कृषिमध्य प्रदेश

उपार्जन केंद्रों में लगा धान का अंबार, परिवहन न होने से हो परेशानी

बारिश से बड़े नुकसान की आशंका
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । शासन द्वारा किसानों से धान की खरीद की जा रही है और उपार्जन केंद्रों पर बड़ी मात्रा में धान जमा है। किन्तु परिवहन कार्य में विभाग द्वारा ढिलाई बरती जा रही है, जिसके चलते समय से धान का उठाव नहीं हो पा रहा है। इससे उपार्जन केंद्रों में स्थान की कमी होने से किसानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं ढीमरखेड़ा क्षेत्र में शनिवार को सुबह से हो बारिश के कारण उपार्जन केंद्रों में रखी धान भीग गई ।
ढीमरखेड़ा तहसील में 15 उपार्जन केंद्र बनाये गए हैं । ढीमरखेड़ा, पौड़ी कला बी, झिन्ना पिपरिया, खमतरा, कटरिया, मुरवारी, दशरमन, कछार गाँव बड़ा, सिलौड़ी, कचनारी, खाम्हा, उमरियापान, देवरी मंगेला,टोला आदि उपार्जन केंद्रों में भारी मात्रा में किसानों से खरीदी गई धान जमा है। अनुमानित हजारों किवंटल धान यहां स्टाक में रखी हुई है। जिससे पूरा प्रांगण भर चुका है अन्य किसानों से धान खरीदी करने में केंद्र संचालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समय से केंद्र से धान का उठाव नहीं होने से समस्या हो रही है, वहीं विभाग परिवहन को लेकर गंभीर नहीं है और परिवहनकर्ता ठेकेदार मनमानी कर रहे है।
शनिवार सुबह से तेज बारिश के कारण उपार्जन केंद्रों में रखी किसानों की धान भीग गई । वहीं आगामी तीन दिनों तक प्रदेश भर में वर्षा का अनुमान मौसम विभाग द्वारा बताया जा रहा है। बावजूद जिले में नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। ढीमरखेड़ा तहसील के उपार्जन केंद्र खुले मैदानों और जमीन पर धान का संग्रहण किया गया है जहां बारिश होने से जमीन में बरसात के पानी से इसे बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है । शासन के द्वारा करोड़ों रुपयों की धान खरीदी जा रही है जिसको समय से परिवहन कर के ही सुरक्षित किया जा सकता है । परिवहन कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा हैं! केंद्रों से धान का समय से उठाव नहीं हो रहा है ।
मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट को ध्यान में रखते हुए जिले के केंद्रों पर रखी धान को समय से उठाव करवा कर गोदाम और कैब तक पहुंचाया जाना जरूरी है। बताया गया कि मिलर से अनुबंध में देरी का कारण भी माना जा रहा है और बताया गया कि खरीदी शुरू हुए महीने भर होने वाले है लेकिन अब तक किसी राइस मिल में धान का न पहुँचना भी धीमे परिवहन का कारण माना जा रहा है। कारण कोई भी हो प्रशासन इस ओर भी ध्यान दे अगर मौसम का मिजाज यही रहा तो करोड़ो की धान को बर्बाद होने में देर न लगेगी इसलिए परिवहन ठेकेदार पर प्रशासन दबाव बनाये और धान को वेयर हाउस में सुरक्षित रखवाये जिससे अन्न के साथ साथ अन्नदाता भी सुरक्षित रहे।

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