Aaj ka Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 06 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 06 अक्टूबर 2023
06 अक्टूबर 2023 दिन शुक्रवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज जीवितपुत्रिका व्रत का महान पर्व है। आज जीमूतवाहन जी का पूजन एवं अपने पुत्रों के लिए दीर्घायु की कामना सभी माताओं द्वारा की जाएगी। आज आठवें दिन का श्राद्ध किया जाएगा। वर्ष भर में किसी के भी पूर्वज किसी भी मास एवं किसी भी पक्ष के अष्टमी तिथि को गुजरे हों उनका श्राद्ध आज ही किया जाएगा। गया जी में मध्याष्टमी श्राद्ध आज ही है। आज महालक्ष्मी व्रत-पूजा-अनुष्ठान की समाप्ति का दिन है। कुछ विद्वानों का मत है, कि जीवितपुत्रिका व्रत के कथानुसार सप्तमी युक्ता अष्टमी व्रत नहीं किया जाता है, जबकि नवमी युक्ता अष्टमी ग्राह्य बताया गया है। इसलिए जीवितपुत्रिका व्रत 07 अक्टूबर को होना चाहिए। तो जो लोग 06 अक्टूबर को व्रत करेंगे वो 07 अक्टूबर को सुबह 10:21 बजे के उपरान्त व्रत का पारण करेंगे। आप सभी सनातनियों को जीवितपुत्रिका व्रत एवं आठवें दिन के श्राद्ध की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : आश्विन माह कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 06:35 AM तक उपरांत अष्टमी |
✏️ तिथि के स्वामी – सप्तमी के स्वामी भगवान सूर्य देव हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र आद्रा 09:31 PM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी राहु है । तथा नक्षत्र के देवता बुध है।
🔊 योग : परिघ योग 05:30 AM तक, उसके बाद शिव योग
⚡ प्रथम करण : बव – 06:34 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 07:17 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:08:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:52:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:39 ए एम से 05:27 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:03 ए एम से 06:16 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:46 ए एम से 12:33 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:54 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:02 पी एम से 06:26 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:02 पी एम से 07:15 पी एम
💧 अमृत काल : 10:45 ए एम से 12:28 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:34 ए एम, अक्टूबर 07
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 09:32 पी एम से 06:17 ए एम, अक्टूबर 07
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में खीर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : सर्वार्थसिद्धि योग/श्री महालक्ष्मी व्रत/अष्टमी श्राद्ध, हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल जी जयन्ती, शिरडी के साईंबाबा महासमाधि दिवस, विश्व वन्य प्राणी दिवस, खत्री दिवस, सिक्खों के गुरु गुरु हरराय स्मृति दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी गोकुलभाई भट्ट शहीद दिवस, अभिनेता एवं राजनीतिक विनोद खन्ना जन्मोत्सव, जर्मन-अमेरिकी दिवस, इंस्टाग्राम स्थापना दिवस, भारतीय वैज्ञानिक मेघनाथ शाह जन्म दिवस, वन्यजीव सप्ताह (2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर)
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
लाफिंग बुद्धा से जुड़ी जरूरी बातें वास्तु की मानें तो कभी भी लाफिंग बुद्धा अपने पैसों से नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि खुद के पैसों से खरीदे गए लाफिंग बुद्धा से शुभ फल नहीं मिलता है। इसलिए इसे कभी भी खुद के पैसों से न खरीदें। वास्तु के अनुसार गिफ्ट में लाफिंग बुद्धा मिलना बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। साथ ही ये आर्थिक समस्याओं को भी दूर करता है।
लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को मुख्य द्वार के सामने कम से कम 30 इंच की ऊंचाई पर लगाया जाना चाहिए। लगाए जाने के लिए आदर्श ऊंचाई 30 इंच से अधिक और साढ़े बत्तीस इंच से कम होनी चाहिए। मूर्ति की नाक गृह स्वामी के दोनों हाथों की उंगलियों के बराबर, यानी कम से कम आठ अंगुल का होना चाहिए और अधिकतम ऊंचाई घर की मालिकन के हाथ की नाप से सवा हाथ के बराबर होनी चाहिए।
