
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 27 मार्च 2026_
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष नवमी तिथि 10:07 AM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पुनर्वसु 03:24 PM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति (गुरु) हैं। तथा इसके देवता आकाशीय माता देवी अदिति है।
⚜️ योग – अतिगण्ड योग 10:09 PM तक, उसके बाद सुकर्मा योग
⚡ प्रथम करण – कौलव 10:07 AM तक
✨ द्वितीय करण – तैतिल 09:24 PM तक, बाद गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:04:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:12:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 04:44 ए एम से 05:30 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या – 05:07 ए एम से 06:17 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त – 12:02 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 06:35 पी एम से 06:58 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या – 06:36 पी एम से 07:46 पी एम
💧 अमृत काल – 01:05 पी एम से 02:38 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 12:03 ए एम, मार्च 28 से 12:49 ए एम, मार्च 28
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग – 06:17 ए एम से 03:24 पी एम
❄️ रवि योग – पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – राम नवमी/ बसंत नवरात्रा समाप्त/ स्वामीनारायण जयन्ती/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ अंतर्राष्ट्रीय व्हिस्की दिवस, राष्ट्रीय जो दिवस, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान संपर्क जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय स्क्रिबल दिवस, विश्व थियेटर दिवस, विश्व रंगमंच दिवस, सर सैयद अहमद खान पुण्य तिथि, भारत की दिग्गज मसाला कम्पनी ‘एमडीएच’ धर्मपाल गुलाटी जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी पुष्पलता दास जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी जन्म दिवस, अभिनेत्री प्रिया राजवंश जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी विमल प्रसाद चालिहा जयन्ती ✍🏼 *तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🗺️ Vastu tips 🗽
आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक घर का मुख्य दरवाजा ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है। ऐसे में इसे सकारात्मक बनाए रखना जरूरी है। दरवाजे पर सिंदूर से स्वस्तिक, ॐ या अन्य शुभ चिन्ह बनाने से नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं। यह उपाय सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
*नींबू और हरी मिर्च का उपाय मंगलवार या शनिवार को मुख्य द्वार पर एक नींबू और सात हरी मिर्च लटकाना पारंपरिक उपाय माना जाता है। मान्यता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर समाहित कर लेता है। इसकी तीखी गंध वातावरण को स्वच्छ रखने में भी मदद करती है। बेहतर परिणाम के लिए इसे हर सप्ताह बदलना चाहिए। *काले धागे का प्रयोग मुख्य दरवाजे की कुंडी या दहलीज पर काला धागा बांधना भी नजर दोष से बचाव का एक आसान तरीका है। वास्तु में काले रंग को नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने वाला माना गया है, जिससे घर का वातावरण संतुलित बना रहता है।
*मोर पंख का महत्व लिविंग रूम या प्रवेश द्वार के पास तीन मोर पंख रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसे बुरी नजर से सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ मान्यता है कि जब तक पितृ दोष की शांति के लिए उचित उपाय (जैसे तर्पण, श्राद्ध या दान) नहीं किए जाते, इसका प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। यह व्यक्ति की उम्र के साथ खत्म नहीं होता, बल्कि जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर अलग-अलग रूप में सामने आता है: *युवावस्था में: शिक्षा और नौकरी (जैसे आपकी बैंक PO की तैयारी) में बेवजह की बाधाएं आना।
*गृहस्थ जीवन में: विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में कष्ट या बहनों की शादी में अड़चनें आना। *वृद्धावस्था में: बीमारी या मानसिक अशांति।
