
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• *_जय श्री हरि_* •••✦
🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾
*मंगलवार 26 मई 2026_
*हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *_दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।*_मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।*_मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*☸️ *_काली सम्वत् 5127_*🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*☣️ *_आयन – उत्तरायण_*☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*☀️ *_मास – अधिक ज्यैष्ठ मास_*🌖 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष_*📆 *_तिथि – मंगलवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि है_*📝 *_तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।_*💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र हस्त पूर्ण रात्रि_*🪐 *_नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं। तथा राशि के स्वामी बुध है। हस्त नक्षत्र के देवता सवितार (सूर्य के समान रूप वाले) हैं।_*⚜️ *_योग – सिद्धि योग 03:10 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग_*⚡ *_प्रथम करण – वणिज 05:43 PM तक_*✨ *_द्वितीय करण – विष्टि पूर्ण रात्रि_*🔥 *_गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।_*🤖 *_राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।_*⚜️ *_दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।_*🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:24:30_*🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:11:23_*👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:03 ए एम से 04:44 ए एम_*🌇 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:24 ए एम से 05:25 ए एम_*🌟 *_अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:51 ए एम से 12:46 पी एम_*✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:36 पी एम से 03:31 पी एम_*🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : सायं काल 07:10 पी एम से 07:30 पी एम_*🌃 *_सायाह्न सन्ध्या : प्रातः काल 07:11 पी एम से 08:13 पी एम_*💧 *_अमृत काल : रात्रि काल 11:29 पी एम से 01:13 ए एम, मई 27_*🗣️ *_निशिता मुहूर्त : सुबह 11:58 पी एम से 12:39 ए एम, मई 27_*❄️ *_रवि योग : पूरे दिन_*🚓 *_यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।_*👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।_*💁🏻♀️ *_आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।_*🌴 *_वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – ज्यैष्ठ अधिक मांस पद्मिनी एकादशी (सर्वे स्मार्त)/ पुरुषोत्तम मास का 11वाँ दिन/ भद्रा/ रवि योग/ विडाल योग/ ईद अल-अधा (बकरीद)/ प्रसिद्ध मूर्तिकार रामकिंकर बैज जन्म दिवस, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय जन्म दिवस, भारत के दिग्गज (ओलिंपिक पदक विजेता) सुशील कुमार जन्म दिवस, भारतीय राजनितिज्ञ सरताज सिंह जन्म दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ विलासराव देशमुख जन्म दिवस, राष्ट्रीय ब्लूबेरी चीज़केक दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी छगनराज चौपासनी वाला जयन्ती, राष्ट्रीय धातु दिवस, राष्ट्रीय क्षमा दिवस (National Sorry Day✍🏼 *_तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।। 