मुख्य द्वार के सामने रखी हुई मूर्ति का चेहरा मुख्य द्वार के सामने ही होना चाहिए। जैसे ही द्वार खुले सबसे पहले वही मूर्ति दिखे। इस बात का ध्यान रखें कि लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को रसोई, डायनिंग रूम या बेडरूम में नहीं रखना चाहिए। साथ ही इसकी पूजा भी नहीं की जानी चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मैनिंजाइटिस के अन्य कारण-मैनिंजाइटिस के अन्य कारणों की बात करें तो इसमें शामिल है गर्म में मां से बच्चे को होने वाला फीटल मैनिंजाइटिस। दूसरा, ये हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस, एचआईवी, मम्प्स वायरस, वेस्ट नाइल वायरस और अन्य वायरस की वजह से भी हो सकता है।
मैनिंजाइटिस के लक्षण- मैनिंजाइटिस की वजह से शरीर में कई सारे लक्षण नजर आ सकते हैं। जैसे तेज बुखार जो ब्रेन में इंफेक्शन की वजह से जुड़ा हुआ हो सकता है। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी के पास तरह पदार्थ का जमा होना, सिर में दर्द रहना, गले में अकड़न, उल्टी, दौरे पड़ना, रोशनी के प्रति सेंसिटिव होना, भूख न लगना और छोटे बच्चों में कई सारी समस्याएं।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
घुटना की चिकनाई कैसे बढ़ाएं? यदि आप मांसाहारी हैं तो “बकरे के पाए “(पैर) को हफ्ते में दो बार खा कर देखे कुछ लोगों ने लाभ बताया है हालांकि मै मांसाहार के पक्ष में नहीं हूं परंतु एक चिकिसक होने के नाते, रोगियों के बताये ,उनके अनुभव बता रहा हूं । कुछ केप्सूल भी आते हैं जिन को अस्थि रोग विशेषज्ञ बतायेंगे । विना चिकित्सक की सलाह के कोई दवा न लें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
धोखेबाज लोगों की पहचान: सच और झूठ बोलना एक अलग चीज है पर लोगों को धोखा दे जाना, ज्यादा खराब चीज है। दरअसल, धोखा कोई भी इंसान तब देता है जब वो उसका करीबी बन जाता है। सामने वाला व्यक्ति उसे विश्वास की नजर से देख रहा होता है और वो व्यक्ति उसे धोखे की नजर से देख रहे होता है। कई मामले खासकर कि करीबी रिश्तों में लोग धोखा खा जाते हैं। ऐसे में इन धोखेबाजों से कैसे बचें, इस बारे में जानना बेहद जरूरी है। तो, ऐसे में कुछ कॉमन चीजों को जानकर आप धोखेबाज लोगों की पहचान कर सकते हैं।
धोखेबाज लोगों को कैसे पहचानें-तर्कहीन बात करना धोखेबाज लोगों की सबसे बड़ी पहचान ये है कि ऐसे लोग तर्कहीन बातें करते हैं। इनकी एक भी बातों के पीछे आपको कोई भी तर्क नजर नहीं आएगा। साथ ही एक बात, दूसरी बात से बिलकुल भी रिलेट नहीं करेगी। तो, अगर आप ये चीज किसी इंसान के अंदर बार-बार देखते हैं तो आपको उनसे सर्तक रहना चाहिए और दूरी बनाना चाहिए।
हमेशा मिली-जुली बात करना हमेशा मिली-जुली बात करना धोखेबाज लोगों के लक्षण होते हैं। क्योंकि ऐसे लोग सीधी बात नहीं करते और आपको कंफ्यूजन में रखते हैं। फिर मौका पड़ने पर अपनी बातों को, अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं और अपने फायदे के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं।
अपनी बात से पलट जाना अपनी बात से पलट जाना, धोखेबाजों का एक बड़ा लक्षण है। आप इस लक्षण को बार-बार गौर भी कर सकते हैं। ऐसे में हमेशा ध्यान दें कि जो लोग अपनी कमिटमेंट से पीछे हटते हैं वो किसी को भी, कभी भी धोखा दे सकते हैं। तो, अपनी बात से पलट जाने वाले लोगों से थोड़ा सतर्क होकर रहें।
जरूरत में कभी काम न आना जरूरत में कभी काम न आना, धोखेबाजी है। धोखेबाज लोग जरूरत के समय कभी भी सामने नहीं आते हैं और अपनी बातों से पीछे हट जाते हैं। ये चीज अगर आप किसी इंसान में हर छोटे मौकों पर देख रहे हैं तो आपको ऐसे लोगों से सतर्क रहना चाहिए और दूरी बनाना चाहिए।
करीबी और इमोशनल बने रहना करीबी और इमोशनल बने रहना धोखेबाजी की पहली पहचान है। अगर आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिला है जो आपसे इमोशनल बातें करता है और करीबी बनने की कोशिश करता है तो आपको उससे सतर्क रहना चाहिए। अपनी कोई बात ऐसे लोगों के साथ शेयर न करें क्योंकि धोखा देते समय ऐसे लोग इस बात का इस्तेमाल कर सकते हैं। तो, धोखेबाज लोगों के इन लक्षणों को जान लें और सतर्क रहें।
☞✺═══✺🪔🌹🪔✺═══✺☜
⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

