25 जून 2024 : को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी, मुहूर्त, पूजा विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 25 जून 2024 : को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी, नोट करें मुहूर्त, पूजा विधि
⭕ HIGHLIGHTS
🔅 यह पर्व हर वर्ष आषाढ़ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
🔅 इस दिन देवों के देव महादेव के पुत्र भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
🔅 भगवान गणेश की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
🔅 कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाएं क्या नहीं
इस सालआषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। जूनमहीने की इसचतुर्थी को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाएगा। माताएं इस व्रत को संतान की प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इस दिन गणेश भगवान और चंद्र देवकी पूजा-उपासना की जाती है।आइए जानते हैं कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी पूजा का मुहूर्त, विधि, …….
⚛️ क्या है शुभ मुहूर्त
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 25 जून को रात 01 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 25 जून को ही रात 11 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि से तिथि से गणना की जाती है। इसी कारण 25 जून को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान गणेश के निमित्त व्रत रख भगवान की पूजा-उपासना कर सकते हैं। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को चंद्र दर्शन का शुभ समय 10 बजकर 27 मिनट पर है।
🌙 संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 10.27 बजे के बाद ही होगा। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र अर्घ्य के बिना पूरा नहीं माना जाता है।
❄️ शिववास योग
कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी पर शिववास योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन देवों के देव महादेव देर रात 11 बजकर 10 मिनट तक कैलाश पर विराजमान रहेंगे। इसके बाद भगवान शिव नंदी पर विराजमान रहेंगे। भगवान शिव के कैलाश और नंदी पर आरूढ़ रहने के दौरान शिवजी की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस समय में भगवान शिव का अभिषेक करने से साधक को सभी प्रकार के सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।
⚛️ पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। अब एक चौकी पर लाल लपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान करें। उन्हें दूर्वा घास और तिलक अर्पित करें। इसके बाद देशी घी का दीपक जलाएं और आरती करें। मंत्रों का जप और गणेश चालीसा का पाठ करें। गणेश जी को मोदक, फल और मिठाई का भोग लगाएं। इससे जीवन में सुख-शांति आती है। अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें और श्रद्धा अनुसार विशेष चीजों का दान करें।
💁🏻 कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी का महत्व
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार प्रत्येक माह में 2 बार चतुर्थी तिथि आती है। कृष्णपक्ष की चतुर्थी संकष्टी और शुक्लपक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत संकटो से मुक्ति पाने के लिए रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश की पूजा उपासना करने का विधान है। कृष्णपक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिंगल चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। धर्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा-उपासना करने से समस्त सुखो की प्राप्ति होती है। घर मे सुख समृद्धि और खुशहाली आती है। और समस्त कार्यो में सिद्धि प्राप्त होती है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक के आय, सुख और सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है। साथ ही सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
🐁 कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत उपाय
अब संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए इन खास उपाय को जरूर करना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी को सिंदूर से तिलक करके लाल पुष्प अर्पित करें।
इसके बाद भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठ अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान गणेश आपकी सभी मनोकामना पूरी करेगे।
धन लाभ में बढ़ोत्तरी होने के लिए गणेश चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश की पूजा करने के बाद भगवान गणेश जी को गुड़ और घी का भोग लगाएं।
इसके बाद लगाए गए उस भोग को गाय को खिलाने से धनलाभ होता है। ऐसी मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन भगवान चन्द्रमा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
इसके बाद रात्रि में चंद्रोदय होने के बाद चन्द्रमा को शुद्ध जल में गाय का दूध, अक्षत और फूल डालकर ॐ सोम सोमाय नमः मंत्र का जाप करते हुए। अर्घ देना शुभ माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि अगर शादी में बार-बार अड़चने आती रहती है। तो कृष्णपिंगल चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश जी को मालपुए का भोग लगाने से विवाह के शुभ योग बनने लगते है।
☝🏼 संकष्टी चतुर्थी क्या खाएं क्या नही
आप को बतादे की आषाढ़ मास की कृष्णपक्ष के चतुर्थी तिथि व्रत के दिन क्या खाना चाहिए और क्या नही खाना चाहिए।
संकष्टी चतुर्थी के दिन मांस, मछली, मदिरा पान, आदि का सेवन भूलकर भी नही करना चाहिए। यदि आप ऐसा करते है तो इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नही होगा।
संकष्टी चतुर्थी व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत रखा जाता है तो कही-कही जगहों पर संकष्टी चतुर्थी के दिन केवल दिन में एक बार मौसमी फलाहार का सेवन किया जाता।
संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन अन्न से बना कोई भी भोजन नही करना चाहिए। और नाही खाने में सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए।
ऐसी मान्यता है कि आज के दिन दूध और शकरकन्द खाकर व्रत खोला जाता है। अगर सम्भव हो सके तो व्रत के दौरान कुछ भी सेवन ना करे।
🤷🏻 संकष्टी चतुर्थी महत्व
ऐसा माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा करते समय सच्चे मन से गणेश चालीसा का पाठ किया जाए, तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


