ज्योतिष

आज का पंचांग बुधवार, 14 दिसम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
༺⚜❝ जय श्री हरि ❞⚜༻
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 14 दिसम्बर 2022

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – षष्ठी 19:53 PM बजे तक उपरान्त सप्तमी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी – षष्ठी (छठ) के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – मघा 26:14 PM तक उपरान्त पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र के देवता होते हैं पितर। पितर का अर्थ है जो लोग अब जीवित नहीं है लेकिन उनकी कीर्ति काया सदैव जीवित रहती है। पितर किसी भी परिवार के इमीडियेट बॉस हैं जो आत्मा स्वरूप होते हैं। इनको प्रसन्न रखना अतिआवश्यक होता है क्योंकि देवता भी पितरों के प्रसन्न होने पर ही प्रसन्न होते हैं।
🔔 योग – वैधृति 06:54 AM तक उपरान्त विष्कुंभ योग है।
प्रथम करण : गर – 10:33 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 11:42 पी एम तक विष्टि
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : बुधवार सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक गुलिक काल रहेगा।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:47:32
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:13:41
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:16 ए एम से 06:11 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:44 ए एम से 07:06 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 01:59 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:16 पी एम से 05:40 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:26 पी एम से 06:48 पी एम
💧 अमृत काल : 02:36 ए एम, दिसम्बर 15 से 04:23 ए एम, दिसम्बर 15
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:43 ए एम, दिसम्बर 15
❄️ रवि योग : 07:06 ए एम से 05:16 ए एम, दिसम्बर 15
☄️ मघा नक्षत्र – सुबह 5 बजकर 16 मिनट
🚕 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को हरा वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – पारसी अमर्दाद मासारंभ, संजय गांधी जन्मोत्सव, फ़्लाइंग ऑफ़िसर निर्मलजीत सिंह सेखों (परमवीर चक्र सम्मानित) शहिद दिवस, राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन स्मृति दिवस, राज कपूर, भारतीय अभिनेता, जन्म दिवस, हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह) राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस, अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसम्बर), शहीद बुद्धीजीवी दिवस – बांग्लादेश, राज्य दिवस – यूएसए-अलबामा, मूल समाप्त
✍🏽 विशेष –षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗺️ Vastu tips
रात में जूठे बर्तन छोड़कर सोने की आदत के नुकसान?
दरअसल, रात में जब आप जूठे बर्तनों को छोड़ देते हैं तो इससे आप-पास का वातावरण प्रभावित होता है। माना जाता है कि रात में नेगेटिव एनर्जी की जगह बनती है जो कि 12 बजे रात से 4 बजे तक रहती है। ऐसी स्थिति में आपके घर में अलक्ष्मी की वास होता है, जिसे दरिद्रता और कंगाली की देवी माना जाता है। ये लक्ष्मी की बहन हैं और उनसे पहले समुद्र मंथन से निकली थीं। जब आप रात भर जूठ बर्तन घरों में रखते हैं या कहें कि रात भर छोड़ देते हैं तो अलक्ष्मी का वास हो जाता है, जिससे घर में दरिद्रता आने लगती है।
जूठे बर्तनों से बढ़ता है केतु का प्रकोप
जब आप रात में जूठे बर्तन रख कर सोते हैं तो इससे घर में केतु का प्रकोप बढ़ता है। इससे आपके घर में कुछ बीमारियां बढ़ सकती हैं जैसे पथरी, गठिया, कान से जुड़ी समस्याएं और चर्म रोग की आशंका। साथ ही ऐसे लोगों बार-बार खांसी भी आती है।
यहां आपको यह समझने की जरूरत है कि आपको रात में जूठे बर्तन छोड़ कर नहीं सोना है। ऐसे में कई बार यह हमारे लिए मजबूरी हो जाती है। तो, ऐसे में आप ये कर सकते हैं कि जिन बर्तनों में खाना बना हो पर जूठा ना हो उसे छोड़ दें और जिन बर्तनों में आपने खाना खाया हो उन बर्तनों को धो लें। कुछ ना हो तो पानी से साफ कर के रख लें और सुबह अच्छे से धो लें। इस तरह आप तमाम वास्तु दोषों से बचे रह सकते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कलह, धन-हानि व रोग-बाधा से परेशान हों तो ….
