ज्योतिष

आज का पंचाग गुरुवार  06 अक्टूबर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

..………. ✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦ ……….
             🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾
               *_गुरुवार  06 अक्टूबर 2022_*

*_मंगल श्री विष्णु मंत्र :-_*
*_मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।_*
*_मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥_*
🚩 *_06 अक्टूबर 2022 दिन गुरुवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि पापांकुशा नाम का एकादशी व्रत सबके लिए है। आप सभी एकादशी व्रतियों को पापांकुशा एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक व्यक्ति को अवश्य करना चाहिये।।_*
☄️ *_दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।_*
*_गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।_*
*_गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।_*
🔮 *_शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022_*
🌐 *_संवत्सर नाम-राक्षस_*
✡️ *_शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)_*
☸️ *_काली सम्वत 5123_*
☣️ *_सायन – दक्षिणायन_*
🌦️ *_ऋतु – सौर शरद ऋतु_*
🌤️ *_मास – आश्र्विन माह_*
🌖 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष_*
📆 *_तिथि :- एकादशी 9.40 AM तक तत्पश्चात द्वादशी_*
🖍️ *_तिथि का स्वामी – एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विश्वदेव जी और द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है।_*
💫 *_नक्षत्र – धनिष्ठा 19.42 PM तक तत्पश्चात शतभिषा_*
🪐 *_नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी –   धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल और देवता वसु हैं।_*
📣 *_योग :- शूल_*
👉🏼 *_योग के स्वामी, स्वभाव :- शूल योग के स्वामी सर्प एवं स्वभाव हानिकारक है।_*
⚡ *_प्रथम करण :- विष्टि 9.40 AM तक_*
👉🏼 *_करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है।_*
✨ *_द्वितीय करण :- बव 20.32 PM तक तत्पश्चात बालव_*
👉🏼 *_करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है, बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है।_*
⚜️ *_दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।_*
🌞 *_सूर्योदय – प्रातः 05:47:18_*
🌅 *_सूर्यास्त – सायं 17:32:39_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : 04:39 ए एम से 05:28 ए एम_*
🌇 *_प्रातः सन्ध्या : 05:03 ए एम से 06:17 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : 11:46 ए एम से 12:33 पी एम_*
🔯 *_विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:54 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : 05:50 पी एम से 06:14 पी एम_*
🏙️ *_सायाह्न सन्ध्या : 06:02 पी एम से 07:15 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : 09:58 ए एम से 11:28 ए एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:34 ए एम, अक्टूबर 07_*
☄️ *_शूल योग-  रात 2 बजकर 21 मिनट तक_*
💥 *_धनिष्ठा नक्षत्र – शाम 7 बजकर 42 मिनट तक_*
🚓 *_यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पीले फल अर्पण करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – विश्व वन्य प्राणी दिवस,साईंबाबा महासमाधि दिवस राष्ट्रीय दिवस,खत्री दिवस राष्ट्रीय दिवस,वन्यजीव सप्ताह, पंचक प्रारंभ_*
✍🏽 *_विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।_*

                 🏠 *_Vastu tips_* 🏚️
*_नैवेद्य अर्पित करने के बाद क्या करें किसी भी पूजा में देवी-देवता को प्रसाद या नैवेद्य अर्पित किया जाता है, लेकिन उस प्रसाद का बाद में, यानी चढ़ाए जाने के बाद क्या करना चाहिये- उसे खाना चाहिये, फेंकना चाहिये, ऐसे ही पड़ा रहने देना चाहिये और एक बात और कि किस बर्तन में प्रसाद चढ़ाना चाहिये? क्योंकि इन सब चीजों का घर पर सीधा असर पड़ता है।_*
*_इन पात्रों में चढ़ाएं भोग वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार भगवान को नैवेद्य को धातु, यानि सोने, चांदी या ताम्बे के, पत्थर, यज्ञीय लकड़ी या
*_देवता के पास ना छोड़े भोग चढ़ाया हुआ नैवेद्य तत्काल निर्माल्य हो जाता है और उसे तुरंत उठा लेना चाहिये। प्रसाद को खाना चाहिये और यथा संभव बांटना भी चाहिये। देवता के पास पड़ा हुआ नैवेद्य निगेटिव एनर्जी छोड़ता है। इसलिए देवता को समर्पित करके प्रसाद को तुरंत उठा लेना चाहिये। ऐसा न करने पर विश्वकसेन, चण्डेश्वर, चन्डान्शु और चांडाली नामक शक्तियों के आने की बात कही गई है।_*

