धार्मिक

भगवती की पूजन से शुभकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं : पुराण मनीषी

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । श्रीराम बाबा महाराज के पुण्य स्मरण में चल रही है श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के सप्तम दिवस कथा का श्रवण करने के लिए नगर पालिका अध्यक्ष संदीप लोधी, उपाध्यक्ष सुदर्शन घोषी, हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष संतोष राय, महामंत्री महेश नेमा, पार्षद गुलाब रजक, प्रवीण जैन आदि पहुंचे और कथा श्रवण उपरांत व्यास पीठ की आरती की।
इस अवसर पर पुरान मनीषी पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री महाराज ने कहा कात्यायनी शक्तिपीठ का विवेचनात्मक वर्णन देवी भागवत सहित कई अन्य ग्रन्थों में भी है। मान्यता है कि इस मन्दिर क्षेत्र में देवी सती के केश गिरे थे। नवरात्रि के छठे दिन इस मन्दिर में दर्शन करने का विशेष महत्व है। कात्यायनी मन्दिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। द्वापर युग की कई कथाएँ इस मन्दिर से भी जुड़ी हैं। श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने माँ कात्यायनी की ही पूजा कालिन्दी यमुना के तट पर की थी। ये ब्रजमण्डल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। माँ कात्यायनी की पूजा पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में जब योगेश्वर श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था, उस समय गोकुल, वृन्दावन की गोपियाँ श्रीकृष्ण को पति रूप में पाना चाहती थीं। गोपियों ने अपनी इच्छा पूरी करने के लिए देवी कात्यायनी मन्दिर में विशेष पूजा की थी। माना जाता है कि गोपियों की पूजा से देवी प्रसन्न हुई थीं और उन्होंने मनोकामना पूर्ण होने का वर भी दिया था। इसके कुछ समय बाद एक दिन ब्रह्मा जी ने श्रीकृष्ण की परीक्षा लेने के लिए गोकुल-वृन्दावन के सभी ग्वालों का हरण कर लिया और उन्हें अपने ब्रह्मलोक ले गए। श्रीकृष्ण ब्रह्मा जी की योजना समझ गए थे। जब तक सभी ग्वाले ब्रह्मलोक से वापस गोकुल-वृन्दावन नहीं आए, तब तक श्रीकृष्ण ग्वालों का रूप धारण करके सभी गोपियों के पति के रूप में उनके साथ रहे थे। इस तरह देवी कात्यायनी ने गोपियों को जो वरदान दिया था, वह पूर्ण हो गया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने ब्रह्मा जी का अहंकार दूर किया और सभी ग्वालों को ब्रह्मलोक से गोकुल-वृन्दावन ले आए थे। कथा श्रवण करने के लिए प्रतिदिन काफी संख्या में महिला पुरुष पहुंच रहे हैं।

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