Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 15 अगस्त 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🇮🇳 आज का पंचाग 🇮🇳
मंगलवार 15 अगस्त 2023
15 अगस्त 2023 दिन मंगलवार को ही अधिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज अंग्रेजों से भारतवर्ष की स्वतन्त्रता का दिन है। सच्चा भारतवासी आज के दिन को एक उत्सव की तरह मनाता है। आज राजधानी दिल्ली में भारत के सम्माननीय प्रधानमंत्री जी भारत की पहचान तिरंगा ध्वज फहराएंगे। साथ ही प्रधानमंत्री जी आज के दिन भारतवासियों को संबोधित भी करेंगे। इतना ही नहीं सम्पूर्ण भारतवर्ष के कोने-कोने में ध्वजोत्तोलन किया जाता है। पुरुषोत्तम मास (मलमास) का भौमव्रत है। आज दुर्गायात्रा एवं हनुमान जी के दर्शन का बड़ा ही महत्व होता है। आज सर्वार्थसिद्धियोग एवं यायी (मुद्दई) जयद् योग भी है। आप सभी सनातनी बंधुओं को भौमाष्टमी, भौमव्रत एवं भारतीय स्वतन्त्रता दिवस की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – श्रावण माह कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 12:43 PM तक उपरांत अमावस्या
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर।चतुर्दशी तिथि में भगवान देवदेवेश्वर सदाशिव की पूजा करके मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों से समन्वित हो जाता है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 01:58 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि व अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं।
📣 योग – व्यातीपात योग 05:32 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
⚡ प्रथम करण : शकुनि – 12:42 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : चतुष्पाद – 01:54 ए एम, अगस्त 16 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:36:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:32:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:24 ए एम से 05:07 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:45 ए एम से 05:50 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:37 पी एम से 03:30 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:01 पी एम से 07:23 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 07:01 पी एम से 08:06 पी एम
💧 अमृत काल : 06:49 ए एम से 08:36 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, अगस्त 16 से 12:47 ए एम, अगस्त 16
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 01:59 पी एम से 05:51 ए एम, अगस्त 16
👩🏻🎓 स्थायीजायद योग – 15 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 43 मिनट तक
🛫 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♂️ आज का उपाय-शिव मंदिर में मसूर की दाल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
🇮🇳 पर्व एवं त्यौहार – पितृकार्ये अमावस्या/मूल प्रारंभ/अमावस्या प्रारंभ दोपहर 12.42/पतती/ दर्श अमावस्या/ स्वतंत्रता दिवस/ मंगला गौरी व्रत/ अरविंद घोष जयन्ती, ऐतिहासिक स्मारक लाल किले पर ध्वजारोहण समारोह दिवस, पंजाब- स्वतंत्रता सेनानी सरदार अजीत सिंह- शहीद दिवस, भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी महादेव देसाई शहीद दिवस, द्वितीय विश्व युद्ध: कोरियाई मुक्ति दिवस, बांग्लादेश का राष्ट्रीय शोक दिवस, लिकटेंस्टीन राष्ट्रीय दिवस, कोरिया का राष्ट्रीय मुक्ति दिवस (उत्तर कोरिया – चोगुखाबंगुई ना), स्वतंत्रता दिवस कांगो गणराज्य
