ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 08 फरवरी 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 08 फरवरी 2023

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- उत्तरायण
🌦️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – तृतीया 28:11 PM बजे तक उपरान्त चतुर्थी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि में धन के स्वामी कुबेर जी है।तृतीया (तीज) के देवता हैं यक्षराज कुबेर।
💫 नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी 18:41 PM तक उपरान्त उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी शुक्र है।पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के देवता भग (विभागतार) हैं, जिन्हें विभाजन भी कहा जाता है ।
🔔 योग – अतिगण्ड 15:26 PM तक उपरान्त सुकर्मा योग है।
⚡ प्रथम करण : वणिज – 05:27 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 06:23 ए एम, फरवरी 09 तक
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : बुधवार का (अशुभ) काल 11:13 ए एम से 12:35 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:30:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:30:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:21 ए एम से 06:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:47 ए एम से 07:05 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:26 पी एम से 03:10 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:03 पी एम से 06:29 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:06 पी एम से 07:24 पी एम
💧 अमृत काल : 01:11 पी एम से 02:57 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 09 से 01:01 ए एम, फरवरी 09
☄️ सुकर्मा योग- आज शाम 4 बजकर 31 मिनट से
🌍 पृथ्वी लोक की भद्रा- आज शाम 5 बजकर 26 मिनट से अगली सुबह 6 बजकर 23 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♂️ आज का उपाय-विप्र को धर्मशास्त्र भेंट करें।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – डॉ. ज़ाकिर हुसैन जन्म दिवस, टीका राम पालीवाल (मुख्यमंत्री राज.) पुण्य तिथि, जगजीत सिंह स्वतंत्रता सेनानी जन्म दिवस, सईद जाफ़री ओबीई ब्रिटिश-भारतीय अभिनेता जन्म दिवस, जेम्स माइकल लिंगदोह ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ जन्म दिवस, महान् लेखक कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी स्मृति दिवस, महिला क्रांतिकारी कल्पना दत्त शहिद दिवस, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह), सुरक्षित इंटरनेट दिवस, प्रपोज डे (वैलेंटाइन वीक)
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
*_दिशा के अनुसार हो नेमप्लेट का रंग नेमप्लेट का रंग कैसा है ये बात बहुत महत्वपूर्ण होती है। नेमप्लेट का कलर घर की दिशा के अनुसार चुनना चाहिए। यदि आपका घर पूर्वमुखी है तो घर में सौहार्दपूर्ण वातावरण के विकास एवं मान-सम्मान में वृद्धि के लिए केसरिया, पीला, हरा, गुलाबी, हल्का नारंगी रंग की नेमप्लेट का इस्तेमाल समृद्धि को बढ़ाता है।जल की दिशा उत्तर में हल्के पीले, हरे, आसमानी, सीग्रीन और हल्के नीले रंग की नेमप्लेट लगाना अति शुभ माना गया है।इस दिशा में इन रंगों का प्रयोग करने से आपको धन आगमन के नए-नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं,परिवार के सदस्यों को करियर में सफलता मिलेगी। इसी प्रकार दक्षिण दिशा में लाल, नारंगी, गुलाबी एवं बैंगनी रंगों का इस्तेमाल कर सकते हैं।इस दिशा में ऐसे रंगों का इस्तेमाल आपके जीवन में प्यार, सुरक्षा, यश एवं आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित होंगे। पश्चिम दिशा में नेमप्लेट लगाने के लिए सफ़ेद और सुनहरे रंगों के साथ सलेटी, पीला, भूरा, हल्का हरा जैसे रंगों का प्रयोग भी कर सकते हैं।इस दिशा में आप इन रंगों का प्रयोग कर जीवन में लाभ एवं प्राप्तियों को आमंत्रित कर सकते हैं।
❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
खजूर से मिलेगी राहत खर्राटों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो रात में सोते वक्त खजूर खाना बहुत फायदेमंद हो सकता है। खजूर की तासीर गर्म होती है। ये खर्राटे की परेशानी को दूर कर देता है।
