हड़ताल का तीसरा दिन: शासन की सद्बुद्धि के लिए आशा-उषा कार्यकर्ताओं ने किया हनुमान चालीसा का पाठ
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। अपनी लंबित मांगों के निराकरण के लिए आशा-उषा और आशा सहयोगी सात दिवसीय हड़ताल पर हैं। हड़ताल के तीसरे रोज बुधवार के दिन संगठन की जिलाध्यक्ष कृष्ना ठाकुर के निवास अर्जुन नगर पर जिलेभर की आशा-उषा, आशा सहयोगी श्रमिक संघ ने प्रदेश सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया। और हवन करते हुए शासन प्रशासन को सद्बुद्धि देने के लिए प्रार्थना की। संघ की अध्यक्ष कृष्ना ठाकुर का कहना है कि विभाग हमें अतिरिक्त आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए दबाव बना रहा है।यह कार्यकर्ताओं को मंजूर नहीं है। क्योंकि हमारे पास पहले से ही बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं। इसके साथ ही प्रदेश की अधिकांश आशाएं मात्र 2 हजार रुपए वेतन में गुजारा करने को विवश हैं। यह राशि भी केन्द्र सरकार दे रही है।
प्रोत्साहन राशि का भुगतान बकाया …
उषा, आशाओं द्वारा कोविड वैक्सीनेशन ड्यूटी, डीपीटी बूस्टर वैक्सीन, एनसीडी सर्वे, परिवार नियोजन, निर्वाचन कार्य सहित सभी काम का बकाया प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने सहित प्रत्येक माह की 5 तारीख को आशा एवं पर्यवेक्षकों का भुगतान देने की मांग भी संघ ने उठाई है।आशा एवं पर्यवेक्षकों को वेतन सहित 20 कैजुअल अवकाश एवं मेडिकल लीव का ठोस नियम बनाने की मांग भी संगठन ने उठाई है। इसके साथ ही कुशल श्रेणी के न्यूनतम वेतने की दर पर 6 माह का मातृत्व अवकाश एवं अन्य सुविधाएं देने किसी जांच में आशाओं की सेवा समाप्ति पर तुरंत रोक लगाने सहित अन्य मांगों को लेकर आशा-उषा और आशा सहयोगी संगठन सीएमएचओ कार्यालय रायसेन के पास सड़क किनारे पहले रोज धरना प्रदर्शन किय।उन्होंने बताया कि आगामी 18 नवंबर शुक्रवार को लाड़ली लक्ष्मी पार्क सांची रोड़ कलेक्टर बंगले के बगल में जिलेभर की आशा उषा कार्यकर्ता एकत्रित होंगी।फिर रैली नारेबाजी के बीच पैदल मार्च करते हुए करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचेगी।जहां मुख्यमंत्री के नाम संबोधित 16 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन कलेक्टर अरविंद दुबे को ज्ञापन सौंपेंगे।
दूसरे जिलों में अधिक मानदेय मिल रहा…
कृष्ण ठाकुर ने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार अपनी और से 8 हजार रुपए मिलाकर आशा को कुल 10 हजार रुपए मानदेय देती है, जबकि तेलंगाना में राज्य सरकार साढ़े 7 हजार रुपए मिलाकर 9 हजार 500 रुपए मानदेय दे रही है। इसी तरह केरल, महाराष्ट्र, हरियाणा सहित अन्य सभी राज्य सरकारें आशा एवं पर्यवेक्षकों को अपनी ओर से अतिरिक्त मानदेय दे रही हैं। लेकिन मप्र सरकार अपनी पिछले 15 सालों से अपनी ओर से कुछ भी नहीं दे रही हैं।लेकिन प्रदेश की शिवराज सरकार मप्र की आशा उषा कार्यकर्ताओं के साथ वेतन भुगतान में सौतेला व्यवहार कर रही है।