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗺️ _Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानेंगे घर में लकड़ी का फर्नीचर रखने के बारे में। लकड़ी का फर्नीचर घर की शोभा को बढ़ाता है और लगभग हर घर में लकड़ी का कोई न कोई फर्नीचर तो हमें देखने को मिल ही जाता है। हम फर्नीचर तो ले आते हैं, लेकिन हमें उसे रखने की सही दिशा का ज्ञान नहीं होता। इसलिए घर में जहां जगह मिलती है, वहीं पर फर्नीचर रख देते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार घर में फर्नीचर रखने के लिए भी एक सही दिशा निर्धारित होती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के किसी भी कमरे में, ड्राइंग रूम में या अन्य किसी जगह पर लकड़ी का फर्नीचर रखने के लिए आग्नेय कोण, यानि दक्षिण-पूर्व दिशा का चुनाव करना ठीक होता है। क्योंकि इस दिशा का संबंध काष्ठ, यानि लकड़ी से होता है। अतः आग्नेय कोण में लकड़ी का फर्नीचर रखने से उस दिशा से संबंधित तत्वों का शुभ फल प्राप्त होता है।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
टीबी के मरीजों के लिए कौन सा खाना अच्छा है लहसुन को डाइट में शामिल करने से आप टीबी की बीमारी से बच सकते हैं। लहसुन औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसके साथ ही इसमें कई ऐसे गुण होते हैं जिनसे इंफेक्शन नहीं फैलता है। लहसुन की 2 से 3 कलियां आप भोजन से करीब 1 घंटे पहले चबाकर खाएं और ऊपर से पानी पिएं।
नींबू विटामिन सी का एक अच्छा सोर्स है, इसके सेवन से इम्यूनिटी बूस्ट होती है और टीबी जैसे संक्रमण से बच सकते हैं।
तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी का हिंदू धर्म में खास महत्व है। 1 गिलास पानी में तुलसी के पत्तों के साथ जीरा, हींग और 1 नींबू का रस मिलाएं। इस ड्रिंक को पीने से टीबी की बीमारी में फायदा मिलता है।
प्याज ट्यूबरक्लोसिस (TB) की बीमारी में प्याज भी लाभदायक साबित होता है। इसके लिए आप 1 प्याज के रस में हींग मिलाएं और इसे सुबह और शाम में पिएं।
सहजन कई बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होता है। टीबी की बीमारी से बचने के लिए आप सहजन की पत्तियों को उबालकर सेवन करें। इसके अलावा आप सहजन की सब्जी भी खा सकते हैं।
🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
घर पर वैक्स कैसे बनाया जाता है-घर पर वैक्स बनाने के लिए आपको चाहिए -1 कप सफेद चीनी-1/8 कप नींबू का रस या सेब का सिरका-1/8 कप गर्म पानी इसके बाद गैस पर एक मध्यम आकार का बर्तन रखें और बर्तन में सभी सामग्री डालें। तेज आंच पर इसे उबालें, जलने से बचाने के लिए इसे बार-बार हिलाते रहें। एक बार जब मिश्रण उबलने लगे, तो आंच को मध्यम कर दें और बार-बार हिलाते रहें। जब ये सुनहरा भूरा हो जाए तो बर्तन को आंच से उतार लें। ये चीनी जैसा गाढ़ा होना चाहिए जो कि स्किन पर चिपके नहीं। अब इसे एक कटोरे में निकाल लें और पेस्ट को 30 मिनट तक ठंडा होने दें। आप चाहें तो इसमें थोड़ा सा कॉफी पाउडर भी मिला सकते हैं।
होममेड वैक्स के कई फायदे हैं। जैसे कि सबसे पहले ये एक्सफोलिएटिंग और हाइड्रेटिंग गुणों से भरपूर, जो आमतौर पर वैक्सिंग या शेविंग के बाद नहीं मिलते हैं। साथ ही दूसरे वैक्स की तुलना में कम दर्दनाक है और अधिक कोमल हो सकता है। इस वैक्स में पानी में घुलनशील होता है, जिससे इसे साफ करना आसान हो जाता है। इससे पतले और धीमी गति से बाल उग सकते हैं।तो, इन तमाम कारणों से आपको ये वैक्स इस्तेमाल करना चाहिए। वैक्स के बाद आप पिग्मेंटेशन को कम करने के लिए कॉफी और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सतके हैं। ये बेहतर ढंग से काम करेंगे।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कथा, राजा पृथु की -अपने पिता वेन की दाहिनी भुजा के मंथन से पैदा हुए थे पृथु !!!!!!
