दो दशक से अधिक पुरानी उम्रदराज यात्री बसे यात्रियो को सिरदर्द बनी
रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर। सडको पर इन दिनो ऐसी यात्री बसे भी दौडती हुई दिखाई दे रही है जिनने सडक पर चलने की पात्रता ही खो दी है। ऐसी अपात्र व खटारा बसे यात्रियो को सिरदर्द बनी हुई है पक्की सपाट सडक सुविधाओ के बाबजूद यत्रियो को यदि खटारा बसो मे सफर करना पडे तो यह बेहद सोचनीय बात है। यात्रियो का कहना है की वह आरामदेह व नई बस मे सफर करने के लिये ही किराया देकर यात्रा करते है उन्हें नही पता होता की जिस बस में वह यात्रा कर रहे है वह एक दो साल नही बल्कि दो दशक पुरानी बस मे बैठे हुए है जो खटारा होने के साथ साथ एक्सपायर हो चुकी है ऐसी जानलेवा अविश्वसनीय बसे अब सडको पर फर्राटे भरकर यात्रियो को पूरी सुखद व भरोसेमंद यात्रा नही करा पाती है। देखा जाता है की ऐसी बसे भले ही रंगरोगन के कारण नई दिखाई देती हो लेकिन जब यात्रियो को उनके गंतव्य स्थान तक सही सलामत छोडने की बारी आती है तो वह अपनी असलियत दिखाने लगती है ऐसी बसो की स्थिति अक्सर बीच रास्ते में ही समझ मे आ जाती है। जब वह बार बार पंचर होने लगती है ब्रेक फैल होने गियर खराब होने एक्सल कमानी टूटने, इंजन मे खराबी , बस की बाडी क्षतिग्रस्त होने खिडकियो के शीशे नही होने तथा कंडम सीटे बसो की कर्कश आवाज खटखट कानफोडू शोर से यात्रियो का बस मे चैन से बैठना तक मुश्किल होता है। खटारा बसे लोगो का विश्वास पूरी तरह खो चुकी होती है इनमे यात्री भगवान भरोसे ही सफर करता है। आरटीओ का ध्यान बार बार आकर्षित कराने के बाद भी इस ओर कारगर कार्रवाई नही करने से ऐसा प्रतीत होता है की वह किसी बडे हादसे का इंतजार कर रहे है । उच्च अधिकारी इस ओर ध्यान दे।



