कृष्ण रुक्मणि विवाह का प्रसंग सुन भक्त हुए मंत्रमुग्ध

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । स्लीमनाबाद समीपस्थ ग्राम भेड़ा में श्रीमद भागवत कथा रूपी अमृतमई गंगा प्रवाहित हो रही है। आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास रमाकांत त्रिपाठी जी ने उधव चरित्र, महारासलीला व रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया । कथा व्यास ने कथा के दौरान कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं। उन सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित था। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया । माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को हरण कर द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया उपस्थित भक्त श्रद्धालु जन ने माता रुक्मणि एवं भगवान श्री कृष्ण के पैर पखार मौके पर आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया। कथा में इस दौरान ललित मिश्रा, हरि मिश्रा, मनोज मिश्रा, दीपक मिश्रा, संदीप मिश्रा, बालमुकुंद दुबे, पार्थ दुबे, विनोद दुबे, मुकेश विश्वकर्मा, शेखर अग्रहरी, मदन सिंग, प्रमोद विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में भक्त श्रद्धालु जन मौजूद रहे।


