एकदंत संकष्टी चतुर्थी आज, जानें तिथि, मुहूर्त, चंद्रोदय समय, व्रत और पूजा विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 एकदंत संकष्टी चतुर्थी आज, जानें तिथि, मुहूर्त, चंद्रोदय समय, व्रत और पूजा विधि
⭕ HIGHLIGHTS
🔹 ज्येष्ठ माह में किया जाता है एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत।
🔹 इस तिथि पर की जाती है भगवान गणेश की पूजा।
🔹 एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें गणेश जी को प्रसन्न।
👉🏽 हर मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। हर एक चतुर्थी का अपना-अपना महत्व है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को एकदंत संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। इस बार एकदंत संकष्टी चतुर्थी तिथि को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। मान्यता है कि इस दिन गणपति जी की पूजा सच्चे मन से करने से संतान सुख, सुख-समृद्धि के साथ तरक्की का आशीर्वाद मिलता है और हर तरह के कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत की सही तिथि, मुहूर्त, पारण के साथ से लेकर हर एक जानकारी…
📆 एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2024 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 26 मई, रविवार को शाम 06 बजकर 06 मिनट पर आरंभ हो रही है, जो 27 मई सोमवार को शाम 04 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में ज्येष्ठ मास की संकष्टी चतुर्थी व्रत 26 मई रविवार को रखा जाएगा।
⚛️ एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2024 पूजा मुहूर्त
एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा के दो शुभ मुहूर्त हैं। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 8 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक और दूसरा शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 12 मिनट से रात 9 बजकर 45 मिनट तक का है।
💧 एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2024 अर्घ्य समय
संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिए बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए 26 मई को चंद्रोदय रात 10 बजकर 12 मिनट पर होगा।
💮 शुभ योग
इस साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर सबसे पहले साध्य योग का निर्माण हो रहा है. यह योग सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक है. इसके बाद शुभ योग का निर्माण हो रहा है. शुभ योग दिन भर रहेगा. इस योग में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध होंगे. एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर भद्रा का भी शुभ संयोग बन रहा है. इस दिन भद्रा पाताल में रहेंगी. भद्रा के पाताल में रहने के दौरान पृथ्वी वासी का कल्याण होता है. एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर भद्रा योग संध्याकाल 06 बजकर 06 मिनट तक है. इसके अलावा शिववास का भी योग बन रहा है. इस योग का निर्माण प्रदोष काल में हो रहा है. इस समय में भगवान गणेश की पूजा करने से आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
🍱 एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह उठकर बप्पा का ध्यान करके अपने दिन की शुरुआत करें। इसके बाद स्नान करें, मंदिर को साफ करें और गंगा जल छिड़ककर पवित्र करें। सूर्य देव को जल चढ़ाएं। एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान गणेश की मूर्ति विराजित करें। इसके बाद बप्पा को लाल चंदन, लाल फूल, दूर्वा, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं। अब दीपक जलाकर आरती करें। साथ ही गणेश चालीसा का भी पाठ करें। मोदक, फल आदि चीजों का भोग लगाएं। प्रसाद को लोगों में बांटें। लोगों को श्रद्धा के अनुसार कपड़े, भोजन और धन का दान करें।
💁🏻 एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करने से सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं. भगवान गणेश के आशीर्वाद से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. जीवन में शुभता बढ़ती है और कार्य बिना बाधा के पूर्ण होते हैं. गणेश जी के आशीर्वाद से कार्यों में सफलता मिलती है।