अदरक का करें इस्तेमाल अदरक मैग्नीशियम, पोटैशियम और जिंक जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ये ब्लड सर्कुलेश को बेहतर बनाने का काम करता है। अदरक के सेवन से मसल्स रिलैक्स हो जाती हैं, थकान दूर हो जाती है। खर्राटे को दूर करने के लिए अदरक का सेवन करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन डिज़ीज फिज़िकल रिलेशन बनाने की वजह से पुरुष और महिलाओं दोनों में होती है। अगर पेशाब करते समय आपको जलन होती है तो आपको यूटीआई की जगह एसटीआई हो सकता है। इस संक्रमण में एचआईवी यानी की ऐड्स, ह्यूमन पेपिलोमा वायरस संक्रमण, हर्पीज, हेपेटाइटिस, शैंकक्रॉइड, प्यूबिक लाइस, एचपीवी जैसी बीमारियां शामिल हैं।
सिस्टायटिस यूरिनरी ब्लैडर में जब सूजन आ जाता है तब उस संक्रमण को सिस्टिटिस कहते हैं। सिस्टिटिस का सबसे आम कारण यूरिनरी ट्रैक्ट का संक्रमण है। दरअसल जब बैक्टीरिया यूरिनरी ब्लैडर पर हमला करते हैं तब सिस्टिटिस की समस्या पैदा हो जाती है। लेकिन सही समय पर डॉकटर से दवा लेकर आप इस बीमारी को ठीक कर सकते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
महाभारत के युद्ध की समाप्ति के बाद सभी पांडव सशरीर स्वर्ग गए थे। स्वर्ग अर्थात हिमालय के किसी क्षेत्र में जहां इंद्रादि का राज्य था। पांचों पांडव अपना राजपाट परीक्षित को सौंपकर जब स्वर्ग की कठिन यात्रा कर रहे थे तब इस यात्रा में द्रौपदी भी उनके साथ गई थी। सभी चाहते थे कि हम सशरीर स्वर्ग पहुंचें। परंतु रास्ते में कुछ ऐसा घटा कि एक एक करके पांडव नीचे गिरकर मृत्यु को प्राप्त हो गए।
यात्रा के दौरान जब पांडव ब्रदीनाथ पहुंचें और वहां से आगे बढ़े तो सरस्वती नदी के उद्गम स्थल पर नदी को पार करना द्रौपदी के लिए कष्टकर हो गया था। ऐसे समय में भीम ने एक बड़ा सा चट्टान उठाकर नदी के बीच में डाल दिया। द्रौपदी ने इस चट्टान पर चलकर सरस्वती नदी को पार किया था। कहते हैं कि माणा गांव में सरस्वती के उद्गम पर आज भी इस चट्टान को देखा जा सकता है। इसे वर्तमान में भीम पुल कहा जाता है।
हालांकि महाभारत की कथा अनुसार पांचों पांडव, द्रौपदी तथा एक कुत्ता आगे चलने लगे। एक जगह द्रौपदी लड़खड़ाकर गिर पड़ी। द्रौपदी को गिरा देख भीम ने युधिष्ठिर से पूछा कि द्रौपदी ने कभी कोई पाप नहीं किया, तो फिर क्या कारण है कि वह नीचे गिर पड़ी? युधिष्ठिर ने कहा- द्रौपदी हम सभी में अर्जुन को अधिक प्रेम करती थीं। इसलिए उसके साथ ऐसा हुआ। ऐसा कहकर युधिष्ठिर द्रौपदी को देखे बिना ही आगे बढ़ गए।
जनश्रुति के अनुसार स्वर्ग यात्रा के दौरान द्रौपदी भीम का सहारा लेकर चलने लगी लेकिन द्रौपदी भी ज्यादा दूर नहीं चल पाई और वह भी गिरने लगी। ऐसे समय भीम ने द्रौपदी को संभाला। उस समय द्रौपदी ने कहा- सभी भाइयो में भीम ने ही मुझे सबसे ज्यादा प्यार किया है और मैं अगले जन्म में फिर से भीम की पत्नी बनना चाहूंगी।
थोड़ी देर बाद सहदेव भी गिर पड़े। तब भीम ने पूछा सहदेव क्यों गिरा? युधिष्ठिर ने कहा- सहदेव किसी को अपने जैसा विद्वान नहीं समझता था, इसी दोष के कारण गिरना पड़ा। कुछ देर बाद नकुल भी गिर पड़े। भीम के पूछने पर युधिष्ठिर ने बताया कि नकुल को अपने रूप पर बहुत अभिमान था। इसलिए आज इसकी यह गति हुई है।
थोड़ी देर बाद अर्जुन भी गिर पड़े। युधिष्ठिर ने भीम से कहा- अर्जुन को अपने पराक्रम पर अभिमान था। अर्जुन ने कहा था कि मैं एक ही दिन में शत्रुओं का नाश कर दूंगा, लेकिन ऐसा कर नहीं पाए। अपने अभिमान के कारण ही अर्जुन की आज यह हालत हुई है। ऐसा कहकर युधिष्ठिर आगे बढ़ गए।
थोड़ी आगे चलने पर भीम भी गिर गए। तब भीम ने गिरते वक्त युधिष्ठिर से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि तुम खाते बहुत थे और अपने बल का झूठा प्रदर्शन करते थे। इसलिए तुम्हें आज भूमि पर गिरना पड़ा। यह कहकर युधिष्ठिर आगे चल दिए। केवल वह कुत्ता ही उनके साथ चलता रहा।
युधिष्ठिर कुछ ही दूर चले थे कि उन्हें स्वर्ग ले जाने के लिए स्वयं देवराज इंद्र अपना रथ लेकर आ गए। तब युधिष्ठिर ने इंद्र से कहा- मेरे भाई और द्रौपदी मार्ग में ही गिर पड़े हैं। वे भी हमारे हमारे साथ चलें, ऐसी व्यवस्था कीजिए। तब इंद्र ने कहा कि वे सभी शरीर त्याग कर पहले ही स्वर्ग पहुंच चुके हैं लेकिन आप सशरीर स्वर्ग में जाएंगे।
इंद्र की बात सुनकर युधिष्ठिर ने कहा कि यह कुत्ता भी मेरे साथ जाएगा लेकिन इंद्र ने ऐसा करने से मना कर दिया। काफी देर समझाने पर भी जब युधिष्ठिर बिना कुत्ते के स्वर्ग जाने के लिए नहीं माने तो कुत्ते के रूप में यमराज अपने वास्तविक रूप में प्रकट हो गए। युधिष्ठिर को अपने धर्म में स्थित देखकर यमराज खुश हुए। इसके बाद इंद्र और युधिष्ठिर रथ में बैठाकर स्वर्ग की ओर निकल पड़े।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

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