सागौन की जगह पलाश ने पाग सम्हाली, बहुतायत मे दिखने लगे पेड

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर। वन परिक्षेत्र गौरझामर के अन्तर्गत लगभग सभी सीटो मे सागौन पेडो की भरमार रही हैं कालांतर मे इनकी संख्या मे आशातीत अंतर आने लगा जो बेहद चिंता का विषय है इसका एक कारण यह भी है कि जिस सागौन के जंगल से सागौन विलुप्त होने लगता है वहां पर अन्य सतकढा प्रजाति के पेड उगना प्रारम्भ हो जाते है इसका ताजा उदाहरण सिमरिया नीम घाटी, गोपालपुरा, सालावारा आदि वीटो मे स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है यहां के जंगल सागौन विहीन होने की कगार पर है यहां के जंगल मे सागौन कम अब टेसु पलास छेवला एक ही नाम के यह पेड इन वीटे मे सर्वाधिक देखे जा रहे है। राष्ट्रीय राजमार्ग 44 फोरलाइन पर अवस्थित होने के कारण बेहद संवेदनशील है जहां वन माफिया सबसे ज्यादा सक्रिय है इमारती लकडी चोरो ने इन वीटो मे ऐसी तबाही मचाई है की इन वीटो मे एक भी पेड ऐसा नही बचा जो इमारती लकडी की लाज बचा कर रख सके शेष बचे सागौन के पेड टेडे मढे बचे है जो सागौन के अस्तित्व को बचाने के लिये काफी है। वन विभाग ने जिस प्रकार से फर्नीचर के लाइसेंस रेवडी की तरह बांटे है उससे सागौन का बचा खुचा नाम भी जल्दी मिटने वाला है क्यो की इन फर्नीचर मार्टो मे एक नम्बर की कम दो नम्बर की लकडी सबसे ज्यादा खपत हो रही है इसमे वन विनाश की कुम्भकर्णी निद्रा समझ से परे है एक समय ऐसा था की लकडी चोरो के पकडे गये वाहनो से गौरझामर वन परिक्षेत्र का परिसर भरा पडा रहता था लोगो का कहना है की वन विभाग सागौन चोरो को पकडने की बजाय सतकठा प्रजाति की जलाऊ लकडी पकडने मे अपनी शान व वाहवाही समझते है। जबकि जंगल कटाई का सिलसिला अब आरा कुल्हाडियो से नही बल्कि नई तकनीक के इलैक्टिक आरे से की जा रही है। जो मिनटो मे पेड को तहस नहस कर टैक्टर टाली टृक मिनी टृक फोरव्हिलर तक पहुंचाने मे मदद करता है सडक मार्गो के खुल जाने से सागौन का अवैध रुप से परिवहन सागर जिले के साथ साथ अन्य सीमावर्ती जिलो मे भी धडल्ले से हो रहा है। कढाई से रोकथाम नही होने से आगामी यक्ष प्रश्न वन विभाग से पूछे जायेगे क्योकि जिस तेेजी से वनो का विनाश हो रहा है उसका जबाबदार व कर्ताधर्ता वनविभाग ही है। अगले वर्षो मे अवर्षा, अल्पवर्षा, सूखा जैसी भयावह स्थिति से बिगडने वाले पर्यावरण के आरोप वन विभाग पर ही लगेगे यदि वनो का वैभव बचा कर रखना है तो अभी थोडा समय बचा है यदि इसेे समय रहते नही बचाया तो फिर सांस लेने के लिए आक्सीजन के सिलेण्डर तो है ही।



