बिना चुनाव ही बड़वारा भाजपा प्रत्याशी बन गये विधायक
जन आशीर्वाद यात्रा में लगे विधायक होने के पोस्टर
संगठन ने साधी चुप्पी, बड़वारा विधायक ने कहा चुनाव आयोग से करेंगे शिकायत
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । अभी चुनाव हुआ नहीं, जनता ने किसी को चुना नहीं और भाजपा ने अपने बड़वारा के प्रत्याशी को विधायक होने का तमगा दे दिया। जनता के आशीर्वाद से ऊपर उठ कर भाजपा ने अपनी मनमानी पूर्ण कार्यशैली का परिचय देते हुए शहर के बीचोबीच सुभाष चौक सहित अन्य जगहों पर भाजपा के बड़वारा प्रत्याशी धीरेंद्र सिंह को बड़वारा का विधायक बना दिया। भारतीय जनता पार्टी के द्वारा शहर में लगाए गए भाजपा के बड़वारा प्रत्याशी को विधायक संबोधित करने वाले पोस्टर को लेकर कांग्रेस जनों में खासा आक्रोश व्याप्त है।
कांग्रेस के नवनियुक्त कार्यवाहक अध्यक्ष रौनक खंडेलवाल सहित अन्य कांग्रेस जनों ने इन पोस्टों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
इस संबंध में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करणसिंह चौहान ने तंज कसते हुए बोला कि भाजपा ने सत्ता की लोलुपता में संविधान की धज्जियां उड़ा दी। क्योकि अभी आचार संहिता नहीं लगी, चुनाव नहीं हुआ, परिणाम नहीं आया और इस पर भाजपा का आचरण हास्यप्रद है। वहीं वर्तमान विधायक विजयराघवेंद्र सिंह ने इसे भाजपा की बौखलाहट बताया और कहा कि जिस प्रकार पूरे प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की लहर है कमलनाथ जी को जिस प्रकार जनता का समर्थन मिल रहा, उसे देखते हुए भाजपा सत्ता का दुरूपयोग करते हुए तानाशाही में उतर आई है। भाजपा नेताओ का मानसिक स्तर डगमगा गया है और जबकि एक चुने हुए विधायक के मौजूद होने पर भी बिना चुनाव लड़े प्रत्याशी को विधायक बताया जा रहा है ये पागलपन और स्तरहीन विचारधारा का परिचायक है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग से भी शिकायत करने के मूड नज़र आ रही है।
अति आत्म विश्वास ले न डूबे
जानकारी यह भी मिल रही है कि भाजपा अपने बड़वारा प्रत्याशी धीरेंद्र सिंह को आने वाले चुनाव में जीता हुआ मान रही है लेकिन यह अति आत्मविश्वास पार्टी के लिये कहीं भारी न पड़ जाये। चूंकि पूर्व में भी बड़वारा से भाजपा के मोती कश्यप विधायक रहे है और इस दौरान उनके रहने से क्षेत्र को क्या मिला यह क्षेत्र की जनता अच्छे से जानती है। लिहाजा बिना चुनाव संपन्न हुये अपने प्रत्याशी को विधायक बताया पार्टी के अनुशासन को भी तार-तार कर रहा है। लगाये गये बैनर-पोस्टर के संबंध में संगठन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।



