाशक दवाईयाँ भी नहीं बेचना चाहिए। गर्भपात की दवाईया भी नहीं बेचनी चाहिए। प्रत्येक श्रावक का संकल्पी हिंसा का मन, वचन, काय एवं कृतकारित अनुमोदना से त्याग होना चाहिए। इस संस्मरण से बड़े लोगों को तो शिक्षा मिलती ही है, लेकिन छोटे बच्चों को भी यह शिक्षा ले लेनी चाहिए कि उन्हें कभी भी पटाखे नहीं चलाना चाहिए। पटाखे चलाने से जीव हिंसा का पाप लगता है, प्रभु एवं गुरु की आज्ञा का उल्लंघन होता है, नरक गति में जाकर दुःख भोगना पड़ता है एवं जन,धन की हानि होती हैं। किसी का भी पुतला जलाने, जलवाने या उसकी प्रशंसा करने से भी संकल्पी हिंसा का दोष लागता है। वीडियोगेम खेलने में एवं मछली, चीड़िया, हाथी, गाय आदि के आकार में ढली हुई मिठाईयों का सेवन करने से भी पाप लगता है। मनुष्यों एवं पशुओं के चित्रों से चित्रित वस्त्र भी नहीं पहनना चाहिए। जमीन पर रंगोली आदि में भी पशु-पक्षियों के चित्र नहीं बनाना चाहिए। क्रोध में आकर किसी की तस्वीर भी नहीं फाड़ना चाहिए। क्योंकि इन सब क्रियाओं के करने से व्यर्थ में ही घोर पाप का बंध होता है।
अंत में जिला परिषद के अध्यक्ष पुष्पेंद्र जैन ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के बीच में बाइक रैली के दौरान गांधी बाजार विजय स्तंभ स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर समाज अध्यक्ष अक्षय सर्राफ जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र जैन द्वारा माल्यार्पण किया गया।

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