🧹 *_Vastu tips_* 🏕️इस दिशा में भूलकर भी न रखें झाड़ू: वास्तु शास्त्र के मुताबिक झाड़ू को कभी भी उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में नहीं रखना चाहिए। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा और धन से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिशा में झाड़ू रखने से घर में आर्थिक तंगी और दरिद्रता बढ़ सकती है। झाड़ू को हमेशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है।*_झाड़ू लगाने का सही समय: वास्तु अनुसार, सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाना उचित नहीं माना जाता। कहा जाता है कि शाम या रात में झाड़ू लगाने से घर की बरकत कम होती है। सुबह के समय झाड़ू लगाना सबसे शुभ माना गया है। अगर किसी कारण शाम में सफाई करनी पड़े तो कचरा तुरंत घर से बाहर नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि उसे एक जगह इकट्ठा करके अगले दिन बाहर निकालना चाहिए।*_खुले में क्यों नहीं रखते झाड़ू: वास्तु शास्त्र में झाड़ू को हमेशा छिपाकर रखने की सलाह दी जाती है। झाड़ू को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां बाहरी लोगों की नजर न पड़े। इसे दरवाजे के पीछे, स्टोर रूम या बाथरूम जैसी जगह पर रखना बेहतर माना गया है। खुले में झाड़ू रखने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।*_झाड़ू को नहीं लगना चाहिए पैर: झाड़ू पर पैर रखना या उसे लांघना वास्तु के अनुसार अशुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। अगर गलती से ऐसा हो जाए तो मन ही मन क्षमा मांगना शुभ माना जाता है।♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️खून की कमी को जल्द से जल्द बढ़ाने के उपाय क्या हैं ? चीफ बेस्ट भी हो?*_हर दिन दो बार चुकन्दर का जूस पीना लाभकारी होता है. यह मेरा निजी अनुभव है.चुकन्दर की सब्जी, आलू, गोभी, गाजर तथा मटर आदि के साथ बना कर खायें.चुकन्दर को सलाद की तरह खा सकते हैं या चुकन्दर के भरवाँ पराठे भी खा सकते हैं._**_पालक (स्पिनैच) भी खून बढ़ाने में लाभकारी होता है.*_यह बात तो विदेशी कार्टून वाले पोपेये भी जानते हैं.*_और ऎसी ही एक देशी पत्तों की सब्जी होती है, जिसे बथुआ कहते हैं.करेले का और लौकी का जूस भी आपको फायदा कर सकता है._**_करेला उबाल कर (बिना छौंक लगाये हुये) खा सकें तो भी अच्छा रहेगा. 🩸 *आरोग्य संजीवनी* 💊*दूध के साथ सौंफ का सेवन करने के लाभ -_**_वजन कम करने में सहायक सौंफ में रेशे (फाइबर) भरपूर मात्रा में होती है। अतः उसके सेवन से हमें लंबे समय तक भूख नहीं लगती। सौंफ का सेवन शरीर के चयापचय (मेटाबॉलिज्म) के बढ़ाने में सहायक होती है। अगर आप भी वजन कम करना चाहते हैं तो आप सौंफ का सेवन करना प्रारंभ कर दीजिए।*_पेट के रोगों से आराम सौंफ में पाये जाने वाले तेल से अपच, सूजन और कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है, इसलिए पेट की रोगों को ठीक करने के लिए सौंफ का दूध बहुत हितकारी माना जाता है।*_एसिडिटी में आराम सौंफ का दूध पीने से मसालेदार खाद्य पदार्थों से होने वाली एसिडिटी और सूजन को कम किया जा सकता है.*_हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक सौंफ का दूध हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मददगार हो सकता है. इसमें आयरन, पोटैशियम पाया जाता है, जो आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को संतुलित रखता है। इसके साथ ही एनीमिया जैसी समस्या से मुक्ति दिलाता है।