ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 17 मार्च 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 17 मार्च 2026
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 *दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । *मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – चैत्र मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 09:23 AM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र शतभिषा 06:09 AM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। और इसके देवता वरुण देव हैं।
⚜️ योग – सिद्ध योग 08:14 AM तक, उसके बाद साध्य योग 06:21 AM तक, उसके बाद शुभ योग
प्रथम करण : वणिज 09:23 AM तक
द्वितीय करण : विष्टि 08:59 PM तक, बाद शकुनि
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:14:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:07:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:16 ए एम से 06:04 ए एम तक
🌇 प्रातः सन्ध्या – 05:40 ए एम से 06:52 ए एम तक
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:27 पी एम से 01:15 पी एम तक
🔯 विजय मुहूर्त – 02:51 पी एम से 03:39 पी एम तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 06:49 पी एम से 07:13 पी एम तक
🌌 सायाह्न सन्ध्या – 06:51 पी एम से 08:03 पी एम तक
💧 अमृत काल – 01:18 पी एम से 03:06 पी एम तक
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:27 ए एम, मार्च 18 से 01:15 ए एम, मार्च 18 तक
🌸 त्रिपुष्कर योग – 08:00 पी एम से 08:31 पी एम तक
सर्वार्थ सिद्धि योग – 06:52 ए एम से 08:31 पी एम तक
❄️ रवि योग – 08:31 पी एम से 06:50 ए एम, मार्च 18 तक
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – मधुकृष्ण त्रयोदशी/ वारुणी योग सुबह 09.22 तक/ भद्रा/ पंचक जारी/ त्रिपुष्कर योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ आगरा उच्च न्यायालय स्थापना दिवस, हरियाणा के भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला जन्म दिवस, भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल जन्म दिवस, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर स्मृति दिवस, राष्ट्रीय कॉर्नड बीफ दिवस, गोभी दिवस, पनडुब्बी दिवस, महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण जन्म दिवस, सेंट पैट्रिक दिवस, अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस, शास्त्रीय संगीत गायिका सिद्धेश्वरी देवी स्मृति दिवस, विश्व नींद दिवस, प्रसिद्ध लेखक विष्णुशास्त्री चिपलूनकर पुण्य तिथि, अभिनेता पुनीत राजकुमार जन्म दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🌹 Vastu tips 🌷
अपराजिता का फूल क्यों माना जाता है शुभ अपराजिता का फूल अपनी आकर्षक नीली आभा के साथ-साथ गहरे धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। हालांकि, अब यह फूल और भी कई रंगों में उपलब्ध होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह फूल भगवान विष्णु और शनिदेव को अत्यंत प्रिय है। इसी कारण इसका उपयोग पूजा-पाठ और विशेष ज्योतिषीय उपायों में किया जाता है।
*अपराजिता का महत्व अपराजिता का पौधा घर में लगाने से नारायण भगवान, माता लक्ष्मी और शनिदेव की कृपा बनी रहती है। कई मान्यताओं में बताया गया है कि इससे आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और भाग्य का सहयोग मिलने लगता है। यह पौधा जीवन में स्थिरता और सफलता को बढ़ावा देता है। *आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार अपराजिता वास्तु शास्त्र में अपराजिता के पौधे को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे घर की पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना विशेष रूप से शुभ होता है। इससे नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और घर का वातावरण शांत और संतुलित बना रहता है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जिगर विकार : अमरबेल का उपयोग जिगर की कार्यक्षमता को सुधारने के लिए किया जाता है। यह यकृत (लिवर) के कार्यों को उत्तेजित कर सकता है और इसके विभिन्न विकारों में लाभकारी होता है।
*त्वचा संबंधी समस्याएँ : अमरबेल का उपयोग त्वचा की समस्याओं जैसे एक्जिमा, सोरायसिस, और अन्य चर्म रोगों के इलाज में किया जाता है। यह त्वचा को साफ करने और उसे स्वस्थ बनाने में सहायक होता है। *पेट और आंतों के विकार : अमरबेल का उपयोग अपच, कब्ज, और अन्य पाचन समस्याओं के इलाज में किया जाता है। यह पाचन तंत्र को सुधारने में मदद कर सकता है।
