ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 15 जनवरी 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 15 जनवरी 2023

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌞 15 जनवरी 2023 दिन रविवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। भगवान सूर्य मकर राशी में प्रवेश आज तारीख 14 जनवरी की रात्रि 12 बजे के उपरान्त अर्थात 15 जनवरी की रात्रि – 03:02 AM मिनट पर धनु राशी से मकर राशी में प्रवेश कर जायेंगे। इसलिए इस संक्रान्ति का पुण्यकाल तारीख 15 जनवरी 2023 को प्रातः सूर्योदय के उपरान्त ही होगा। इसलिए मकर संक्रान्ति का पर्व 15 जनवरी को तीर्थ स्नान एवं दानादि के साथ मनाया जायेगा। आज से देवों का दिन एवं असुरों की रात्रि का आरम्भ होता है। आज से अगले तीन दिनों के उपरान्त ही किसी भी प्रकार का कोई भी शुभ कार्य होना आरम्भ होगा। आज से खरमास समाप्ति हो जाता है फिर भी तीन दिनों तक कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। आज से शिशिर ऋतू का आरम्भ हो जाता है। दक्षिण भारत में अलग-अलग नामों से पोंगल का पर्व आज ही मनाया जायेगा। आज इसी पर्व को बंगाल में मकरादि एवं असम में मघाबिहू के नाम से मनाया जाता है। आप सभी सनातनियों को मकर संक्रान्ति, पोंगल एवं उत्तरायण के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन उत्तरायन
🌦️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
🌤️ मास – माघ माह
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – अष्टमी 14:11 PM बजे तक उपरान्त नवमी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी : अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – चित्रा 14:26 PM तक उपरान्त स्वाति नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह और अधिष्ठाता देव विश्वकर्मा हैं।
📢 योग – सुकर्मा 07:55 AM तक उपरान्त धृति योग है।
प्रथम करण : बालव – 07:39 ए एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 07:45 पी एम तक
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : रविवार का (अशुभ) काल 03:08 पी एम से 04:27 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:43:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:17:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:09 पी एम से 12:52 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:16 पी एम से 02:58 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:43 पी एम से 06:10 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:46 पी एम से 07:07 पी एम
💧 अमृत काल : 12:32 पी एम से 02:12 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, जनवरी 16 से 12:57 ए एम, जनवरी 16
💥 सुकर्म योग – आज दोपहर पहले 11 बजकर 50 मिनट तक
☄️ चित्रा नक्षत्र – आज शाम 7 बजकर 12 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को गुड़ की मिठाई भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सौर माघ मास प्रारंभ, मकर संक्रांति, उत्तरायण – (सौर कैलेण्डर पर आधारित), मकरविलक्कु – (सौर कैलेण्डर पर आधारित), माघ बिहु – (सौर कैलेण्डर पर आधारित), कालाष्टमी, मकर स्नान, तै पोंगल (केरल), संक्रमण पुष्पकाल सुबह 07.17 से 06.20 तक, राजनीतिज्ञ ज्ञानी गुरमुख सिंह मुसाफिर जन्म दिवस, बाबासाहब भोसले जन्मोत्सव, राजनीतिज्ञ मायावती जन्म दिवस, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता व प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता तपन सिन्हा पुण्य तिथि, उत्तर कोरिया – कोरियाई लिपि दिवस, भारतीय खाद्य निगम की स्थापना दिवस, थल सेना दिवस, अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय), राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 11 जनवरी- 17 जनवरी तक।
✍🏼 विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल अर्थात कोहड़ा एवं कद्दू दोनों ही त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🌲 Vastu tips ☘️