*_नेत्र ज्योति में लाभकारी सौंफ का सेवन नेत्र के लिए लाभदायक माना जाता है क्योंकि उसमें विटामिन ए रहता है। इसके नियमित सेवन से आंखों की रोशनी में सुधार होने के अवसर अधिक बढ़ जाते हैं मिश्री के साथ सौंफ के मिश्रण का नियमित सेवन करनें से नेत्र ज्योति में लाभ होता है। ☄️ *_गुरु भक्ति योग_* ☀️ वृश्चिक राशि : स्वभाव, मंगल की ऊर्जा, गुरु-शनि-बुध नक्षत्रों का प्रभाव, स्थिर जल तत्व की मानसिकता और अष्टम भाव से जुड़ी रहस्यमयी प्रकृति का विश्लेषण *_वृश्चिक राशि का राशि धर्म मंगल को दिया गया है और इसका तत्व जल माना गया है। यह सभी बातें केवल सामान्य पहचान नहीं होती, बल्कि राशि के स्वभाव और आंतरिक प्रकृति को समझाने का तरीका होती हैं। केवल राशि देखकर पूरी वृश्चिक राशि को नहीं समझा जा सकता, क्योंकि इसमें आने वाले नक्षत्र भी इसकी प्रकृति को बदलते और पूर्ण बनाते हैं। वृश्चिक राशि में गुरु, शनि और बुध के नक्षत्र आते हैं। इन सभी ग्रहों के गुणों को मिलाकर ही वृश्चिक राशि का वास्तविक स्वभाव बनता है। इसी आधार पर ग्रह, नक्षत्र और राशि का विभाजन किया गया है। *_राशि स्वामी: मंगल मंगल केवल अग्नि नहीं होता, बल्कि अग्नि की वह ऊर्जा है जो कार्य करती है, संघर्ष करती है और आगे बढ़ती है। वृश्चिक राशि में मंगल के गुण व्यक्ति को लड़ाकू बनाते हैं। ऐसा व्यक्ति परिस्थितियों से लड़ता है, समय से लड़ता है और कई बार समय के विपरीत जाकर भी संघर्ष करता है। यह स्वभाव सीधे युद्ध से अधिक गुप्त युद्ध की ओर जाता है। सामने से नहीं, बल्कि रणनीति और छिपे हुए तरीके से कार्य करना भी वृश्चिक का गुण होता है। इसी कारण अष्टम भाव और आठवें अंक से भी इसका संबंध माना गया है, क्योंकि यह छिपी हुई चीजों, रहस्य, गुप्त कार्यों और अंदरूनी परिवर्तन से जुड़ा होता है। *_नक्षत्र बृहस्पति (विशाखा)-विशाखा नक्षत्र के कारण वृश्चिक राशि में गुरु जैसे गुण आते हैं। ज्ञान, समझ, परिपक्वता और किसी विषय को गहराई से देखने की क्षमता मिलती है। लेकिन यहाँ विशाखा का अंतिम चरण आता है, इसलिए गुरु के गुण पूर्ण रूप से नहीं, बल्कि आंशिक रूप से दिखाई देते हैं। शनि (अनुराधा)-अनुराधा नक्षत्र वृश्चिक राशि को धैर्य, संघर्ष सहने की क्षमता और लंबे समय तक टिके रहने की शक्ति देता है। कठिन परिस्थितियों में भी लगातार आगे बढ़ते रहना और आसानी से हार न मानना इसका प्रभाव माना जाता है। *_बुध (ज्येष्ठा)-ज्येष्ठा नक्षत्र के कारण वृश्चिक राशि में बुध जैसे गुण भी दिखाई देते हैं। चालाकी, योजना बनाना, परिस्थिति को समझकर कार्य करना और केवल सिद्धांतों में न उलझकर व्यावहारिक तरीके से काम करना इसका प्रभाव होता है। ऐसे लोग कई बार पहले से स्थिति को समझकर अपनी रणनीति तैयार रखते हैं। *_स्वभाव स्थिर और जल तत्व-वृश्चिक एक स्थिर राशि है। स्थिर राशि का अर्थ यह नहीं कि परिवर्तन बिल्कुल नहीं होगा, बल्कि इसका अर्थ है कि इनके विचार और निर्णय जल्दी नहीं बदलते। यदि किसी व्यक्ति या विषय के बारे में एक बार इनकी सोच बन गई, तो उसे बदलने में समय लगता है। इसी कारण इनके अंदर मानसिक स्थिरता और पकड़ दिखाई देती है। *_जल तत्व के कारण वृश्चिक राशि में भावनात्मक प्रभाव भी अधिक रहता है। व्यक्ति अंदर से भावुक हो सकता है, लेकिन हर भावना को बाहर दिखाना जरूरी नहीं होता। जल की तरह परिस्थिति के अनुसार ढलने की क्षमता भी इसमें होती है। इसलिए ऐसा नहीं कि वृश्चिक बदलता नहीं, बल्कि यह परिस्थिति के अनुसार स्वयं को बदल सकता है, लेकिन उसका मूल स्वभाव भीतर से बना रहता है।※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※⚜️ *_एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।*_यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।



