महाविद्यालय में बिरसा मुंडा जयंती मनाई गई
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय में जननायक बिरसा मुंडा जयंती दिवस पर उनके चित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण कर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य कल्पना जाम्भुलकर ने बिरसा मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सुगना मुंडा और करमी हातू के पुत्र बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड प्रदेश में राँची के उलीहातू गाँव में हुआ था। उनकी माता का नाम करमी हातू और पिता का नाम सुगना मुंडा था। उस समय भारत में अंग्रेजी शासन था। साल्गा गाँव में प्रारम्भिक पढाई के बाद वे चाईबासा इंग्लिश मिडिल स्कूल में पढने आए।इनका मन हमेशा अपने समाज की ब्रिटिश शासकों द्वारा की गयी बुरी दशा पर सोचता रहता था।उन्होंने मुंडा लोगों को अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिये अपना नेतृत्व प्रदान किया। 1894 में मानसून के छोटानागपुर में असफल होने के कारण भयंकर अकाल और महामारी फैली हुई थी। बिरसा ने पूरे मनोयोग से अपने लोगों की सेवा की।
बिरसा मुंडा को पूरी दुनिया एक ऐसे जननायक के तौर पर जानती है जिसने उलगुलान (क्रांति) की शुरुआत की थी। बिरसा को मुंडा समाज के लोग भगवान के रूप में पूजते हैं। सिर्फ 25 साल के जीवन में उन्होंने इतने मुकाम हासिल किये कि हमारा इतिहास सदैव उनका ऋणी रहेगा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की विद्यार्थियों के अलावा प्रताप सिंह कोली राजकुमार जैन समेत स्टाफ मौजूद था।



