बेटियों के सम्मान को दीपक बनाकर विश्व के लिए प्रकाश पुंज बने आचार्य सोनी

शिक्षक दिवस पर विशेष
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । शिक्षा केवल परीक्षाओं और किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कार, मूल्य और इंसानियत का पाठ भी सिखाती है। शिक्षा का असली अर्थ वही जो समाज में सकारात्मक व प्रभावी परिवर्तन ला सके। प्रस्तुत है… शैक्षिक जगत में इतिहास रचने वाले एक आदर्श शिक्षक की कहानी………
शिक्षा और संस्कार के दीप स्तंभ आचार्य डॉ. राजा भैया सोनी का जीवन एक आदर्श नवाचारी शिक्षक के कर्तव्य निष्ठा और समाज सेवा का अनूठा उदाहरण है जिन्होंने साधारण परिवेश में ग्राम भुड़सा, बड़वारा , जिला कटनी मध्य प्रदेश में जन्म लेकर अकल्पनीय ,असाधारण कार्य करके शिक्षा जगत और विश्व में एक अलग अमिट, अविस्मरणीय, सर्वश्रेष्ठ पहचान बनाई।
शिक्षक राजा भैया सोनी का बचपन सादगी, धार्मिकता , नैतिकता और मातृशक्तियों का सम्मान करने के साथ जीवन में कुछ अलग हटकर कार्य करने की पवित्र सोच, संकल्प,
हठयोग, सुकर्म यात्रा से प्रारंभ हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने वाली शाला भुड़सा में ही प्रथम शिक्षक बनने का गौरव प्राप्त हुआ। आगामी सेवाएं प्राथमिक शाला ठगुवा, लुहरवारा के बाद महगवां में दे रहे हैं। आप प्रतिदिन शाला में प्रार्थना के समय अध्यनरत समस्त कन्याओं के पैर गंगाजल से धोकर चरणामृत पान करने के बाद विधिवत कन्या पूजन उपरांत ही अपने अध्यापन कार्य का शुभारंभ करने का कार्य विगत तीन दशकों से अधिक समय से कर रहे हैं। ततसमय शाला में बेटियों के सम्मान की खबर से क्षेत्र की दर्जनों से अधिक बसाहटों के बच्चों ने आपकी शाला में प्रवेश लिया और नामांकन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई । शैक्षिक व गुणात्मक, नवाचारी शिक्षा के कारण दर्जनों से अधिक बच्चों का जवाहर नवोदय विद्यालय में चयन और प्रवेश हुआ है । आपके द्वारा शिक्षा के अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण, अस्पृश्यता निवारण , महिला सशक्तिकरण, आरोग्य व आध्यात्मिक शिक्षा, संस्कृति संरक्षण, पवित्र देवस्थानों का जीर्णोद्धार, दहेज व भ्रष्टाचार मुक्त भारत, स्वच्छता तथा राष्ट्रीय साक्षरता के महत्व के कार्यों के हेतु जागरूकता तथा मानव सेवा से संबंधित अनेक सामाजिक कार्य लगातार किये जा रहे हैं। बेटियों के आजीवन सम्मान करने के शुभ संकल्प को आपने नमामि जननी सुकर्म यात्रा नाम दिया है, जिसे विभिन्न माध्यमों से संपूर्ण भारतवर्ष में प्रचारित थी कराया जा रहा है। विभिन्न समाचार पत्र, न्यूज़ चैनल, सोशल मीडिया ने भी बेटियों के सम्मान के इस समाचार को आगे बढ़ाया है। शिक्षक द्वारा नमामि जननि कार्य को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटियों का सम्मान करो की महत्वाकांक्षी योजना के साथ जोड़ा गया है। शिक्षक के इस कार्य से मध्य प्रदेश शासन ने प्रेरणा लेकर हर शासकीय कार्यक्रम की शुरुआत बेटियों के सम्मान से करने का निर्णय लिया है। शिक्षक के इस काम को इंडिया बुक, एशिया बुक, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड तथा विश्व के एकल, अमिट, सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड के रूप में भारत के नाम दर्ज कराया गया है। शिक्षक के कार्य प्रणाली को स्थानिक प्रशासन, जिला प्रशासन राज्य शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अनेक बार सम्मानित किया गया है। भारत सरकार नीति आयोग द्वारा पंजीकृत अनेक संस्थाओं ने शिक्षक को राष्ट्रीय रत्न, भारतीय रत्न, शिक्षा रत्न, विश्व रत्न, भारत गौरव रत्न, शिक्षाविद , शिक्षा शिरोमणि, युग पुरुष, महापुरुष तथा अनेक पुरस्कारों उपाधियों से सम्मानित किया है। आपको अन्तर्राष्ट्रीय प्रेरक के रूप में भी नामांकित किया गया है। आचार्य श्री द्वारा आज शिक्षक दिवस के अवसर पर संपूर्ण भारत में नमामि जननि सुकर्म यात्रा के माध्यम से बेटियों के सम्मान को शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए सत्याग्रह करने का कार्य प्रारंभ किया गया है। शासन, प्रशासन, मंत्री, विधायक, समाज सेवकों वरिष्ठ नागरिकों, सांसद तथा माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन के माध्यम से सत्याग्रह करके इसे नैतिक शिक्षा में अनिवार्यता शामिल करने का अनुरोध किया जाएगा। आचार्य सोनी की इस जीवन यात्रा से हमें यह है शिक्षा मिलती है कि शिक्षक केवल अध्यापन कार्य करने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि समाज मानवता और भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन के साथ युक्त प्रवर्तक और प्रलय व निर्माण का जन्मदाता भी है। भारत के इस युगप्रवर्तक, राष्ट्र निर्माता को शिक्षक दिवस पर कृतज्ञ राष्ट्र नमन करता है।



