धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 29 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 29 मार्च 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌑 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शनिवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 04:27 PM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 07:26 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं। और राशि के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 10:03 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
प्रथम करण : नाग – 04:27 पी एम तक
द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – 02:39 ए एम, मार्च 30 तक बव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:55:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:05:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:42 ए एम से 05:28 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:05 ए एम से 06:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:01 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:36 पी एम से 06:59 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:37 पी एम से 07:47 पी एम
💧 अमृत काल : 03:11 पी एम से 04:36 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, मार्च 30 से 12:49 ए एम, मार्च 30
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनिदेव का तिल के तेल से अभिषेक कर उड़द के बड़े का भोग अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देविपितृकार्ये शनैश्चरी अमावस्या/मूल प्रारंभ/चान्द्र संवत्सर 2081 पूर्ण/ दर्श अमावस्या/ खंडग्रास सूर्यग्रहण (यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इस कारण ग्रहण के नियमों का पालन आवश्यक नहीं है)/ अमावस्या समाप्ति शाम 04.28/ पंचक जारी/ गांधीवादी विचारक भवानी प्रसाद मिश्र जन्म दिवस, श्याम सुंदर कलानी दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘रामायण’ में सुग्रीव की भूमिका निभाने वाले कलाकार स्मृति दिवस, आर्य समाज स्थापना दिवस (1875), राष्ट्रीय वियतनाम युद्ध दिग्गज दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मरमेड दिवस, और गुड फ़्राइडे, राष्ट्रीय नींबू शिफॉन केक दिवस, राष्ट्रीय नेवादा दिवस, महान सम्राट अशोक जयन्ती, भारतीय फिल्म अभिनेता उत्पल दत्त जन्म दिवस, राष्ट्रीय शिप परिवहन दिवस, भारतीय क्रिकेटर जयसिंहराव मानसिंहराव घोरपड़े स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू औरत कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🛬 Vastu tips 🛫
यदि आप घर में फिश एक्वेरियम रखते हैं। तो इसे वास्तु के अनुसार पूर्व, उत्तर या पूर्व उत्तर दिशा में रखें। माना जाता है कि मछलियां जहां होती हैं वहां सकारात्मक ऊर्जा के प्रवह को बढ़ाती हैं। फिश एक्वेरियम को रखने से पहले दिशा का चयन अवश्य कर लें नहीं तो इसका लाभ नहीं मिलेगा।
मछली पालने से नहीं रहती धन की कमी मछली को जल की रानी तो कहा ही गया है। इसी के साथ वास्तु के नजरिये से भी इसे घर में पालना बेहद शुभ माना गया है। जिस घर में लोग एक्वेरियम में मछलियां पालते हैं उस घर में धन की कमी नहीं रहती। माना जाता है कि मछली पालने, उनकी सेवा करने और उनको दाना डालने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। क्योंकि भगवान विष्णु का पहला अवतार मत्स्य का ही था।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
वजन घटाने में सहायता अमरूद जटिल स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोककर वजन घटाने में सहायता करता है। इससे शरीर में संचित कार्ब्स को शर्करा में परिवर्तित किया जाता है और जो वजन घटाने में सहायता करता है l
घटाए ब्लड ग्लूकोज़ लेवल जापान में किये गए अध्ययन के अनुसार, अमरूद की पत्ती की चाय डायबिटीज के रोगियों में अल्फा-ग्लूकोसिडेज एंजाइम गतिविधि को कम कर ब्लड ग्लूकोज़ लेवल कम करने में मदत करती है।
इसके अलावा, यह शरीर द्वारा सुक्रोज और माल्टोज़ के अवशोषण को रोकता है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर कम होता है।
12 सप्ताह के लिए अमरूद के पत्ते की चाय पीने से इंसुलिन उत्पादन में वृद्धि के बिना रक्त शर्करा का स्तर कम हो जाता है।
कोलेस्ट्रॉल कम करे अनुसंधान ने साबित किया है कि 3 महीने तक अमरूद की पत्तीवाली चाय पीने से एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा में कमी आती है और इसका अच्छे कोलेस्ट्रॉल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, अमरूद की पत्तियां एक बढ़िया यकृत टॉनिक हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
जिसके श्रवनमात्र से घोर विपत्तियाँ स्वयं भाग जाती हैं! जो इन भगवती दुर्गा की उपासना नहीं करता हो, ऐसा तो इस जगत में हो ही नहीं सकता, क्योंकि वे सब की उपासना, सबकी जननी, शैवी एवं शक्ति देवी बड़ी ही अद्भुत हैं! ये भगवती दुर्गा सबकी बुद्धि की अधिदेवी हैं, अंतर्यामीरूप से सब के भीतर इनका वास रहता है! घोर संकट से रक्षा करने के कारण जगत में ये दुर्गा नाम से प्रसिद्द हैं! शैव और वैष्णव पुरुषों द्वारा निरंतर इनकी उपासना होती है! इन मूलप्रकृति श्री दुर्गा देवी के सत्प्रयास से जगत की सृष्टि, स्थिति और संहार होते हैं! अब इनके उत्तम नवाक्षर मन्त्र का वर्णन करता हूँ!सरस्वती बीज { ऐं}भुवनेश्वरी बीज { ह्रीं }और कामबीज {क्लीं}—इन तीनों बीजों का आड़ू में क्रमश: प्रयोग करके ” चामुंडायै” इस पद को लगाकर, फिर “विच्चे” यह दो अक्षर जोड़ देना चाहिये,
{ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे} यही मनुप्रोक्त नवाक्षर मन्त्र है! उपासकों के लिये यह कल्पवृक्ष के समान है! इस नवार्ण मन्त्र के ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र–ये तीन ऋषि कहे जाते हैं! महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती देवता हैं तथा रक्तदंतिका, दुर्गा एवं भ्रामरी बीज हैं! नंदा, शाकम्भरी और भीमा शक्तियां कही गयी हैं! धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिये इस मन्त्र का प्रयोग किया हाता है! ऐं ह्रीं क्लीं —तीन बीज मन्त्र, चामुंडायै ये वहार अक्षर तथा विच्चे में दो अक्षर–ये मन्त्र के अंग हैं! प्रतेयक के साथ नम:, स्वाहा, वषट, हुम, वौषट और फट –ये छ: जातीसंज्ञक वर्ण लगाकर शिखा, दोनों नेत्र, दोनों कान, नासिका, मुख और गुदा आदि स्थानों में इस मन्त्र के वर्णों का न्यास करना चाहिये!ध्यान —–इस प्रकार है———
महाकाली जी का ध्यान —–तीन नेत्रों से शोभा पाने वाली भगवती महाकाली की मैं उपासना करता हूँ! वे अपने हाथों में खडग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिध, शूल, भुशुण्डी, मस्तक और शंख धारण कराती हैं! वे समस्त अंगों में दिव्य आभूषणों से विभूषित हैं! उनके शरीर की कान्तिनीलमणि के समान है!तथा वे दस मुख और दस पैरों से युक्त हैं! कमलासन ब्रह्मा जी ने मधु-कैटभ का वध करने के लिये इन महाकाली की उपासना की थी! इस प्रकार काम बीज स्वरूपिणी भगवती महाकाली का ध्यान करना चाहिये!
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।

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