नदियां का जल, जन जीवन के लिए अमूल्य वरदान है, नदियो को नहर नही उपयोगी बनाये

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । नदियो का हम अभी नहर के रुप मे ही उपयोग करते आ रहे है हमने वर्षा जल को हमेशा नदियो के माध्यम से समुद्र मे व्यर्थ बहाया है और बहाते आ रहे है इस तरह की प्रक्रिया से हमे क्या हासिल हुआ। वेशकीमती वर्षा जल हमे ईश्वर हर साल प्रदान करता है जिसे हम संजो नही पा रहे है नही सटीक उपयोग कर पा रहे है। बरसात मे बाढ के नाम पर तो गर्मियो मे सूखा के नाम पर आंसु बहा लेते है ऐसा कब तक चलेगा यदि नदियो पर जगह जगह बांध बना दिये जावे तो संचित पानी का उपयोग हम सिचाई निस्तार मे तो करेगे ही साथ ही इसे हम परिवहन के रुप मे उपयोग कर सकते है नदियो के किनारे बसे गांव से गांव जोडने के लिये यात्रियो के लिए नौकायन वोट आदि जल वाहन चलने से यात्रियो को शार्टकट व कम खर्चीली यात्रा मे सुविधा होगी लोगो को रोजगार मिलेगे जमीन का भूमिगत जल स्तर बढेगा पशु पक्षियो को पीने का पानी मिलने लगेगा वन्य प्राणियो को नदियो के कलकल बहने से उन्हे जंगल मे ही पीने का पानी उपलबध होने से वह शहरो की तरफ नही भागेगे उनके पलायन व बेमौत मरने से रोका जा सकता है जल ही जीवन है इस शब्दवाक्य को नदियो के पानी को नदियो मे ही जल संचय कर अभियान को सफल सुफल बनाया जा सकता है।



