आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 25 जून 2024
25 जून 2024 दिन मंगलवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष कि चतुर्थी तिथि है। आज अंगारक संकष्टि श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आप सभी सनातनियों को अंगारक संकष्टि श्रीगणेश चतुर्थी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 11:11 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी तिथि के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 02:32 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – श्रवण नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। तथा श्रवण नक्षत्र का देवता भगवान विष्णु को माना गया है।
⚜️ योग – वैधृति योग 09:05 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
⚡ प्रथम करण : बव – 12:17 पी एम तक
✨ द्वितीय करण – बालव – 11:10 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:05 ए एम से 04:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:25 ए एम से 05:25 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:52 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:43 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:42 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 03:19 ए एम, जून 26 से 04:49 ए एम, जून 26
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, जून 26 से 12:44 ए एम, जून 26
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-गणेश मंदिर में बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्रीगणेश चतुर्थी व्रत (चंद्रोदय रात्रि 10:41 मि.)/पंचक प्रारम्भ, कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी, अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस., राष्ट्रीय स्ट्रॉबेरी परफेट दिवस, डॉ भीमराव आंबेडकर जयन्ती, विश्व विटिलिगो दिवस, अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस, वैश्विक बीटल्स दिवस, राष्ट्रीय लियोन दिवस, क्रांतिकारी स्वामीसहजानंद सरस्वती स्मृति दिवस, अभिनेत्री करिश्मा कपूर जन्म दिवस, प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जन्म दिवस, राजनीतिज्ञ वी. पी. सिंह जन्म दिवस, राजस्थान के दसवें मुख्यमंत्री शिव चरण माथुर स्मृति दिवस, (परमवीर चक्र सम्मानित) मनोज कुमार पांडेय जयन्ती
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🛕 Vastu tips 🏚️
अपने कमरे की सफाई खुद करना : खुद के कमरे की सफाई खुद से करने को भी अच्छी आदत माना जाता है। ज्योतिष अनुसार खुद से साफ सफाई करने से शनि राहु के दुष्प्रभाव दूर होते हैं, क्योंकि धूल मिट्टी शनि राहु से संबंधित होते हैं, इस नाते यदि आप खुद से घर के किसी भी हिस्से की सफाई करते हैं तो आप जीवन की ऐसी बहुत सारी समस्याओं से बचे रहते हैं जो शनि राहु की वजह से आती हैं। अगर आप खुद से सफाई के कार्य नहीं करते, तो आपके हर कार्य में बाधा शनि राहु की वजह से आती है, कंधे और कमर के रोग, जोड़ों के रोग परेशान करने लगते हैं, झगड़े में शत्रु पर विजय प्राप्ति में बाधा आती है। इस नाते आपको इन सब समस्याओं से बचने के लिए रोजाना घर के किसी भी हिस्से की सफाई खुद से ज़रूर करनी चाहिए।
शरीर की सफाई और धुले हुए वस्त्र : रोजाना नहाने के माध्यम से, नाखूनों की सफाई के माध्यम से, आपको शरीर की सफाई का ध्यान रखना चाहिए, धुले हुए वस्त्र धारण करने चाहिए। ज्योतिष अनुसार इस अच्छी आदत को जीवन में शामिल करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है। और शुक्र ग्रह ही आकर्षण, भौतिक सुख, स्त्री सुख, जीवनसाथी के सुख का कारक है। इसके विपरीत जो लोग शरीर की सफाई का ख्याल नहीं करते, योगा, व्यायाम नहीं करते, नाखूनों को गंदा रखते हैं, फटे हुए या गंदे वस्त्र धारण करते हैं, उनके लिए शुक्र ग्रह खराब फल देते हुए धन की कमी, स्त्री से विवाद, जीवनसाथी से सुख की कमी, वाहन सुख की कमी करता है। इस नाते यदि आप इस अच्छी आदत को जीवन में अपना कर शुक्र के शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं , जिस से आपका घरेलू जीवन बेहतर होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अगर किसी युवा को शीघ्रपतन एवं नपुंसकता आदि की समस्या है तो सबसे पहले पेट ठीक रखें मतलब अपनी पाचन शक्ति मजबूत रखें। पेट की कोई समस्या है तो पहले पेट के रोग का इलाज कराएं। भोजन करते समय अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं। भोजन करने के नियमों का पालन करें। भोजन करने के एक घंटे बाद ही पानी पीएं। भोजन भुख से थोड़ा सा कम खाएं। इससे भोजन ठीक से हजम होता है। सुबह शाम शौच करने अवश्य ही जाएं। इससे अपने आप पेट साफ होता है। भोजन हल्का, सुपाच्य व ताजा होना चाहिए।
इन सभी नियमों का पालन करते हुए भी पेट ठीक से साफ नहीं होता है तो आयुर्वेदिक दवा त्रिफला चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में गुनगुने पानी से सुबह शाम सेवन करें। इससे पेट साफ, कब्ज, गैस एवं बबासीर आदि दूर होते हैं। यह आयुर्वेद का पेट रोगों में बहुत अच्छा दवा है। इससे मुंह के छाले एवं जीभ के जलन भी दूर होते हैं। अपनी पाचन शक्ति के अनुसार कुछ पौष्टिक आहार भी सेवन करें। कभी कभी गुलकंद का सेवन भी करें।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
नपुंसकता से निपटने के लिए उपयुक्त आयुर्वेदिक उपचार क्या हैं?