घर में कलहपूर्ण वातावरण, धन-हानि एवं रोग-बाधा से परेशानी होती हो तो आप अपने घर में मोरपंख कि झाड़ू या मोरपंख पूजा-स्थल में रखें |
नित्य नियम के बाद मन-ही-मन भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए इस पंख या झाड़ू को प्रत्येक कमरे में एवं रोग-पीड़ित के चारों तरफ गोल-गोल घुमाये |
कुछ देर ‘ॐकार ‘ का कीर्तन करें-करायें | ऐसा करने से समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा ऊपरी एवं बुरी शक्तियों का प्रभाव भी दूर हो जाता है |
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
स्वास्थ्य व पुष्टि प्रदायक रागी
रागी ( मँडुआ , मराठी में नाचणी ) मधुर, कसैली, कडवी, शीतल व सुपाच्य होती है | इसमें गेहूँ के समान तथा चावल की अपेक्षा अधिक पौष्टिकता होती है | सुपाच्य होने से सभी ऋतुओ में इसका सेवन किया जाता है |
आधुनिक अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार रागी में सभी अनाजों से अधिक और दूध से 3 गुना कैल्शियम की मात्रा होती है | इसके अतिरिक्त इसमें एमिनो एसिड्स, विटामिन ए, बी तथा फॉस्फोरस, जो हमारे शरीर के संवर्धन के लिए आवश्यक हैं, संतुलित मात्रा में पाये जाते हैं |
🫀 रागी के विभिन्न लाभ
इसमें रेशे की मात्रा अधिक होने से यह पेट के रोगों, उच्च रक्तचाप तथा आँतों के कैंसर से रक्षा करती है |
खून की कमी, अजीर्ण, पुराना बुखार, हड्डियों की कमजोरी आदि समस्याओं में तथा कैल्शियम से भरपूर व सुपाच्य होने के कारण बढ़ते हुए बच्चों, गर्भवती महिलाओं व बुजुर्गो के लिए भी इसका सेवन विशेष लाभदायी है |
इसमें प्रोटीन की प्रचुरता होने से कुपोषण से लड़ने के लिए यह शरीर को सक्षम बनाती है | शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने की क्षमता के कारण रागी मधुमेह में उपयोगी है |
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम की यह नीतियां न केवल इनका मार्गदर्शन कर रही हैं, बल्कि जीवन में कई प्रकार की अड़चनों से रक्षा कर रही हैं। आचार्य श्री गोपी राम ने कई पशु-पक्षियों का उदाहरण देते हुए यह समझाया है कि एक व्यक्ति किस तरह इनके गुणों को अपनाकर सफल बन सकता है और जीवन में उन्नति प्राप्त कर सकता है। इस भाग में आइए जानते हैं कि कैसे एक गधा विद्वान बनने की शिक्षा देता है।
🤷🏻‍♀️ जानिए कि कैसे एक गधा देता है सफल बनने का ज्ञान
सुश्रान्तोऽपि वहेद् भारं शीतोष्णं न पश्यति ।
सन्तुष्टश्चरतो नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात् ।।
👉🏼 अर्थात- जब एक गधा बहुत थक जाता है तब भी वह बोझ उठाता है और वह कभी भी सर्दी या गर्मी नहीं देखता है। साथ ही वह प्रतिदिन संतुष्ट होकर घूमता रहता है। यह तीन गुण व्यक्ति को गधे से सीखनी चाहिए।
इस श्लोक के माध्यम से आचार्य श्री गोपी राम बता रहे हैं कि एक व्यक्ति को विद्वान और सफल होने के लिए गधे से तीन गुण सीखने चाहिए। पहला गुण यह है कि जिस तरह गधा पूरा दिन काम करने के बावजूद भी बोझ उठाता है। ठीक उसी तरह व्यक्ति को भी किसी कार्य में आलस्य न करते हुए अपने कार्य को लक्ष्य तक पहुंचाना चाहिए। साथ ही उसे हर समय कुछ नया करने का प्रयत्न करते रहना चाहिए। दूसरा गुण बताया है कि जिस तरह एक गधा सर्दी या गर्मी को न देखे अपना कार्य एक एक समान उर्जा से करता है। ठीक उसी प्रकार एक व्यक्ति को सभी परिस्थितयों में एक समान और सकारात्मक रहना चाहिए। ऐसे ही व्यक्ति को श्रेष्ठ और विद्वान कहा जाता है। इसके साथ तीसरा गुण यह है कि जिस तरह गधा हर समय संतुष्ट रहता है, ठीक उसी तरह व्यक्ति को जितना उसके पास साधन है उतने में ही संतुष्ट रहना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिक की लालसा में व्यक्ति गलत मार्ग भी अपना सकता है।
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो भगवान कार्तिकेय का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि के सायंकाल में शिवमन्दिर में छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं एवं सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है और छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।

Related Articles

Back to top button