ध्रुव के वनगमन के पश्चात उनके पुत्र उत्कल को राजसिंहासन पर बैठाया गया, लेकिन वे ज्ञानी एवम विरक्त पुरुष थे, अतः प्रजा ने उन्हें मूढ़ एवं पागल समझकर राजगद्दी से हटा दिया और उनके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सर को राजगद्दी पर बैठाया।
उन्होंने तथा उनके पुत्रों ने लम्बी अवधि तक शासन किया। उनके ही वंश में एक राजा हुए अंग। उनके यहां वेन नाम का पुत्र हुआ।
वेन की निर्दयता से दुखी होकर राजा अंग वन को चले गए। वेन ने राजगद्दी सम्भाल ली। अत्यंत दुष्ट प्रकृति का होने के कारण अंत में ऋषियों ने उसे शाप देकर मार डाला। वेन के कोई सन्तान नहीं थी, अतः उसकी दाहिनी भुजा का मंथन किया गया। तब राजा पृथु का जन्म हुआ।
ध्रुव के वंश में वेन जैसा क्रूर जीव क्यों पैदा हुआ ? इसके पीछे क्या रहस्य है ? यह जानने की इच्छा बड़ी स्वभाविक है। अंग राजा ने अपनी प्रजा को सुखी रखा था। एक बार उन्होंने अश्वमेघ यज्ञ किया था। उस समय देवताओं ने अपना भाग ग्रहण नहीं किया, क्योंकि अंग राजा के कोई सन्तान नहीं थी।
मुनियों की कथानुसार-अंग राजा ने उस यज्ञ को अधूरा छोड़कर पुत्र प्राप्ति के लिए दूसरा यज्ञ किया। आहुति देते समय यज्ञ में से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुआ। उसने राजा को खीर से भरा एक पात्र दिया। राजा ने खीर का पात्र लेकर सुंघा, फिर अपनी पत्नी को दे दिया। पत्नी ने उस खीर को ग्रहण किया।
समय आने पर उसके गर्भ से एक पुत्र हुआ, किन्तु माता अधर्मी वंश की पुत्री थी, इसी कारण वह सन्तान अधर्मी हुई। इसी अंग राजा का पुत्र वेन था।
वेन के वंश से राजा पृथु की हस्तरेखाओं तथा पांव में कमल चिन्ह था। हाथ में चक्र का चिन्ह था। वे भगवान विष्णु के ही अंश थे। ब्राह्मणों ने राजा पृथु का राज्याभिषेक करके सम्राट बना दिया। उस समय पृथ्वी अन्नहीन थी। प्रजा भूखी मर रही। प्रजा का करुण क्रंदन सुनकर राजा पृथु अति दुखी हुए।
जब उन्हें मालूम हुआ कि पृथ्वी माता ने अन्न, औषधि आदि को अपने उदर में छिपा लिया है तो वे धनुष-बाण लेकर पृथ्वी को मारने दौड़ पड़े। पृथ्वी ने जब देखा कि अब उसकी रक्षा कोई नहीं कर सकता तो वह राजा पृथु की शरण में आई। जीवनदान की याचना करती हुई वह बोली-“मुझे मारकर अपनी प्रजा को सिर्फ जल पर ही कैसे जीवित रख पाओगे ?”
पृथु ने कहा-“स्त्री पर हाथ उठाना अवश्य ही अनुचित है, लेकिन जो पालनकर्ता अन्य प्राणियों के साथ निर्दयता का व्यवहार करता है उसे दंड अवश्य ही देना चाहिए।”
पृथ्वी ने राजा को नमस्कार करके कहा-“मेरा दोहन करके आप सब कुछ प्राप्त करे। आपको मेरे योग्य बछड़ा और दोहन-पात्र का प्रबन्ध करना पड़ेगा। मेरी सम्पूर्ण सम्पदा को दुराचारी चोर लूट रहे थे, अतः मैने वह सामग्री अपने गर्भ में सुरक्षित रखी है। मुझे आप समतल बना दीजिये।”
राजा पृथु सन्तुष्ट हुए। उन्होंने मनु को बछड़ा बनाया एवं स्वयं अपने हाथो से पृथ्वी का दोहन करके अपार धन-धान्य प्राप्त किया। फिर देवताओं तथा महर्षियों को भी पृथ्वी के योग्य बछड़ा बनाकर विभिन्न वनस्पति, अमृत, सुवर्ण आदि इच्छित वस्तुएं प्राप्त की। उन्होंने पृथ्वी को अपनी कन्या के रूप में स्वीकार किया। पृथ्वी को समतल बनाकर पृथु ने स्वयं पिता की भांति प्रजाजनों के कल्याण एवं पालन-पोषण का कर्तव्य पूरा किया।
राजा पृथु ने सौ अश्वमेघ यज्ञ किए। स्वयं भगवान विष्णु उन यज्ञों में आए, साथ ही सब देवता भी आए। पृथु के इस उत्कर्ष को देखकर इंद्र को ईर्ष्या हुई। उनको सन्देह हुआ कि कही राजा पृथु इंद्रपुरी न प्राप्त कर ले। उन्होंने सौवे यज्ञ का घोडा चुरा लिया।
शेष कल
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🇮🇳 आज का पंचाग 🇮🇳
