श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, बरसाए फूल, संत श्री गोविंद सागर जी भरभरा वाले जी का आगमन हुआ

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। खुल गए सारे ताले क्या बात हो गई, जब जन्मे कन्हैया वाह क्या बात हो गई । नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल के जयकारे से पूरा पंडाल भक्ति मय हो गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य अवसर पर जब व्यासपीठ से यह भजन गूंजे तो समूचा वातावरण आनंद से भर गया।
सिलौंडी में चल रही श्री मद भागवत कथा में कथा व्यास दिव्य कृष्ण महाराज जी के मुखारविंद से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का कथा रस बरसा।
बालकृष्ण की सुंदर झांकी देख श्रद्धालु विभोर हो गए । जन्मोत्सव के खास अवसर के लिए कथा पांडाल को गुब्वारों और फूलों से सजाया गया। नन्हें मुन्हें बच्चे भी कृष्ण रूप में श्रद्धालुओं को लुभा रहे थे। वसुदेव जब टोकनी में बाल कृष्ण को लेकर निकले तो उनकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई। श्रद्धालु कृष्णभक्ति में विभोर होकर नाच उठे।
कथा वाचक ने कहा कि जीव जीवन भर अहंकार में जीता है, लेकिन जब अंत समय निकट आता है तो उसे भगवान याद आते हैं। जीवन भर किए गए पाप अंत समय की गुहार से नहीं कट सकते, इसलिए प्रतिपल भगवान का सुमिरन करते रहे, जिससे आप पाप कर्मों की ओर नहीं बढ़ेंगे और सत्कर्मों की प्रेरणा मिलती रहेगी। कथा ब्यास ने वामन अवतार की कथा सुनाते कहा कि तीन पग ज़मीन यानि धर्म, अर्थ काम हैं, यदि इनका ठीक प्रकार से निवर्हन हो गया तो मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। राजा बलि के दान से प्रसन्न होकर भगवान वामन ने जब वरदान देने को कहा तो बलि ने कहा कि भगवन आते जाते बस आपके दर्शन हो जाएं, मुझे और कुछ नहीं चाहिए, इस तरह बलि ने भगवान को अपना द्वारपाल बना लिया। बलि बाद में इंद्र बनकर इंद्र के सिंहासन पर विराजमान हुए। अर्थात भगवान की कृपा जब मिलती है तो संसार के सारे सुख भक्त की झोली में आ जाते हैं।
परम त्यागी श्री श्री 1008 गोविंद सागर भरभरा वाले महाराज जी का शुभ आगमन कथा के दौरान हुआ। महाराज जी ने सभी भक्तो आशीर्वाद दिया।
जिला पंचायत सदस्य कविता पंकज राय परिवार सहित नाच गाना और प्रसाद का वितरण किया।
इस दौरान सरपंच पंचों बर्मन, उपसरपंच राहुल राय, राजनारायण राय, सेवाराम साहू , रामलाल काछी सहित बड़ी संख्या मे श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही ।