                 ❇️ *_जीवनोपयोगी कुंजियां_* ⚜️

*_पढ़ने वाले बच्चो के गले में ब्राह्मी बूटी धारण करें। ऐसा माना जाता है कि ब्राह्मी बूटी को गले में धारण करने या सेवन करने से भी स्मरण शक्ति बढ़ती है।_*
*_शास्त्रानुसार जब आपका सूर्य स्वर (दायां स्वर) नासिका चल रहा हो, अर्थात ( नाक के दाहिने हिस्से से साँस ले रहे हो ) तब कठिन विषय का अध्ययन करें,इस उपाय से मुश्किल से मुश्किल पाठ भी शीघ्र याद हो जाता है।_*
*_विद्यार्थियों के कमरे में दीवार पर नीम की डाली लगनी चाहिए इससे कमरे में शुद्ध हवा के साथ साथ सकारात्मक उर्जा का भी प्रभाव बना रहता है ।_*
*_भगवान गणोश जी को हर बुधवार के दिन दूर्वा चढ़ाने से बच्चों में कुशाग्र बुद्धि विकसित होती है।_*
*_परीक्षा में जाने से पूर्व मीठे दही पर तुलसी के पत्ते रखकर ग्रहण करके घर से निकलें।_*
              🍻 *_आरोग्य संजीवनी_* 🍶
*_अपने भोजन में अधिक से अधिक विटामिन -सी युक्त पदार्थों जैसे :अमरुद ,नींबू ,संतरे ,पपीते अदि फलों का प्रयोग करें ये कान के दर्द को कम करने में लाभ देते है।_*
*_केले की पेड की हरी छाल निकालें। इसे गरम करके सोते वक्त इसकी 3-4 बूंदें कान में डालें । कान दर्द की यह बहुत ही उम्दा दवा है।_*
*_मुलहठी कान दर्द में उपयोगी है। इसे घी में भूनकर बारीक पीसकर पेस्ट बनाएं। फिर इसे कान में लगाएं। कुछ ही मिनिट में दर्द बिलकुल समाप्त होगा।_*
*_एक मूली के बारीक टुकडे करके उसे सरसों के तेल में पकावें। फिर इसे छानकर शीशी में भर लें ।कान दर्द में इसकी 2-4 बूंदे दिन में 3-4 बार टपकाने से जल्दी ही आराम मिलता है।_*
*_अजवाईन का तेल और तिल का तेल 1:3 में मिलाएं, इसे मामूली गरम करके कान में 2-4 बूंदे टपका दें। कान दर्द में यह बहुत उपयोगी है।_*
                   📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
           *_आचार्य श्री गोपी राम को श्रेष्ठ विद्वानों में से एक माना जाता है। आचार्य श्री गोपी राम को धर्म, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र आदि तमाम विषयों में गहन जानकारी दी हैं । उन्होंने अपनी नीतियों में काफी कुछ लिखा है। उनके द्वारा बताई गई हर एक नीति मनुष्य को जीवन में लक्ष्य पाने के लिए प्रेरित करती हैं। यदि  इन बातों पर गौर किया जाए, तो व्यक्ति कई तरह की परेशानियों से बचा रह सकता है। हमने अपनी एक नीति में ऐसी चीजों के बारे में बताया हैं जो व्यक्ति को अंदर ही अंदर मार देती हैं। आइए जानते हैं।
🗣️ *_श्लोक_*
कान्तावियोगः स्वजनापमानं ऋणस्य शेषं कुनृपस्य सेवा ।
दारिद्र्यभावाद्विमुखं च मित्रं विनाग्निना पञ्च दहन्ति कायम् ॥
        पत्नी का वियोग, अपने ही लोगों से बे-इज्जत होना, बचा हुआ ऋण, दुष्ट राजा की सेवा करना, गरीबी एवं दरिद्रों की सभा करना आदि अंदर से मर जाने के बराबर है
          आचार्य श्री गोपी राम के इस कथन के अनुसार, पत्नी के वियोग में व्यक्ति दुनियादारी की हर एक चीज को भूल जाता है। एक सुशील पत्नी, पति के साथ-साथ पूरे घर-परिवार का ध्यान रखती हैं। लेकिन अगर पत्नी क्रोधी प्रवृत्ति की हैं तो घर में कभी भी शांति नहीं रह सकती। ऐसे में पति अंदर ही अंदर जलता रहता है।
         इसी तरह जब घर पर ही व्यक्ति की इजज्त नहीं होती हैं तो उसके अंदर बहुत अधिक ग्लानि भरी होती हैं। जिसके कारण वह धीरे-धीरे मरे हुए व्यक्ति के समान हो जाता है।
        कहते हैं कि बचा हुआ कर्ज भी व्यक्ति को अंदर से मार देता है। वह उश कर्ज को चुकाने के लिए जहां एक ओर जी-तोड़ मेहनत करता है। वहीं दूसरी ओर उसे इस बात का हमेशा डर रहता हैं कि कहीं साहूकार आकर सभी के सामने पैसे न मांग लें। इसी तरह दुष्ट राजा की सेवा करना और गरीबी और दरिद्रता पर जीना हर किसी को अंदर से जलाकर रख देता है।
*_┈┉ΦΦΦ❀((हरि ॐ))❀ΦΦΦ┉┈_*
⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।_*
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।

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