मंगलवार 15 अगस्त 2023
15 अगस्त 2023 दिन मंगलवार को ही अधिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज अंग्रेजों से भारतवर्ष की स्वतन्त्रता का दिन है। सच्चा भारतवासी आज के दिन को एक उत्सव की तरह मनाता है। आज राजधानी दिल्ली में भारत के सम्माननीय प्रधानमंत्री जी भारत की पहचान तिरंगा ध्वज फहराएंगे। साथ ही प्रधानमंत्री जी आज के दिन भारतवासियों को संबोधित भी करेंगे। इतना ही नहीं सम्पूर्ण भारतवर्ष के कोने-कोने में ध्वजोत्तोलन किया जाता है। पुरुषोत्तम मास (मलमास) का भौमव्रत है। आज दुर्गायात्रा एवं हनुमान जी के दर्शन का बड़ा ही महत्व होता है। आज सर्वार्थसिद्धियोग एवं यायी (मुद्दई) जयद् योग भी है। आप सभी सनातनी बंधुओं को भौमाष्टमी, भौमव्रत एवं भारतीय स्वतन्त्रता दिवस की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – श्रावण माह कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 12:43 PM तक उपरांत अमावस्या
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर।चतुर्दशी तिथि में भगवान देवदेवेश्वर सदाशिव की पूजा करके मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों से समन्वित हो जाता है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 01:58 PM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि व अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं।
📣 योग – व्यातीपात योग 05:32 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
⚡ प्रथम करण : शकुनि – 12:42 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : चतुष्पाद – 01:54 ए एम, अगस्त 16 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:36:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:32:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:24 ए एम से 05:07 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:45 ए एम से 05:50 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:52 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:37 पी एम से 03:30 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:01 पी एम से 07:23 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 07:01 पी एम से 08:06 पी एम
💧 अमृत काल : 06:49 ए एम से 08:36 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, अगस्त 16 से 12:47 ए एम, अगस्त 16
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 01:59 पी एम से 05:51 ए एम, अगस्त 16
👩🏻🎓 स्थायीजायद योग – 15 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 43 मिनट तक
🛫 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻♂️ आज का उपाय-शिव मंदिर में मसूर की दाल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
🇮🇳 पर्व एवं त्यौहार – पितृकार्ये अमावस्या/मूल प्रारंभ/अमावस्या प्रारंभ दोपहर 12.42/पतती/ दर्श अमावस्या/ स्वतंत्रता दिवस/ मंगला गौरी व्रत/ अरविंद घोष जयन्ती, ऐतिहासिक स्मारक लाल किले पर ध्वजारोहण समारोह दिवस, पंजाब- स्वतंत्रता सेनानी सरदार अजीत सिंह- शहीद दिवस, भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी महादेव देसाई शहीद दिवस, द्वितीय विश्व युद्ध: कोरियाई मुक्ति दिवस, बांग्लादेश का राष्ट्रीय शोक दिवस, लिकटेंस्टीन राष्ट्रीय दिवस, कोरिया का राष्ट्रीय मुक्ति दिवस (उत्तर कोरिया – चोगुखाबंगुई ना), स्वतंत्रता दिवस कांगो गणराज्य
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗺️ _Vastu Tips 🗽
