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वासुदेव विनायक चतुर्थी कब है? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इस व्रत का महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🔮 वासुदेव विनायक चतुर्थी कब है? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इस व्रत का महत्व……
🔘 HEADLINES
𖣔 वासुदेव चतुर्थी 22 मार्च 2026 को मनाई जाएगी
𖣔 चैत्र शुक्ल चतुर्थी पर मनाई जाती है वासुदेव चतुर्थी* 𖣔 इस दिन की जाती है भगवान गणेश की पूजा 𖣔 *इस दिन व्रत करने से दूर होती हैं जीवन की बाधाएं
🌍 हिंदू धर्म में वासुदेव चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के वासुदेव स्वरूप को समर्पित होता है। इस दिन भक्त उपवास रखकर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। आपको बता दें हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को यह त्योहार मनाया जाता है। इसको चैत्र विनायक चतुर्थी या मनोरथ चतुर्थी भी कहते हैं। मान्यता है इस दिन जो व्यक्ति व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा- अर्चना करता है, उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। साथ ही सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस साल रविवार 22 मार्च को वासुदेव चतुर्थी है। वहीं इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से इस तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त……
❄️ *पूजा के शुभ मुहूर्त*
इस दिन पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं।
👸🏻 *ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 48 मिनट से 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। ✡️ *विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक है।
🐃 *गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 32 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा 🗣️ *निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।
🌙 वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – रात 8 बजकर 15 मिनट से रात 10 बजकर 15 मिनट तक
⚛️ शुभ योग का संयोग
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस साल चैत्र वासुदेव चतुर्थी पर विशेष शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन रवि योग और भद्रावास योग का संयोग रहेगा। रवि योग रात 10 बजकर 42 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जबकि भद्रावास योग सुबह 10 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इन योगों में भगवान गणेश की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
👉🏼 क्यों रखा जाता है यह व्रत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति चतुर्थी के दिन विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करता है, उसे जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस व्रत को विशेष रूप से विद्यार्थियों, व्यापारियों, गृहस्थों और नया कार्य शुरू करने वाले लोगों के लिए लाभकारी माना गया है।
ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और परिवार में शांति बनी रहती है। साथ ही जीवन की कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति भी प्राप्त होती है। कई धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है।
🤷🏻‍♀️ कैसे करें भगवान गणेश को प्रसन्न ?
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।* संकल्प: हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। स्थापना: एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।*
पंचामृत स्नान: यदि प्रतिमा धातु की है, तो उसे दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल (पंचामृत) से स्नान कराएं।* षोडशोपचार पूजन: सिंदूर का तिलक लगाएं (गणेश जी को सिंदूर अति प्रिय है), अक्षत, फूल और माला अर्पित करें।*
दूर्वा अर्पण: ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करते हुए गणेश जी को 21 दूर्वा (घास) की गांठें चढ़ाएं।* भोग: भगवान को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।*
आरती: अंत में गणेश जी की आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें।
💁🏻‍♀️ वासुदेव चतुर्थी का महत्व_
धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि चैत्र वासुदेव विनायक चतुर्थी का व्रत को करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। भगवान गणेश को बुद्धि का देवता कहा गया है। उनकी पूजा से बुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही इस दिन दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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