मध्य प्रदेश

नारी मात्र एक व्यक्ति नहीं अपितु एक संपूर्ण चेतना है : नीता गोस्वामी

सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम संपन्न
सिलवानी । वीर शिवाजी शिक्षण समिति सिलवानी द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मध्यभारत प्रान्त की योजनानुसार संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता विद्या भारती की राष्ट्रीय मंत्री डॉ. मधुश्री साव दीदी, उपपंजीयक अधिकारी म. प्र. शासन, स्मिता खांडेकर शर्मा, सप्तशक्ति संगम की प्रान्त संयोजिका नीता गोस्वामी, सिलवानी थाना प्रभारी पूनम सविता एवं हाल ही में मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग में चयनित विद्यालय की पूर्व छात्रा सपना रघुवंशी द्वारा माँ सरस्वती, ब्रह्म अक्षर ॐ, भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
नीता गोस्वामी दीदी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा की नारी मात्र एक व्यक्ति नहीं अपितु एक संपूर्ण चेतना है जो परिवार की आधारशिला, समाज की प्रेरणा, राष्ट्र की आत्मा है। नारी संपूर्ण मानवता व प्रकृति के प्रति दायित्व धारिणी के रूप में सदियों से प्रतिष्ठित रही है। मातृशक्ति की करुणा, सहनशक्ति, धैर्य, निस्वार्थ सेवा भावना और सहज बुद्धिमत्ता ऐसे गुण है जो संकट के समय प्रकट होते हैं तथा वह परिवार समाज और राष्ट्र को ही नहीं अपितु सारे विश्व को मानवता को दिशा देती है। प्राचीन भारत में गार्गी, मैत्रेयी अनसूया जैसी अनेक महिलाएं ज्ञान, तप, नीति और शिक्षा का प्रतीक थी।
राष्ट्रीय मंत्री दीदी ने कुटुंब प्रबोधन एवं पर्यावरण के संबंध में भारतीय दृष्टि विषय पर माताओं का प्रबोधन करते हुए कहा कि परिवार मनुष्य विकास की मूल इकाई तथा जीवन निर्माण का केंद्र है। भौतिक विकास के साथ साथ जीवन मूल्यों के संस्कार का आधार परिवार है। सनातन धर्म ग्रंथो में जल संरक्षण जल प्रबंधन एवं जल दान को पुण्य यज्ञ धर्म अर्थ काम तीनों का फल देने वाला करणीय कार्य माना है व्रत त्योहारों पर बट, पीपल, तुलसी, आंवला का पूजन होता है विभिन्न देवी देवताओं के पूजन में पत्र पुष्प फल का प्रयोग किया जाता है।
स्मिता दीदी ने माता को संबोधित करते हुए कहा कि नारी तू नारायणी तुम सब कुछ कर सकती हो पालन कर सकती हो और समय आ जाए तो संहार भी कर सकती हो भोजन देने वाली तुम हो। सनातन धर्म में महिला पुरूष एक समान है महिलाएं वेद का पाठन करती थी कोई भेदभाव नहीं था जब आक्रांताओ ने भारत पर आघात किया तब उस समय हमारी व्यवस्थाओं में बदलाव हो गया था आज फिर से वातावरण बन रहा है पुनः अब हम राष्ट्र वैभव की ओर अग्रसर है भारत को विश्वगुरू बनाने का प्रयास एक माता ही कर सकती है।
थाना प्रभारी पूनम सविता ने माताओं से संवाद करते हुए सतर्कता और आत्म संयम का संदेश दिया उन्होने कहा कि अनुशासन, आत्म नियंत्रण और मार्गदर्शन की बडी भूमिका होती है अंत में सपना रघुवंशी दीदी द्वारा सप्तशक्ति संगम के अंतर्गत माताओं को संकल्प दिलाया कि मैं सृजनकर्ता हूं, मैं अपने प्रति एवं भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव रखूंगी। मैं कुल परम्परा सिखाऊंगी, मैं मितव्ययता के साथ घर चलाऊंगी, मैं भारत के नागरिक कर्तव्यों का पालन करूंगी, मैं परिवार, समाज, राष्ट्र तथा विश्व कल्याण के लिए कार्य करूंगी, मै अपनी सप्तशक्ति का जागरण करने के लिए संकल्पित हूं।
कार्यक्रम में सामान्य प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया जिसमें सही उत्तर देने वाली माताओं को विद्यालय द्वारा सम्मानित किया गया।
अंत में कार्यक्रम संयोजिका नीतू विश्वकर्मा द्वारा समस्त आगन्तुको का आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम सह संयोजक सुशीला सराठे, ज्योति श्रीवास्तव, वंदना यादव, वीर शिवाजी शिक्षण समिति के सदस्य एवं विद्यालय का समस्त आचार्य परिवार उपस्थित रहे।

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