ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 20 दिसम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 20 दिसम्बर 2023

20 दिसम्बर 2023 दिन बुधवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज बुधवार की अष्टमी अर्थात बुधाष्टमी का पावन मुहूर्त बन रहा है। बुधवार कि यदि अष्टमी पड़ रही हो तो इस तिथि में किया गया मन्त्र जप सिद्ध हो जाता है। बुधाष्टमी में किया गया श्राद्ध-तर्पण, तीर्थ स्नान एवं दान अक्षय हो जाता है, क्योंकि बुधाष्टमी सूर्यग्रहण के बराबर पुण्यदायिनी माना गया है।। (शिवपुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय – 10.)। आप सभी सनातनियों को “बुधाष्टमी के परम पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष वार बुधवार अष्टमी तिथि 11:14 AM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 10:58 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि मीन है, जिसके स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
🔊 योग – व्यातीपात योग 03:56 PM तक, उसके बाद वरीयान योग
प्रथम करण : बव – 11:14 ए एम तक
द्वितीय करण : बालव – 10:23 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:58 ए एम से 05:49 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:23 ए एम से 06:41 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:05 पी एम से 02:49 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:44 पी एम से 06:10 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:46 पी एम से 07:04 पी एम
💧 अमृत काल : 06:23 पी एम से 07:54 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:40 ए एम, दिसम्बर 21
❄️ रवि योग : 10:58 पी एम से 06:41 ए एम, दिसम्बर 21
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♂️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दुर्गा अष्टमी/ बुधाष्टमी/ पंचक/ भारतीय पहलवान मोहित ग्रेवाल जन्म दिवस, अंतरराष्ट्रीय मानव एकता दिवस, भारतीय गोल्फ संघ दिवस, विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी बैंगलोर वेंकट और बी। वी रमन स्मृति दिवस
👉🏽 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🐚
शास्त्रों में शंख का हमेशा से बेहद खास महत्व रहा है। किसी भी अच्छे कार्यों की शुरुआत शंख बजाकर ही की जाती है। कहते हैं शंख में देवतागण वास करते हैं। इसके मध्य में वरुण देव, पृष्ठ भाग में ब्रह्मा जी और अग्र भाग में गंगा और सरस्वती का निवास माना जाता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में शंख रखने से वास्तु दोषों से छुटकारा मिलता है, साथ ही धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है। अगर आपके घर के किसी हिस्से में वास्तु दोष है, तो उस कोने में शंख रखने से वहां का वास्तु दोष समाप्त हो जाता है।
आपको बता दें कि शंख प्रायः तीन प्रकार के होते हैं- दक्षिणावृत्ति शंख, मध्यावृत्ति शंख तथा वामावृत्ति शंख। जो शंख दाहिने हाथ से पकड़ा जाता है, वह दक्षिणावृत्ति शंख कहलाता है। जिस शंख का मुंह बीच में खुलता है, वह मध्यावृत्ति और जो शंख बायें हाथ से पकड़ा जाता है, वह वामावृत्ति शंख कहलाता है। इनमें से दक्षिणावृत्ति शंख को लक्ष्मी का कारक माना जाता है। इसे घर में रखने से धन- सम्पदा में बरकत होती है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जादू-टोना फेल हो जाता है इस एक चमत्कारी पौधे से…तंत्र शास्त्र में अनेक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है।जैसे- काली हल्दी, शंख, रत्न, बांदा, श्रीफल, एकाक्षी नारियल, कौड़ी आदि। इन सबका अलग-अलग महत्व व प्रयोग है। यह सब चमत्कारी वस्तुएं हैं।
ऐसा ही एक चमत्कारी पौधा है। अफेद आक (आंकड़ा) यह बहुत चमत्कारी पौधा है। यह सामान्य रूप से पाएं जाने वाले आक के पौधे से अलग होता है। इसका उपयोग की तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है। तांत्रिक प्रयोगों से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जिस घर में यह लगा होता है। उस घर किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र या जादू-टोने का असर नहीं होता है।
इस आक के पौधे से भी अधिक चमत्कारी है। इससे निर्मित गणेश प्रतिमा। तंत्र शास्त्र में यह बताया गया है। कि यदि सफेद आक से निर्मित गणेश प्रतिमा की विधिवत पूजा की जाए तो सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गणेश प्रतिमा अद्भुत व चमत्कारी होता है। इसकी पूजा बहुत नियम और कायदों से करनी पड़ती है। नियम से पूजा ना होने पर इसका उचित लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए यदि आप चाहते हैं। कि आपके घर में किसी तरह के तंत्र-मंत्र का असर ना हो तो ये पौधा घर में जरुर लगाएं। इसके अलावा सफेद आक की जड़ को भी तंत्र में बहुत उपयोगी माना जाता है।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
कैसे बनाएं ऑइल? 2 चम्मच काला तिल, 3-4 लौंग, 10-12 सूखे करी पत्ते को गैस पर रखकर हल्की आंच पर 5 मिनट तक भून लें। अब इन्हें एक साथ ग्राइंडर में मिक्स कर एकदम बारीक पीस लें। अब 200 ग्राम नारियल तेल और ऑलिव ऑइल को एक साथ मिक्स कर गैस पर रख दें और हल्का गर्म कर गैस बंद कर दें। अब इस तेल में जो आपने पाउडर बनाया है उसे अच्छी तरह मिला दें। आप जादुई ऑइल तैयार है। इसे कंटेनर में डालकर रख दें। इस तेल को आप एक महीने तक इस्तेमाल कर सकते हैं
कैसे लगाएं? रात को सोने से पहले हफ्ते में 3 बार इस तेल को लगाएं। इस तेल को अपन जड़ों पर लगाएं और बालों की मालिश करें। ऐसा करने से आपके बाला बहुत जल्द ही बढ़ने लगेंगे।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
भूत प्रेतों की श्रेणी में सबसे खतरनाक कौन होता है?
