बंदियों को भी संवैधानिक अधिकार : न्यायाधीश केएस शाक्य
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली अंतर्गत द्वारा 31 अक्टूबर से 13 नवंबर तक “हक हमारा भी तो है” अभियान अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तहसील विधिक सेवा समिति अध्यक्ष एवं अपर सत्र न्यायाधीश केएस शाक्य द्वारा विधिक सेवा दिवस के अवसर पर उप जेल बेगमगंज में बंदीजनों के संवैधानिक अधिकारों के संबंध में विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर में उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि बंदियों को किस प्रकार अपने परिवार के साथ संपर्क व मुलाकात का अधिकार होता है तथा अगर वे चाहें तो नि:शुल्क विधिक सहायता व सलाह भी प्राप्त कर सकते हैं। निर्धन बंदीजन अगर अपना स्वयं के व्यय पर अधिवक्ता नियुक्त करने में सक्षम नहीं है तो ऐसे बंदीजन अपने प्रकरणों में पैरवी करने हेतु विधिक सहायता द्वारा नि:शुल्क अधिवक्ता प्राप्त कर सकते हैं ।
न्यायाधीश केएस शाक्य द्वारा बंदीजनों को आगामी 12 नवंबर को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में भी जानकारी देते हुए कहा कि उक्त लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में आपसी सहमति से राजीनामा कर पक्षकार अपने प्रकरण को निराकृत करा सकते हैं। उक्त लोक अदालत में विद्युत, जलकर, संपत्ति कर एवं बैंक के प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में शासन द्वारा छूट भी प्रदान की गई है । जिसका लाभ उठाते हुए अधिक से अधिक संख्या में पक्षकार अपने प्रकरण का निराकरण कराकर लाभ उठा सकते हैं ।
शिविर में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मो. असलम देहलवी द्वारा विभिन्न कानूनी बिंदुओं पर अपने विचार रखते हुए बंदियों को उनके मौलिक अधिकारों सहित निशुल्क कानूनी सहायता लेने के संबंध में जानकारी दी गई । शिविर में उप जेल अधीक्षक कमलकिशोर कोरी एवं जेल में निरुद्ध बंदीजन उपस्थित रहे ।