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानेंगे घर में लकड़ी का फर्नीचर रखने के बारे में। लकड़ी का फर्नीचर घर की शोभा को बढ़ाता है और लगभग हर घर में लकड़ी का कोई न कोई फर्नीचर तो हमें देखने को मिल ही जाता है। हम फर्नीचर तो ले आते हैं, लेकिन हमें उसे रखने की सही दिशा का ज्ञान नहीं होता। इसलिए घर में जहां जगह मिलती है, वहीं पर फर्नीचर रख देते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार घर में फर्नीचर रखने के लिए भी एक सही दिशा निर्धारित होती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के किसी भी कमरे में, ड्राइंग रूम में या अन्य किसी जगह पर लकड़ी का फर्नीचर रखने के लिए आग्नेय कोण, यानि दक्षिण-पूर्व दिशा का चुनाव करना ठीक होता है। क्योंकि इस दिशा का संबंध काष्ठ, यानि लकड़ी से होता है। अतः आग्नेय कोण में लकड़ी का फर्नीचर रखने से उस दिशा से संबंधित तत्वों का शुभ फल प्राप्त होता है।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
टीबी के मरीजों के लिए कौन सा खाना अच्छा है लहसुन को डाइट में शामिल करने से आप टीबी की बीमारी से बच सकते हैं। लहसुन औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसके साथ ही इसमें कई ऐसे गुण होते हैं जिनसे इंफेक्शन नहीं फैलता है। लहसुन की 2 से 3 कलियां आप भोजन से करीब 1 घंटे पहले चबाकर खाएं और ऊपर से पानी पिएं।
नींबू विटामिन सी का एक अच्छा सोर्स है, इसके सेवन से इम्यूनिटी बूस्ट होती है और टीबी जैसे संक्रमण से बच सकते हैं।
तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी का हिंदू धर्म में खास महत्व है। 1 गिलास पानी में तुलसी के पत्तों के साथ जीरा, हींग और 1 नींबू का रस मिलाएं। इस ड्रिंक को पीने से टीबी की बीमारी में फायदा मिलता है।
प्याज ट्यूबरक्लोसिस (TB) की बीमारी में प्याज भी लाभदायक साबित होता है। इसके लिए आप 1 प्याज के रस में हींग मिलाएं और इसे सुबह और शाम में पिएं।
सहजन कई बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होता है। टीबी की बीमारी से बचने के लिए आप सहजन की पत्तियों को उबालकर सेवन करें। इसके अलावा आप सहजन की सब्जी भी खा सकते हैं।
🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
घर पर वैक्स कैसे बनाया जाता है-घर पर वैक्स बनाने के लिए आपको चाहिए -1 कप सफेद चीनी-1/8 कप नींबू का रस या सेब का सिरका-1/8 कप गर्म पानी इसके बाद गैस पर एक मध्यम आकार का बर्तन रखें और बर्तन में सभी सामग्री डालें। तेज आंच पर इसे उबालें, जलने से बचाने के लिए इसे बार-बार हिलाते रहें। एक बार जब मिश्रण उबलने लगे, तो आंच को मध्यम कर दें और बार-बार हिलाते रहें। जब ये सुनहरा भूरा हो जाए तो बर्तन को आंच से उतार लें। ये चीनी जैसा गाढ़ा होना चाहिए जो कि स्किन पर चिपके नहीं। अब इसे एक कटोरे में निकाल लें और पेस्ट को 30 मिनट तक ठंडा होने दें। आप चाहें तो इसमें थोड़ा सा कॉफी पाउडर भी मिला सकते हैं।
होममेड वैक्स के कई फायदे हैं। जैसे कि सबसे पहले ये एक्सफोलिएटिंग और हाइड्रेटिंग गुणों से भरपूर, जो आमतौर पर वैक्सिंग या शेविंग के बाद नहीं मिलते हैं। साथ ही दूसरे वैक्स की तुलना में कम दर्दनाक है और अधिक कोमल हो सकता है। इस वैक्स में पानी में घुलनशील होता है, जिससे इसे साफ करना आसान हो जाता है। इससे पतले और धीमी गति से बाल उग सकते हैं।तो, इन तमाम कारणों से आपको ये वैक्स इस्तेमाल करना चाहिए। वैक्स के बाद आप पिग्मेंटेशन को कम करने के लिए कॉफी और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सतके हैं। ये बेहतर ढंग से काम करेंगे।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कथा, राजा पृथु की -अपने पिता वेन की दाहिनी भुजा के मंथन से पैदा हुए थे पृथु !!!!!!