पिशाच जीवित प्राणियों के खून पीकर जीवित रहते हैं , भूत प्रेत पिशाच में सबसे ज्यादा मसानी भूत खतरनाक होता है।
सच में शमशन में भूत रहते है क्या…❓
भूतों पर बहस सुरु होने लगी तो कुछ दोस्तों ने ने मिलकर एक फैसला लिया के जो दोस्त एक पूरी रात शमशान मे बितायेगा उसे एक हफ्ते तक हॉटल मे बाकी के दोस्त पार्टी देंगे.
पहले कौन जायेगा इसपे बहस सुरु होयी… उन दोस्तो में एक थोडा डरपोक था….
अब वो कुछ बोल ही नही रहा था… सबने अपने नाम की पर्ची बनाके सामने रख दी….और एक पर्ची चूनी…. उस पर्ची में उसी दोस्त का नाम निकला जो थोडा डरपोक था…
पर उसने चेहरे पे ऐसे भाव लाये जैसे वो बहोत शूरवीर है …
अगले दिन सब दोस्त उस दोस्त के घर गये और ठीक रात 12 बजे उस दोस्त को शमशान छोड आये…
उस वक्त थंडी का मौसम चल रहा था तो उस दोस्त ने शॉल लपेटे हुये थी… अंदर से वो डरा हुआ था..
भगवान का नाम ले रहा था और शमशान में घुम रहा था… अचानक उसकी शॉल किसीने खींच ली…
उसे लगा उसके पीछे कोई भूत खडा है और उसने शॉल खींची है लेकीन असल में उस पेड पर किसी ने कील ठोकी थी और उस कील मे शॉल अटक गयी थी…
अब वो दोस्त बहोत घबरा गया और वही बेहोश हो गया.
जब सबेरे बाकी के दोस्त शमशान गये तो उन्हे उनका दोस्त बेहोश मिला
उसे उठाया और दवाखाने ले गये… वहा पे डॉक्टर ने उसका इलाज किया..
जब दोस्त ने क्या क्या हुआ ये बताया तो सब दोस्त शमशान मे उस पेड के पास गये तो उन्हे वो कील दिखी…
ये कील देखते ही सब दोस्त हसने लगे
और बोले भूत नही कील ने शॉल पकडी थी….अब भूत क्या होता है मे आपको बताता हू….
एक महाराज हमारे घर आये थे तो बातो बातो में मैने उनसे पुछा था के सचमें भूत होते है?
तब उसपे महाराज बोले के आप किसी सडक पे रोज आते जाते हो…
अगर पता चला के एक जगह किसी का अपघात हुआ था..
तो उस जगह पे जाने के बाद आपको उस बात की याद आयेगी और आप डर जाओगे.
👉🏽 ये डर ही भूत है.
अब तो आप समझ ही गए होंगे की भूतों की श्रेणी में सबसे ज्यादा खतरनाक होता है डर नाम का भूत ।मूल स्रोत है डर ही भूत है ।
अतृप्त आत्माएं भूत प्रेत आदि का मन बहुत शक्तिशाली होता हैं और ये अतृप्त आत्माएं अपने इसी मन की शक्ति से शरीर धरि मनुष्य या अन्य प्राणी के मन को प्रभावित करके डर उत्पन्न करती हैं। या ऐसे हॉर्मोन उत्पन्न होते हैं जिससे डर लगता है और मनुष्य कल्पना करके ऐसे वीभस्त डरवाने चित्र बना लेता है।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

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