*क्या यह उम्र के साथ कम होता है? कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि 40 से 45 वर्ष की उम्र के बाद इसका “तीखापन” कम होने लगता है क्योंकि व्यक्ति अपने जीवन के कई कठिन संघर्ष देख चुका होता है। लेकिन, यह पूरी तरह समाप्त तभी माना जाता है जब पितरों की आत्मा की शांति के लिए कर्म किए जाएं। *आपके संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बात आपने बताया कि आपके पिता जी का निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ और आप पर परिवार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। कई बार हम अपने जीवन के संघर्षों (Struggles) को ‘पितृ दोष’ का नाम दे देते हैं, जबकि असल में वे परिस्थितियों की चुनौती होते हैं।
🫐 *आरोग्य संजीवनी* 🍓
👉🏼 घरेलू और सरल उपाय
*अजवाइन और काला नमक: आधा चम्मच अजवाइन के चूर्ण में एक चुटकी काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ रात को सोने से पहले लें।
*कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds): इनमें ‘कुकरबिटासिन’ होता है जो कीड़ों को पंगु बना देता है। रोज सुबह मुट्ठी भर कच्चे कद्दू के बीज खाएं। *लहसुन: कच्चा लहसुन एंटी-पैरासिटिक गुणों से भरपूर होता है। सुबह खाली पेट 1-2 कलियां चबाना फायदेमंद है।
*सहजन (Drumstick): सहजन की छाल का काढ़ा या इसकी पत्तियों का रस कीड़ों को बाहर निकालने में मदद करता है। *खान-पान में जरूरी बदलाव (प्रकृति विघात) कीड़े मीठे और कफ बढ़ाने वाले भोजन में पनपते हैं। इन्हें रोकने के लिए:
*मीठा पूरी तरह बंद करें: गुड़, चीनी और मीठे फलों से परहेज करें *छाछ का सेवन: ताजी छाछ में सेंधा नमक और भुना जीरा डालकर पिएं। यह कीड़ों के लिए प्रतिकूल वातावरण बनाता है।
*कड़वे और तीखे खाद्य पदार्थ: करेला, मेथी, सहजन और हल्दी का प्रयोग भोजन में बढ़ाएं। 📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
माता अशोक सुंदरी, भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री हैं, जिनका वर्णन पद्म पुराण में विस्तार से मिलता है।
*भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्रों—गणेश और कार्तिकेय—के बारे में तो हम सभी जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग उनकी पुत्री अशोक सुंदरी के बारे में जानते हैं। पद्म पुराण के अनुसार, अशोक सुंदरी का जन्म माता पार्वती की अकेलेपन को दूर करने की इच्छा और कल्पवृक्ष (मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष) के आशीर्वाद से हुआ था। *लेकिन एक प्रश्न अक्सर पूछा जाता है: शिव परिवार की सदस्य होने के बाद भी उनकी अलग से पूजा क्यों नहीं की जाती?
*पुराणों में स्थान और वरदान पद्म पुराण के अनुसार, अशोक सुंदरी का जन्म एक विशेष उद्देश्य के लिए हुआ था। वे माता पार्वती के शोक (दुख) को दूर करने वाली थीं, इसलिए उनका नाम ‘अशोक’ पड़ा। शास्त्रों में उल्लेख है कि उनकी पूजा स्वतंत्र रूप से करने के बजाय शिवलिंग के एक विशेष भाग में की जाती है। *शिवलिंग में ही है उनका वास अशोक सुंदरी की अलग से मूर्तियाँ या मंदिर न होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि वे सदैव अपने पिता (महादेव) के साथ विराजमान रहती हैं। जलाधारी (शिवलिंग का आधार) पर जहाँ से जल बाहर निकलता है, उसके बीच की जो मोटी उभरी हुई रेखा होती है, वही माता अशोक सुंदरी का स्थान माना जाता है।
*महादेव का विधान है कि उनकी पुत्री की पूजा शिवलिंग की पूजा के साथ ही स्वतः संपन्न हो जाती है। *‘स्वतंत्र अस्तित्व’ की जगह ‘परिवार’ की महत्ता भारतीय शास्त्रों में कई ऐसी दैवीय शक्तियाँ हैं जो स्वतंत्र रूप से पूजने के बजाय किसी मुख्य देवता की शक्ति या अंग के रूप में पूजी जाती हैं। अशोक सुंदरी को “शिव शक्ति” के उस रूप में देखा जाता है जो पारिवारिक सुख और शांति का प्रतीक हैं। उनकी पूजा अलग से न करके, शिव परिवार (पंचदेव) के साथ करना ही शास्त्रों में श्रेष्ठ बताया गया है।
*विवाह और नहुष की कथा कथाओं के अनुसार, अशोक सुंदरी का विवाह इंद्र पद पर आसीन होने वाले राजा नहुष से हुआ था। विवाह के पश्चात वे अपने ससुराल (लोक) की गरिमा और वहां की व्यवस्था में सम्मिलित हो गईं। यही कारण है कि वे पृथ्वी पर ‘स्वतंत्र आराध्य देवी’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘शिव पुत्री’ के रूप में प्रतिष्ठित हैं। *निष्कर्ष: माता अशोक सुंदरी की पूजा नहीं की जाती—यह कहना पूरी तरह सही नहीं है। सत्य तो यह है कि जब भी आप शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं और जलाधारी की उस मध्य रेखा (अशोक सुंदरी का स्थान) को स्पर्श करते हैं, तो आपकी पूजा उन तक पहुँच जाती है। वे घर में अखंड सौभाग्य और संतान सुख देने वाली देवी मानी जाती हैं।
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⚜️ *नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।। *आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

