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सड़कों पर उड़ रहे धूल के कणों से बचाएं आंखें, वरना सूख जाएगा आंसुओं का दरिया

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
धूल के कण अश्रु ग्रंथियों के सूक्ष्मतम छिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे आंसू बाहर नहीं आ पाते
सड़कों पर उड़ रहे धूल के कणों से बचाएं आंखें, वरना सूख जाएगा आंसुओं का दरिया,जिला अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में आंख से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ी
इन बातों का रखें ध्यान
● दो पहिया वाहन चालक चश्मे का उपयोग करें
● आंखों को ठंडे पानी से धोते रहें
● लाल होने, पानी आने या चुभन महसूस होने पर डॉक्टर से परामर्श लें
● हाथों को साफ करते रहें और बार-बार आंखें न छुएं
● धूल और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
रायसेन। शहर की उखड़ी सड़कें और जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्यों की वजह से राजधानी की हवा में जहरीली धूल का गुबार छाया है। सड़कों पर फैली महीन गिट्टी और इसके कणों की वजह से बड़ी संख्या में लोग आंख से जुड़ी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। जिसके चलते जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में आंख से जुड़े नाखूना रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इस रोग में मरीज की आंखों में धूल के कण पहली परत के अंदर तक पहुंच जाते हैं। इससे मरीज की आंखें लाल हो जाती हैं और सूज जाती हैं।
चिकित्सकों नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ एसी अग्रवाल ,डॉ शरद साहू का कहना है धूल के जहरीले कण विषैले होते हैं, इसलिए आंखों में तेज दर्द होता है। बढ़ते प्रदूषण के कारण आंसुओं का दरिया सूखने लगता है। आंखों का पानी मरने लगता है। धूल के कण आंखों की अश्रु ग्रंथियों के सूक्ष्मतम छिद्रों को बंद कर देते हैं। जिससे आंसू बाहर नहीं आ पाते और इससे आंख की नमी भी कम होती जाती है। या यूं कहिए कि आंखों का पानी मरने लगता है। जाहिर है कि इससे आंखों की रोशनी पर भी असर पडता है।
दिन-रात उड़ता धूल का गुबार…..
एक तरफ पूरे शहर की सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। दूसरी तरफ कई इलाकों में बड़ी संख्या में निर्माण कार्य चल रहे हैं। कहीं सड़कें भी बन रही हैं। दरगाह शरीफ मजार भोपाल रोड़ और सांची रोड़ सागर भोपाल स्टेट हाइवे पर बन रही हाइवे चौड़ीकरण में तो अन्य इलाकों की तुलना में तीन गुना धूल है। तेज रफ्तार वाहनों के चलते दिन-रात धूल के कण उड़ते रहते हैं। रात में इन सड़कों पर ट्रकों के आने के बाद धूल के कणों से कोहरे जैसी स्थिति बन जाती है।
धूल से पटे इलाके….
बारिश का दौर खत्म होते ही कई इलाके धूल से पट गए हैं। जगह-जगह निर्माण कार्य हो रहा है। इन्हें ढंका नहीं गया है। सड़क पर भी धूल है। इससे परेशान नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास आंखें मलते पहुंच रहे हैं। आंखों में संक्रमण और एलर्जी के साथ सूखी आंखों के मामलों में हाल के दिनों में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। जिला अस्पताल,पाटनदेव के शासकीय प्राथमिक अस्पताल में हर दिन इस तरह के कम से कम 100 से 150 मामले आ रहे हैं।
आंखों में रह जाते हैं बारीक कण
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डॉ. शरद साहू का कहना है कि इस समय आंखों में खुजली, सूजन, पलक की भीतरी परत (कंजंक्टिवा) में संक्रमण की शिकायतें बढ़ी हैं। कंजक्टिवाइटिस और सूखी आंखों की समस्याएं इन दिनों आम हैं।

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