चौपाया जानवरो में एफएमडी बीमारी का प्रकोप, टीकाकरण की रफ्तार धीमी

सजा भुगत रहे पशुपालक, मर रहे मवेशी, जिम्मेदार बेफिक्र
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। सिहोरा तहसील के अंतर्गत संचालित 14 बेटनरी संस्थानों के तहत आने वाले गांवो के पशुपालकों ने बताया की इस समय गांव-गांव पशुओं में खुरपका एवं मुंहपका जिसे एफएमडी बीमारी कहा जाता है इस बीमारी का प्रकोप गांव-गांव तेजी से फैला हुआ है।
जिससे क्षेत्र के पशुपालक बेहद परेशान व चिंतित नजर आ रहे हैं।
पशुपालको मे हडकंप की स्थिति बनी हुई है पशुपालको का कहना है कि पशुपालन विभाग के द्वारा इस बीमारी की रोकथाम के लिए पूर्व में किए जाने वाले टीकाकरण मे तत्परता नही दिखाई गई । जिसके चलते यह बीमारी सिहोरा तहसील के कई दर्जन गांवों में तेजी से पैर पसार चुकी है। आपको बता दें कि यह खुरपका मुंहपका रोग एफएमडी एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो गाय, सूअर भेड़, बकरी और हिरन जैसे दो खुर वाले जानवरों को प्रभावित करती है।
इस रोग से जानवरों के मुंह, थनों, जीभ, मसूडा और पैरों पर छाले हो जाते हैं जिससे दूध के उत्पादन में भारी कमी आती है यह रोग सीधे संक्रमित जानवरों के स्राव और दूषित वातावरण के माध्यम से फैलता है यह आर्थिक रूप से बहुत हानिकारक है। क्योंकि यह बीमारी पशुधन व्यापार को बाधित करता है और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए पशुपालकों को बहुत महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। इस बीमारी के चलते गोवंश भेड़ बकरी के दूध उत्पादन में भारी कमी आ जाती है। पशुओं के मुंह, जीभ और मसूडा में छाले आ जाने के कारण खाना पीना छोड़ देते हैं और मुंह से लार बहती है साथ ही खुरों में यह रोग पकड़ लेता है जिससे जानवर को चलने फिरने मे काफी तकलीफ होती है। धीरे-धीरे यह रोग खुर के पास बड़े-बड़े घाव बना लेता है बताया जाता है की इस रोग को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशुपालन विभाग द्वारा साल मे दो बार मई और अक्टूबर के माह में इस रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण किया जाता था लेकिन इस साल तहसील की सभी चौदह बेटनरी संस्थानों में एक सप्ताह विलंब से वैक्सीन पहुंची है जिसके चलते इस बीमारी ने सिहोरा तहसील के गांव-गांव में अपने पैर पसार लिया है। पशु चिकित्सको का कहना है की जब पशु इस बीमारी की चपेट मे आ जाता है तब बैक्शीन लगाना और हानिकारक हो जाता है। पशुपालक राकेश सिंह ठाकुर, रजनीश दुबे, विकास यादव, बृजेश यादव ने बताया कि इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए अनेक संसाधन जुटाना पड़ते हैं और बहुत महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती है जो कस्बे में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती इस बीमारी की गिरफ्त में आने वाला मवेशी दूध उत्पादन में बिल्कुल कमी कर देता है। जिससे पशुपालक बेहद परेशान नजर आ रहे हैं। वही इस बीमारी से युवा मवेशियों तक की मृत्यु दर बढ़ने व गर्भपात का खतरा मंडराता है अनेक गांवों में इस बीमारी के चलते कई पशुओ की मौत हो चुकी है । पशुपालकों का कहना है कि समय रहते अगर इस बीमारी को काबू पाने के लिए टीकाकरण हो जाता तो इस बीमारी का प्रकोप ज्यादा देखने को नहीं मिलता। वहीं पशुपालक अनेक प्रकार के देशी नुस्खे अपना रहे हैं लेकिन इस संक्रामक बीमारी की चपेट में आने के बाद पशुओ को ठीक करने के लिए महंगी दवाइयां के साथ दो दो सप्ताह का समय लग रहा है। पशु ठीक होने के बाद भी दुधारू गाय भैंस बकरी दूध उत्पादन में कमी कर देती हैं। जिससे पशुपालक की कमर टूट रही है जहां एक और मध्य प्रदेश की सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने की बात करती है वहीं किसान व देश की अर्थव्यवस्था की रीड पशुपालन को माना जाता है इसके बावजूद भी पशुओं को गंभीर बीमारी से बचने के लिए समय पर टीकाकरण न होना सरकार की योजना व मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है शासन की तमाम कोशिश धरातल पर बेअसर साबित हो रही हैं। गौरतलब है की जहां एक और वेटरनरी संस्थानों में आम दवाइयां से लेकर गंभीर बीमारी की दवाइयां के स्टॉक खाली पड़े हैं ऐसे मे पशुपालकों को सीधे अपने जेब से पैसे खर्च कर महंगी दवाइयां खरीदने मजबूर होना पड़ रहा है। अभी हाल ही में पशुओ मे लंंपी बीमारी का भी प्रकोप तेजी से फैल गया था पशुपालकों ने इस संबंध में जिला प्रशासन के मुखिया से गंभीरता से विचार करते हुए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
इस संबंध में डॉ. संजय शर्मा, विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी सिहोरा का कहना है कि एफएमडी बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण का कार्य ब्लॉक में तेजी से चल रहा है कितने फीसदी टीकाकरण ब्लॉक में हुआ यह हमें पता नहीं है पता करके बता पाऊंगा, संस्थानों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हैं जिन पशुपालकों को दवाइयां न मिले मुझसे संपर्क कर सकते हैं।



