ड्रिप मल्चिंग पद्धति से किसान डबल फसल उगा रहा ऊपर टमाटर नीचे तरबूज
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । अब शिक्षित किसान पारम्परिक किसानी छोड़कर उन्नत एवं नई तकनीकि से खेती कर बड़ा मुनाफ कमा रहे हैं। ग्राम माला का किसान रमेश पटेल पारंपरिक तकनीक को छोड़ ड्रिप मल्चिंग तकनीकि से टमाटर की खेती कर रहा है। टमाटर की खेती से वह हर साल 2 से 3 लाख रुपए कमा रहा है। इससे पहले बैगन की फसल लेकर लाभ कमा चुके हैं और अब उन्होंने नया प्रयोग करते हुए एक साथ डबल फसल टमाटर और तरबूज की लगाई है जिसमें टमाटर ऊपर झाड़ में लग रहे है और नीचे तरबूज की बेले फैल गई जिसमें तरबूज लगने लगे है इससे तरबूज पैदा होंगे एक फसल के साथ दो फसलों का लाभ किसान द्वारा उठाया जा रहा है इस तरह की खेती किसानों के लिए रोल मॉडल बन गई है। दूरदराज के किसान आकर इस पद्धति को देख रहे हैं कैसे एक साथ एक ही खेत में दो फसलें ली जा रही हैं।
युवा किसान रमेश पटेल उन्नत तकनीक का उपयोग कर अन्य किसानों के लिए राेल मॉडल बन गए हैं। किसान रमेश पटेल ने बताया कि भुरेरू के उन्नत किसान सुरेंद्र कुशवाहा से प्रेरणा लेकर वे 2022 से इस पद्धति से सब्जी की खेती कर रहे हैं।
जिसमें सबसे ज्यादा फायदा टमाटर से हो रहा है। उन्होंने बताया कि एक साल में दो बार पौधे रोपते हैं। टमाटर की पौध की नर्सरी 25 दिन में तैयार होती है और नर्सरी से खेत में ट्रांसप्लांट प्रक्रिया के करीब 80 दिन बाद टमाटर की फसल मिलने लगती है। जो दो से तीन महीने तक मिलते हैं। इसके बाद इसी पौधे में एक बार और फलाव आता है। जिसे दोबारा फसल मिलती है। उन्होंने बताया कि एक बार टमाटर की पौध लगाने के बाद 8 से 9 महीने तक यह पौध चलती है, जिससे टमाटर मिलते रहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत उन्हें ड्रिप मल्चिंग के लिए अनुदान प्राप्त हुआ। उद्यानिकी विभाग द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन मिला। किसान रमेश ने बताया कि पहले वह पारंपरिक तरीके से खेती करते थे लेकिन अब ड्रिप मल्चिंग पद्धति से लाभ हुआ है। शासन की मदद से ड्रिप का सेटअप मिला है।
ड्रिप मल्चिंग में कम पानी लगता है, खरपतवार भी नहीं लगते। उन्होंने किसानों को ड्रिप मल्चिंग से खेती करने की सलाह दी है। इस पद्धति में पानी की बचत होती है। ड्रिप सिस्टम से पानी सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचता है और खरपतवार भी नहीं होते हैं। युवा किसान ने कहा कि पहले इस तरह से खेती करने पर उद्यानिकी फसल लेने वाले कृषकों में एक संशय बना रहा। परंतु जब मेरे खेत में उत्पादित टमाटर, बैगन की फसल को उन्होंने स्वयं देखा तो स्वेच्छा से इस पद्धति को अपनाया। अब किसान इस पद्धति को अपनाकर अच्छा लाभ ले रहे हैं। मैंने इस वर्ष डबल फसल लेने का निर्णय लिया और टमाटर के साथ तरबूज की खेती की जिससे तरबूज की बेंले नीचे की तरफ बढ़ रही हैं और पौधे बड़े होने पर उसमें टमाटर लगने लगे हैं एक साथ दो फसल लेने का यह अनुभव कितना सफल होगा आने वाले समय में इसका लाभ सामने आएगा क्योंकि टमाटर तो अच्छी तरह लग रहे हैं और तरबूज के फल भी आने लगे हैं।