कई लोगों के घर के सामने लंबे लंबे अशोक के पेड़ लगे होते हैं जो घर की शोभा बढ़ाते हैं। अशोक का वृक्ष दो प्रकार के होते हैं एक जो पीपल के वृक्ष की तरह फैलता है और दूसरा जो ताड़ या देवदार के वृक्ष की तरह ऊंचा जाता है, और उसके पत्ते नीचे लटके हुए होते हैं। लंबा वृक्ष देवदार की जाति का है और इसके पत्ते आम के पत्तों जैसे होते हैं। इसके फूल सफेद, पीले रंग के और फल लाल रंग के होते हैं। जानें इसी वक्ष के बारे में।
अशोक का शब्दिक अर्थ होता है- किसी भी प्रकार का शोक न होना। यह जहां पर उचित दिशा में लगा होता है वहां किसी भी प्रकार का शोक नहीं होता है।
मांगलिक एवं धार्मिक कार्यों में आम के पत्तों की तरह ही अशोक के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। अशोक वृक्ष को हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र और लाभकारी माना गया है।
माना जाता है कि अशोक वृक्ष घर में लगाने से या इसकी जड़ को शुभ मुहूर्त में धारण करने से मनुष्य को सभी शोकों से मुक्ति मिल जाती है।
अशोक का वृक्ष वात-पित्त आदि दोष, अपच, तृषा, दाह, कृमि, शोथ, विष तथा रक्त विकार नष्ट करने वाला है। यह रसायन और उत्तेजक है। इसके उपयोग से चर्म रोग भी दूर होता है। महिलाओं के लिए इसके रस से दवाई भी बनती है।
अशोक का वृक्ष घर में उत्तर दिशा में लगाना चाहिए जिससे गृह में सकारात्मक ऊर्जा का संचारण बना रहता है।
घर में अशोक के वृक्ष होने से सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है एवं अकाल मृत्यु नहीं होती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पेशाब करने के बाद पानी पीना चाहिए या नहीं-पेशाब करने के बाद पानी पीना आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों के हिसाब सही नहीं है। दरअसल, ऐसा इसलिए कि पेशाब करने का प्रोसेस सबसे पहले आपके किडनी और ब्लैडर से जुड़ा होता है। एक तरह से समझें कि शरीर खुद को डिटॉक्स कर रहा है या फिल्टर कर रहा है। ऐसे में जैसे ही ये काम खत्म हुआ और आपने पानी पी लिया तो ये किडनी के नॉर्मल प्रोसेस को प्रभावित करता है और इससे किडनी स्टोन और यूरिन इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
पेशाब करने के तुरंत पहले पानी पिएं या नहीं-पेशाब करने के तुरंत पहले भी आपको पानी नहीं पीना चाहिए। ऐसा इसलिए कि ये ब्लैडर पर एक्स्ट्रा प्रेशर डालता है। साथ ही इससे डाइजेस्टिव पीएच भी बिगड़ सकता है। इसलिए तुरंत पहले भी इस काम को करने से बचें।
पेशाब करने के कितनी देर बाद पानी पीना चाहिए? ऐसे में पहले तो आपको अपनी इस आदत में सुधार करना चाहिए और पेशाब करने के आधा घंटा पहले पानी पिएं या फिर पेशाब करने के 20 मिनट बाद पानी पिएं। इसे ऐसे समझें कि किडनी और ब्लैडर फ्लश करे, फिर आराम करके और इस प्रोसेस को दोबारा शुरू करे। इससे शरीर को आराम मिलता है।
🍶 आरोग्य संजीवनी🍯
अदरक और शहद चाटने से क्या होता है
ब्रोंकाइटिस और निमोनिया से होगा बचाव ब्रोंकाइटिस और निमोनिया, दोनों फेफड़ों से जुड़ी ऐसी बीमारी है जो कि रह-रह कर वापिस आ सकती है। ऐसे में अदरक और शहद चाटने से शरीर में गर्मी बनी रहती है और इंफेक्शन से बचाव होता है। साथ ही ये एंटीइंफ्लेमेटरी है जो कि फेफड़ों की सूजन को रोकता है।
अस्थमा में फायदेमंद अस्थमा में अदरक और शहद का सेवन काफी फायदेमंद है। ये पहले तो अस्थमा को ट्रिगर करने से रोकता है और दूसरा अस्थमा में फेफड़ों के इंफेक्शन को कम करने में मदद करता है। इससे आप कुछ ही देर में राहत महसूस कर सकते हैं।
गीली और सूखी दोनों खांसी में फायदेमंद गीली और सूखी दोनों खांसी में अदरक और शहद का सेवन फायदेमंद है। पहले तो, ये गले को आराम देते हुए एक प्रकार की गर्मी पैदा करता है जिससे फेफड़ों में जमा कफ पिघलने लगता है। दूसरा शहद फेफड़ों को शांत करता है और सूखी खांसी को होने से रोकता है। इस तरह इन दोनों का एंटीबैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण इन तमाम बीमारियों में काम आ जाता है।
