मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के समन्वयक तेलंगाना में दमोह जिले 68 समन्वयक हिस्सा लिया

रिपोर्टर : भगवत सिंह लोधी
दमोह । दमोह जिले समन्वयक तेलंगाना हिस्सा लिया मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के महानिदेशक बीआर नायडू के मार्गदर्शन में तेलंगाना राज्य के हैदराबाद से 50 किमी दूरी पर स्थित विश्व के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर जिसे एक बंजर 1400 एकड़ भूमि से हरा-भरा बनाकर आध्यात्मिक केंद्र कान्हा शांति वनम के रूप में विकसित किया गया है। इस परिसर में पांच दिसवीय हार्टफुलनेस रूपी पध्दति के अभ्यास एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 दिसम्बर से 23 दिसम्बर तक सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर ग्वालियर और सागर सम्भाग के जिलों के प्रतिभागियों की सहभागिता रही। जिसमे दमोह जिले से 68 प्रतिभागियो द्वारा सक्रिय सहभागिता की गई, प्रशिक्षण में नवाकुंर संस्थाओ के प्रतिनिधि एवं परामर्शदाताओं की मुख्य रूप से सहभागिता रही।
इस प्रशिक्षण में समाज के बीच रहकर कार्य कर रही, स्वयंसेवी संस्थाओं में एक अच्छे नेतृत्व को विकसित करना और उनके द्वारा प्रभावी रूप से पर्यावरण के प्रति अपने उत्तरदायित्व का एहसास कराना रहा, साथ ही इस दौड़भाग वाले वातावरण में तनाव रहित एवं दिल से जुड़कर अपने अंदर एक असीम शांति से जुड़ाव को अनुभव करना है, जिसके द्वारा हम समाज के प्रति अपने कर्तव्य को समझते हुये लोगो को भी ग्रामीण क्षेत्रो में एक अच्छा वातावरण दे सके, इस हेतु हार्टफुलनेस के विभिन्न सत्रो में अभ्यास कराया गया।
इस दौरान हार्टफुलनेस संस्थान के मार्गदर्शक कमलेश पटेल (दाजी) ने भी दो दिन सभी प्रतिभागियों को मेडिटेशन सीसी हुये कहा कि-स्वयं को स्थिर रखने के लिये दिल से जुड़ना और अपने स्वभाव में हार्टफुलनेस को अपनाना जरूरी है।
हार्टफुलनेस आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने का सहज मार्ग है, जहां हम स्वयं के अंदर ईश्वरीय दिव्यता रूपी चेतना का अनुभव करते है।
इस सेमिनार के दौरान जहाँ विभिन्न सत्रो में हार्टफुलनेस की विभिन्न थेरेपी के बारे में अभ्यास कराते हुये, सुबह योग एवं सुबह 10 बजे से 6 बजे तक सत्रो की शुरुवात एवं सत्र के समापन के दौरान प्रतिदिन मेडिटेशन कराया गया, साथ ही 6 वर्ष पूर्व कैसे इस बंजर भूमि को कान्हा शांति वनम के रुप में आधार दिया गया, इसके बारे में भी जानने का अवसर मिला।
इस दौरान परिसर में वाटर रिचार्ज सिस्टम, नर्सरी में पौधो की विभिन्न किस्मो और यहां स्थित छोटे-छोटे वन रूपी क्षेत्रो में सभी प्रकार के पौधों को यहां कैसे संरक्षित कर आज वन के रूप में तैयार किया गया है, कोयले के उपयोग पौधों में खाद के रूप में करना इन सभी विषयों के बारे में जानने औऱ सीखने का अवसर मिला।
इस अवसर पर दमोह जिले से जिला समन्वयक सुशील नामदेव, विकास खण्ड समन्वयक राजेश बाबू अर्गल, वंदना जैन, हरीश पांडे, उमाशंकर उपाध्याय, पुष्पा सिंह, तेंदूखेड़ा से नवाकुंर संस्थाओ के प्रतिनिधि दिनेश साहू, शुभम जैन, दुर्जन सिंह, प्रीतम केवट, धर्मेन्द्र पाल एवं तेंदूखेड़ा विकासखण्ड के परामर्शदाता श्वेता खरे, राम राय, संजय खरे, आशीष रैकवार सहित जिले की सभी चयनित नवाकुंर संस्थाओ के प्रतिनिधि एवं परामर्शदाताओ की उपस्थिति रही।

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