पाटन के कॉलोनाईज़र्स पर, प्रशासन कब कसेगा शिकंजा, जवाबदार अधिकारी मौन
रिपोर्टर : राजेन्द्र सिंह
पाटन । जिले की पाटन तहसील के कॉलोनाईज़र्स नियम विरुद्ध ढंग से कॉलोनियाँ विकसित कर रहे है। आवासीय कालोनी में रोड़, नाली, बिजली, पोल, उद्यान ये सभी जरूरी सुविधाएं साईड से नदारद है। इसके बाद भी तहसील के कॉलोनाईज़र्स बेखोप अपने कार्य को अंजाम दे रहे है। ऐसा ही एक मामला मौजा पाटन प.ह.न. 24/56 खसरा न 270 रकवा 0.534 का था जिसमें आवासीय कालोनी स्वीकृति है। सुशील कुमार पाण्डेय (गोलू) ज्ञान विजय परिसर पाटन के नाम से कालोनी विकसित की जा रही है। आवासीय कालोनी में पहुंच मार्ग नहीं है। शर्तों में स्पष्ट निर्देश था रोड़ या आवासीय कालोनी की भूमि संबंधी विवाद होने पर अनुज्ञा स्वत:निरस्त मानी जाएगी लेकिन बिल्डर्स के द्वारा अपने निजी स्वार्थ के चलते ग्राहकों को गुमराह करके प्लाट बेचे जा रहे हैं। प्रशासन को जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करते हुए तत्काल रजिस्ट्री पर रोक लगाना चाहिए। जिससे किसी के साथ ठगी न हो सके।
जनपद पंचायत एवं आवासीय परिसर का रोड़ संबंधी विवाद: किस नियम के तहत जनपद पंचायत के पत्र क्र 1589, सुशील पाण्डे को रोड़ निर्माण की अनुमति दी, जपं पाटन के स्वामित की भूमि खसरा न 269/2 भूमि पर श्री शंकर जी महाराज ट्रस्ट के नाम पर दर्ज है। यह गोलमाल कैसे हुआ इस पर सभी जवाबदार अधिकारी मौन साधे है।
परिसर में प्लाट खरीदारों की पाटन एसडीएम से गुहार:परिसर में जिन लोगो ने प्लाट खरीदे है। रोड़ संबंधी विवाद के कारण उन सभी की नीद उड़ गई है। ठगी के शिकार व्यक्तियों ने अपनी जीवन भर की जमा पूजी से प्लाट खरीदे थे, जिला कलेक्टर को स्वत:संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय जांच कराकर इस प्रकरण के दोषियों पर सक्त कार्यवाही करनी चाहिए जिससे खुदका मकान बनाने का सपना सजोए व्यक्ति ठगी का शिकार न हो सके।
जब इस संबंध में कॉलोनाईज़र्स सुशील पाण्डेय से बात की गई तो उनका कहना था कि वह रोड़ की भूमि जनपद पंचायत पाटन के नाम पर थी, पता नहीं श्री शंकर जी महाराज ट्रस्ट के नाम पर कैसे आ गई। हम से बेहतर पाटन के अधिकारी आपको बता पाएंगे।