🌹 गुरु भक्ति योग 🌸
आचार्य श्री गोपी राम ने अपने शास्त्र में बच्चों के पालन-पोषण को लेकर बार-बार इस बात पर बेहद अधिक बल दिया है कि माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी संतान को गुणवान और चरित्रवान बनाएं, उनका ख़याल रखें और उन्हें बिगड़ने न दें। उन्हें गलत संगति से बचाकर रखें। हम कहते हैं कि व्यक्ति को चाहिए कि वह अपना समय सार्थक बनाए, अच्छा कार्य करे। इसके साथ ही उनका कहना है कि सब लोगों को अपना कार्य अर्थात कर्तव्य पूरा करना चाहिए।और अपने कर्तव्य के प्रति पूरी निष्ठा से कर्म करता रहें।
पुत्राश्च विविधैः शीलैर्नियोज्याः सततं बुधैः।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः।।
बुद्धिमान लोगों को चाहिए कि वह अपने पुत्र और पुत्रियों को अनेक प्रकार के अच्छे गुणों से लाना पालन करें। उन्हें अच्छे कार्यों में लगाएं, क्योंकि नीति जानने वाले और अच्छे गुणों से युक्त सज्जन व्यवहार वाले व्यक्ति ही कुल में पूजनीय और सम्मान के पात्र होते हैं।
आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि बचपन में बच्चों को जैसी शिक्षा जैसी परवरिश दी जाएगी, उनके जीवन का विकास और उन्नति उसी प्रकार से होंगे, इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उन्हें ऐसे मार्ग पर लेकर जाएं, जिससे उनमें चातुर्य के साथ-साथ शील व्यवहार का भी विकास हो। गुणी व्यक्तियों से ही कुल की शोभा होती है।
माता शत्रु पिता वैरी येन बालो न पाठितः।
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा।
वहीं ग्यारहवें श्लोक में लिखा है कि वे माता-पिता अपने बच्चों के शत्रु हैं, जिन्होंने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया नहीं, क्योंकि अनपढ़ बालक विद्वानों के समूह में शोभा नहीं पाता, उसका सदैव अपमान होता है। विद्वानों के इस झुण्ड में उसका तिरस्कार उसी प्रकार होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है।
मात्र मनुष्य जन्म लेने से ही कोई चतुर नहीं हो जाता। उसके लिए अध्ययनशील होना अत्यन्त आवश्यक है। शक्ल-सूरत, आकार-प्रकार तो समस्त व्यक्ति का एक जैसा होता है, भिन्नता सिर्फ उनकी विद्या से ही प्रकट होती है। जिस प्रकार सफेद बगुला सफेद हंसों में बैठकर हंस नहीं बन सकता, उसी प्रकार विद्याहीन और अशिक्षित व्यक्ति साक्षर और शिक्षित व्यक्तियों के बीच में बैठकर शोभा नहीं पा सकता। इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा दें, जिससे वे समाज की शोभा बन सकें।
लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः।
तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत्।।
बारहवें श्लोक में लिखा है कि लाड़-दुलार से पुत्रों में बहुत से दोष उत्पन्न हो जाते हैं। उनकी ताड़ना करने से अर्थात दंड देने से उनमें गुणों का विकास होता है, इसलिए पुत्रों और शिष्यों को अधिक लाड़-दुलार नहीं करना चाहिए, उन्हें समय समय पर फटकार लगाने से भी नहीं चूकना चाहिए।
एकेनापि सुवृक्षेण पुष्पितेन सुगन्धिना।
वासितं तद्वनं सर्वं सुपुत्रेण कुलं यथा।।
बहुत से लोगों के कई संतानें होती हैं, लेकिन उनकी बहुसंख्या के कारण कूल का सम्मान नहीं बढ़ता. कुल का सम्मान बढ़ाने से लिए एक सद्गुणी पुत्र ही पर्याप्त होता है. धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों में से एक भी ऐसा नहीं निकला जिसे सम्मान से याद किया जाता हो. ऐसे सौ पुत्रों से क्या लाभ. आचार्य श्री गोपी राम आगे कहते हैं कि जिस प्रकार एक सुखे पेड़ में आग लगने से सारा जंगल भस्म हो जाता है, उसी तरह एक मुर्ख और कुपुत्र सारे कुल को समाप्त कर देता है. कुल की प्रतिष्ठा, आदर-सम्मान आदि सब धूल में मिल जाते हैं. जैसे दुर्योधन के कारण से कौरवों का नाश हुआ।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।
अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।

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