मध्य प्रदेशहेल्थ

मुरवारी उप स्वास्थ्य केंद्र बदहाल, न डॉक्टर न स्टाफ

करोड़ों की लागत से बना भवन भी जर्जर हालत में
ग्रामीणों ने कलेक्टर से की ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम मुरवारी में नव-निर्मित शासकीय उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। करीब एक करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस भवन का उद्देश्य ग्रामीणों को नजदीक में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। यहां न तो डॉक्टर मौजूद हैं, न नर्स और न ही कंपाउंडर। स्वास्थ्य कर्मियों के अभाव में मरीजों को इलाज के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जब उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और स्टाफ की व्यवस्था ही नहीं है, तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता । इस तरह करोड़ों रुपये खर्च कर भवन खड़ा कर देना और फिर उसे उपयोग में न लाना, सीधा-सीधा सरकारी धन का दुरुपयोग है।
स्थिति केवल स्टाफ की कमी तक सीमित नहीं है, भवन की हालत भी बेहद खराब हो चुकी है। दीवारों में जगह-जगह चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और छत से पानी टपकने के कारण बरसात के दिनों में अंदर पानी भर जाता है। इससे न केवल भवन की उम्र घट रही है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय ग्रामीण सुरेश बर्मन, आशीष काछी, संदीप पटेल, संतोष पटेल, रामकुमार काछी, विक्की कोल, अर्जुन बर्मन सहित अन्य लोगों ने कलेक्टर कटनी से तत्काल जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि दोषी ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, नर्स व अन्य चिकित्सा स्टाफ की शीघ्र नियुक्ति की जाए।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में प्रधानमंत्री के ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को पूरा करना चाहती है, तो उसे केवल भवन निर्माण तक सीमित न रहकर, वहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करनी होंगी । मुरवारी जैसे गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों की यह दुर्दशा न केवल सरकारी तंत्र की लापरवाही दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि योजनाएं जमीनी हकीकत में क्यों असफल हो रही हैं।

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