ध्रुव के वनगमन के पश्चात उनके पुत्र उत्कल को राजसिंहासन पर बैठाया गया, लेकिन वे ज्ञानी एवम विरक्त पुरुष थे, अतः प्रजा ने उन्हें मूढ़ एवं पागल समझकर राजगद्दी से हटा दिया और उनके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सर को राजगद्दी पर बैठाया।
उन्होंने तथा उनके पुत्रों ने लम्बी अवधि तक शासन किया। उनके ही वंश में एक राजा हुए अंग। उनके यहां वेन नाम का पुत्र हुआ।
वेन की निर्दयता से दुखी होकर राजा अंग वन को चले गए। वेन ने राजगद्दी सम्भाल ली। अत्यंत दुष्ट प्रकृति का होने के कारण अंत में ऋषियों ने उसे शाप देकर मार डाला। वेन के कोई सन्तान नहीं थी, अतः उसकी दाहिनी भुजा का मंथन किया गया। तब राजा पृथु का जन्म हुआ।
ध्रुव के वंश में वेन जैसा क्रूर जीव क्यों पैदा हुआ ? इसके पीछे क्या रहस्य है ? यह जानने की इच्छा बड़ी स्वभाविक है। अंग राजा ने अपनी प्रजा को सुखी रखा था। एक बार उन्होंने अश्वमेघ यज्ञ किया था। उस समय देवताओं ने अपना भाग ग्रहण नहीं किया, क्योंकि अंग राजा के कोई सन्तान नहीं थी।
मुनियों की कथानुसार-अंग राजा ने उस यज्ञ को अधूरा छोड़कर पुत्र प्राप्ति के लिए दूसरा यज्ञ किया। आहुति देते समय यज्ञ में से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुआ। उसने राजा को खीर से भरा एक पात्र दिया। राजा ने खीर का पात्र लेकर सुंघा, फिर अपनी पत्नी को दे दिया। पत्नी ने उस खीर को ग्रहण किया।
समय आने पर उसके गर्भ से एक पुत्र हुआ, किन्तु माता अधर्मी वंश की पुत्री थी, इसी कारण वह सन्तान अधर्मी हुई। इसी अंग राजा का पुत्र वेन था।
वेन के वंश से राजा पृथु की हस्तरेखाओं तथा पांव में कमल चिन्ह था। हाथ में चक्र का चिन्ह था। वे भगवान विष्णु के ही अंश थे। ब्राह्मणों ने राजा पृथु का राज्याभिषेक करके सम्राट बना दिया। उस समय पृथ्वी अन्नहीन थी। प्रजा भूखी मर रही। प्रजा का करुण क्रंदन सुनकर राजा पृथु अति दुखी हुए।
जब उन्हें मालूम हुआ कि पृथ्वी माता ने अन्न, औषधि आदि को अपने उदर में छिपा लिया है तो वे धनुष-बाण लेकर पृथ्वी को मारने दौड़ पड़े। पृथ्वी ने जब देखा कि अब उसकी रक्षा कोई नहीं कर सकता तो वह राजा पृथु की शरण में आई। जीवनदान की याचना करती हुई वह बोली-“मुझे मारकर अपनी प्रजा को सिर्फ जल पर ही कैसे जीवित रख पाओगे ?”
पृथु ने कहा-“स्त्री पर हाथ उठाना अवश्य ही अनुचित है, लेकिन जो पालनकर्ता अन्य प्राणियों के साथ निर्दयता का व्यवहार करता है उसे दंड अवश्य ही देना चाहिए।”
पृथ्वी ने राजा को नमस्कार करके कहा-“मेरा दोहन करके आप सब कुछ प्राप्त करे। आपको मेरे योग्य बछड़ा और दोहन-पात्र का प्रबन्ध करना पड़ेगा। मेरी सम्पूर्ण सम्पदा को दुराचारी चोर लूट रहे थे, अतः मैने वह सामग्री अपने गर्भ में सुरक्षित रखी है। मुझे आप समतल बना दीजिये।”
राजा पृथु सन्तुष्ट हुए। उन्होंने मनु को बछड़ा बनाया एवं स्वयं अपने हाथो से पृथ्वी का दोहन करके अपार धन-धान्य प्राप्त किया। फिर देवताओं तथा महर्षियों को भी पृथ्वी के योग्य बछड़ा बनाकर विभिन्न वनस्पति, अमृत, सुवर्ण आदि इच्छित वस्तुएं प्राप्त की। उन्होंने पृथ्वी को अपनी कन्या के रूप में स्वीकार किया। पृथ्वी को समतल बनाकर पृथु ने स्वयं पिता की भांति प्रजाजनों के कल्याण एवं पालन-पोषण का कर्तव्य पूरा किया।
राजा पृथु ने सौ अश्वमेघ यज्ञ किए। स्वयं भगवान विष्णु उन यज्ञों में आए, साथ ही सब देवता भी आए। पृथु के इस उत्कर्ष को देखकर इंद्र को ईर्ष्या हुई। उनको सन्देह हुआ कि कही राजा पृथु इंद्रपुरी न प्राप्त कर ले। उन्होंने सौवे यज्ञ का घोडा चुरा लिया।
शेष कल
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