*मधुमेह : कुछ शोधों में यह पाया गया है कि अमरबेल का उपयोग रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। *व्रण और घाव : अमरबेल के पत्तों और तनों का लेप घावों और व्रणों पर लगाया जाता है, जिससे उनकी तेजी से भरने में मदद मिलती है।
*वात विकार : अमरबेल वात को शांत करने में भी सहायक होती है, जिससे विभिन्न न्यूरोलॉजिकल विकारों में इसका उपयोग किया जा सकता है! 🩸 *आरोग्य संजीवनी* 💊 🔹तुलसी सेवन से मिले दीर्घायुष्य व स्वास्थ्य🔹* *🔸तुलसी शारीरिक व्याधियों को तो दूर करती ही है, साथ ही मनुष्य के आंतरिक भावों और विचारों पर भी कल्याणकारी प्रभाव डालती है । ‘अथर्ववेद’ में आता है यदि त्वचा, मांस तथा अस्थि में महारोग प्रविष्ट हो गया तो उसे श्यामा तुलसी नष्ट कर देती है । *🔸दोपहर भोजन के पश्चात तुलसी – पत्ते चबाने से पाचनशक्ति मजबूत होती है । दूषित पानी में तुलसी के कुछ ताजे पत्ते डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है । *🔸बर्रे, भौंरा, बिच्छू ने काटा हो तो उस स्थान पर तुलसी के पत्ते का रस लगाने या तुलसी-पत्ता पीसकर पुलटिस बाँधने से जलन व सूजन नहीं होती है । *🔸तुलसी के बीज बच्चों को भोजन के बाद देने से मुखशुद्धि होने के साथ–साथ पेट के कृमि भी मर जाते हैं । तुलसी बीज नपुंसकता को नष्ट करते हैं और पुरुषत्व के हार्मोन्स की वृद्धि भी करते हैं । *🔸शास्त्रों में आता है कि जिनके घर में लहलहाता तुलसी का पौधा रहता है, उनके यहाँ वज्रपात नहीं हो सकता अर्थात जब तुलसी अचानक प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाय तब समझना चाहिए कि घर पर कोई भारी संकट आनेवाला है । *🔸बच्चों को तुलसी – पत्र देने के साथ सूर्यनमस्कार करवाने और सूर्य को अर्घ्य दिलवाने के प्रयोग से बुद्धि में विलक्षणता आती है । तुलसी की क्यारी के पास प्राणायाम करने से सौन्दर्य, स्वास्थ्य और तेज की अत्युत्तम वृद्धि होती है । *🔸प्रात: काल खाली पेट दो–तीन चम्मच तुलसी रस सेवन करने से शारीरिक बल एवं स्मरणशक्ति में वृद्धि के साथ–साथ व्यक्तित्व भी प्रभावशाली होता है *🔸अत: जीवन को उन्नत बनाने के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को तुलसी – पूजन अवश्य करना चाहिए। 📘 गुरु भक्ति योग 🕯️
नरान्तक रावण का पुत्र था। जिस दिन उसका जन्म हुआ वह दिन मूल नक्षत्र का था। पंडितों ने कहा की यह पुत्र अशुभ घड़ी में पैदा हुआ है।
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अतः यह तुम्हारे लिए हानिकारक रहेगा। इसके साथ जिन शिशुओं ने आज के दिन जन्म लिया है, वे भी अनिष्टकारी रहेंगे। इन शिशुओं का जीवित रहना किसी भी हाल ही आपके लिए ठीक नहीं है।
*तब रावण ने आदेश दिया कि नरान्तक के जन्म के दिन जितने भी बच्चे लंका में जन्में उनको एक जगह लाकर समुद्र में फेंक दिया जाए। कहते हैं उस समय यह बच्चे मरे नहीं बल्कि वट वृक्ष के पत्तों से चिपक कर दूध पीते रहे। *ठीक सात वर्ष बाद राक्षसों के वह बच्चे पुष्ट हो गए। समुद्र की विपरीत प्रवाह में बहते हुए वह उस स्थान पर पहुंचे जहां गंगाजी का संगम था।
*वहां पर शिवजी का एक सुंदर मंदिर था, जिसे देख सब बालकों ने श्रद्धापूर्वक सिर नवाया। फिर सभी न जाने क्या सोचकर ब्रह्माजी की तपस्या करने लगे। *उनकी कठोर तप को देखते हुए ब्रह्माजी प्रकट हुए और उन्होंने उन्हें वर दिया कि उनकी किसी भी युद्ध में हार नहीं होगी। इसके बाद ब्रह्माजी ने कहा कि वानर और भालू इन दो जातियों को छोड़कर तुम सबसे विजय रहोगे। उनमें से एक नरान्तक भी था।
*नरान्तक प्रसन्न हो गया। वह वहीं पर नगर बसाकर अपने साथियों के साथ रहने लगा। उसके उस नगर का नाम बिहबावपुर था। एक दिन जब वह अपने दरबार में बैठा था तो रावण का दूत आया तो उसने अपना सारा हाल सुना दिया। रावण का बुलावा सुनकर वह अपनी सेना के साथ लंका की ओर चल पढ़ा। *रावण ने सोचा भी न था कि उसका पुत्र इतना वैभवशाली होगा। रावण ने जब नरान्तक को अहिरावण, मेघनाद, कुंभकर्ण की खबर सुनाई तो नरान्तक बोला में सुबह से युद्ध शुरु कर दूंगा। सुबह उसने लंका में संग्राम का बिगुल छेड़ दिया। यह देखकर हनुमानजी को क्रोध आ गया।
*तभी वहां सुग्रीव का पुत्र दधिबल वहां आ पहुंचा। उसने नरान्तक को मारने का जिम्मा लिया। आखिर में उसने नरान्तक को मार गिराय। *मरते हुए नरान्तक को ब्रह्माजी का वरदान याद आ रहा था कि उसकी मृत्यु वानर और भालू जाति के लोगों से हो सकती है और दधिबल वानर था।
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
*_आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।

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