अर्जुन चाल का सेवन सेहतमंद सिरेरों को बढ़ावा देता है, जिससे सेक्सुअल संबंधों में सुधार होता है।
अमला अमला में विटामिन सी की अधिक मात्रा होती है जो सेक्सुअल स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।
अब मैं आपको बताती हूँ की आपको इन जड़ी बूटियों का उपयोग कैसे करना है
रोजाना 1-2 ग्राम सफेद मूसली का पाउडर गर्म दूध के साथ सेवन करें।
अर्जुन चाल का काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।
रोजाना 300-500 मिलीग्राम शिलाजीत का पाउडर शहद या दूध के साथ सेवन करें।
रोजाना 1-2 ग्राम की मात्रा में शतावरी पाउडर गर्म दूध के साथ सेवन करें।
रोजाना एक मुख्या अखरोट सेवन करें।
रोजाना 1-2 ग्राम कौंच बीज का पाउडर शहद के साथ सेवन करें।
रोजाना 1-2 ग्राम की मात्रा में अश्वगंधा पाउडर गर्म दूध के साथ सेवन करें।
🌷 गुरु भक्ति योग_ 🌹
यह कथा द्वापर युग की है तथा इस कथा का संबंध जरासंध से भी है । मगध का राजा जरासंध अत्यन्त क्रूर था तथा उसके पास असंख्य सैनिक तथा विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे। उसकी सेना इतनी शक्तिशाली थी की वह पल भर में ही अनेको बड़े-बड़े सम्राज्यो को धरासायी कर सकती थी।इसलिए अधिकतर राजा जरासंध से डरे रहते थे तथा उसे अपना मित्र बनाये रखना चाहते थे ।
जरासंध की दो पुत्रिया थी जिनका नाम अस्ति और प्रस्ती था ।जरासंध ने अपनी दोनों पुत्रियों का विवाह मथुरा राज्य के राजा कंस से कर दिया। कंस एक अत्याचारी राजा था जिसके अत्याचार से उसकी प्रजा बहुत दुखी हो चुकी थी ।उसके अत्याचार से मथुरा के लोगो को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने कंश का वध कर दिया।अपने दामाद की मृत्यु से क्रोधित होकर जरासंध प्रतिशोध की ज्वाला में जलने लगा।
उसने अनेको बार मथुरा में आक्रमण किया परन्तु श्री कृष्ण के हाथो वह परास्त होता रहा और हर बार युद्ध के बाद श्री कृष्ण जरासंध को जीवित छोड़ देते।एक बार जरासंध ने कलिंगराज पौंड्रक और काशिराज के साथ मिलकर मथुरा पर आक्रमण करने की योजना बनाई । उन्होंने मिलकर मथुरा के राज्य पर आक्रमण कर दिया परन्तु भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें भी पराजित कर दिया।
जरासंध तो उस युद्ध से किसी तरह अपने प्राणो की रक्षा करते हुए भाग निकला लेकिन पौंड्रक और काशीराज भगवान श्री कृष्ण के हाथो मारे गए।काशीराज की मृत्यु के बाद उसका पुत्र काशीराज बना तथा उसने श्री कृष्ण से अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने की प्रतिज्ञा ली। काशीराज भगवान श्री कृष्ण के शक्तियों को जानता था अतः उसने अपनी कठिन तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनसे श्री कृष्ण को समाप्त करने का वर माँगा। भगवान शिव ने उससे कोई अन्य वर मांगने को कहा परन्तु वह अपने जिद पर अड़ा रहा ।
तब भगवान शिव ने अपने मंत्रो से एक भयंकर कृत्या काशीराज को बनाकर दी तथा उससे कहा की वत्स !इसका प्रहार किसी भी प्राणी का अंत कर सकता है, लेकिन कभी भी इस अस्त्र का प्रयोग किसी भी ब्राह्मण भक्त पर मत करना अन्यथा इसका प्रभाव निष्फल हो जायेगा। ऐसा कहकर भगवान शिव अंतर्ध्यान हो गए है ।
इधर दुष्ट,कालयवन का वध कर भगवान श्री कृष्ण ने सभी मथुरा वासियों के साथ मिलकर नई नगरी द्वारिका बसाई।काशीराज ने भगवान श्री कृष्ण से अपने पिता के मृत्यु का बदला लेने के लिए कृत्या को द्वारिका की और भेजा, परन्तु वह यह नहीं जनता था की श्री कृष्ण ब्राह्मण भक्त है इसलिए द्वारिका पहुंचकर भी कृत्या भगवान श्री कृष्ण का कुछ नहीं कर पाई उल्टा भगवान श्री कृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र उसकी और चला दिया। सुदर्शन चक्र भयंकर अग्नि लपेटे हुए कृत्या की ओर झपटा था कृत्या अपने प्राणो की रक्षा के लिए काशी की ओर भागी
कृत्या के पीछे-पीछे सुदर्शन चक्र भी काशी नगरी आ पहुंचा तथा उसने कृत्या को भस्म कर दिया ।परन्तु जब इसके बाद भी सुदर्शन का क्रोध शांत नहीं हुआ तो उसने पूरी काशी को अपनी अग्नि से भस्म कर डाला ।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।



