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चैत्र पूर्णिमा 2026: सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा-विधि, शुभ योग और व्रत के नियम पूरी जानकारी

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 चैत्र पूर्णिमा 2026: सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा-विधि, शुभ योग और व्रत के नियम पूरी जानकारी….
👉🏼 हिंदू धर्म में किसी भी एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होता है और चंद्र पूजन करने से उसकी ऊर्जा का पूर्ण फल मिलता है। इन सभी पूर्णिमा तिथियों में से खास मानी जाती है चैत्र पूर्णिमा। यह चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है और इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के साथ दान-पुण्य करना भी विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस साल भी चैत्र पूर्णिमा की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और यह 1 अप्रैल को मनाई जाएगी या 2 अप्रैल को इस बात को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। ऐसे में पंचांग में बताई तिथि को ही किसी भी पर्व के लिए शुभ माना जाता है। आइए आचार्य श्री गोपी राम से से जानते हैं इस साल चैत्र पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और इसकी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?
📖 चैत्र पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।
ब्रह्म मुहूर्त 02 अप्रैल, प्रातः 4:38 से 5:24 बजे तक। यही समय स्नान के लिए सबसे शुभ है। यदि आप इस समय गंगा जैसी पवित्र नदी में स्नान करेंगी तो शुभ फल मिलेंगे।
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अभिजीत मुहूर्त- 01 अप्रैल, दोपहर 12:00 से 12:50 बजे तक। यह मुहूर्त पितरों की पूजा के लिए शुभ माना जाता है* प्रदोष काल मुहूर्त- 01 अप्रैल, शाम 6:39 बजे से। इस मुहूर्त में माता लक्ष्मी की पूजा करना बहुत शुभ माना जा रहा है।*
पूर्णिमा की रात में चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ फलों की प्राप्ति होती है।* चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ समय 02 अप्रैल रात्रि 08:15 बजे से है। 🤷🏻‍♀️ चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026 कब है
🔅 साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
🔅 पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल 2026 को प्रातः 07:06 बजे से होगा।
🔅 इसका समापन 2 अप्रैल 2026 को सुबह 07:41 बजे तक रहेगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार व्रत 1 अप्रैल 2026 (बुधवार) को रखा जाएगा।
🔅 इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 07:07 बजे रहेगा।
🔅 इसी दिन हनुमान जयंती (गुरुवार, 2 अप्रैल 2026) भी मनाई जाएगी, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
⚛️ चैत्र पूर्णिमा 2026 का शुभ समय
चैत्र पूर्णिमा 2026 का शुभ समय प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संध्या में चंद्रमा को अर्घ्य देना फलदायी माना जाता है।
👉🏼 इस दिन आप:
भगवान सत्यनारायण की पूजा
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चंद्र देव को जल अर्पण* गरीबों को अन्न और वस्त्र दान*
मंत्र जाप और ध्यान
कर सकते हैं। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है, इसलिए इस दिन की साधना मानसिक शांति प्रदान करती है।
💮 बन रहे हैं शुभ योग

इस बार चैत्र पूर्णिमा पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो पूजा के फल को और बढ़ा सकते हैं.
▫️ 01 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 11 मिनट से दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रवि योग रहेगा.
▫️ दोपहर 4 बजकर 17 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा
▫️ इसके अलावा वृद्धि और ध्रुव योग का भी प्रभाव रहेगा.
📖 चैत्र पूर्णिमा 2026 पूजा-विधि
सुबह का स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
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संकल्प: स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।* मंदिर सजावट: घर के पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु, लक्ष्मी और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।*
पूजा सामग्री: फूल, फल, धूप, दीप, अगरबत्ती, पंचामृत, केला, पंजीरी और मिठाई।* सत्यनारायण कथा: पूजा के दौरान सत्यनारायण भगवान की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। हनुमान पूजा: हनुमान चालीसा का पाठ करें, सुंदरकांड पढ़ें और प्रसाद चढ़ाएं।*
चंद्र अर्घ्य: शाम को चंद्रोदय के समय दूध मिला पानी से चंद्रमा को अर्घ्य दें। “ओम सोम सोमाय नमः” मंत्र बोलें।* आरती और प्रसाद वितरण: पूजा समाप्त कर परिवारजनों में प्रसाद बांटें। 🫴🏼 चैत्र पूर्णिमा का महत्व क्या है
चैत्र पूर्णिमा को चंद्रमा की पूजा के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कला से युक्त होता है, इसलिए चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा मन का कारक होता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से मन से नकारात्मक विचार दूर होते हैं। इस दिन व्रत रखकर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना और दान-पुण्य करना बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पापों से मुक्ति मिलती है। यदि आप भी इस शुभ तिथि और मुहूर्त के अनुसार चैत्र पूर्णिमा की पूजा करेंगी, तो सभी पापों से मुक्ति के द्वार खुलेंगे। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
|| चैत्र पूर्णिमा व्रत कथा ||
*प्राचीन काल में एक नगर में एक वैश्य रहता था। वह बहुत ही धार्मिक और सत्यवादी था। उसकी पत्नी भी पतिव्रता और सुशील थी। वैश्य और उसकी पत्नी दोनों ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हर पूर्णिमा को व्रत रखते थे। *एक बार, वैश्य ने अपनी पत्नी से कहा कि वह सत्यनारायण भगवान का व्रत और पूजन करना चाहता है। उसकी पत्नी ने सहमति दी और दोनों ने विधि-विधान से सत्यनारायण भगवान का व्रत रखा और उनकी पूजा की।
*व्रत के प्रभाव से, वैश्य के घर में धन-धान्य की वृद्धि होने लगी और उसका व्यापार भी खूब चलने लगा। वैश्य और उसकी पत्नी दोनों ही बहुत खुश थे और हर पूर्णिमा को श्रद्धापूर्वक व्रत रखते थे। *एक दिन, वैश्य की पत्नी गर्भवती हुई और उसने एक सुंदर कन्या को जन्म दिया। कन्या के जन्म से वैश्य और उसकी पत्नी की खुशी और भी बढ़ गई। उन्होंने कन्या का नाम कलावती रखा।
*कलावती धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और वह भी अपनी माता-पिता की तरह धार्मिक और सुशील थी। एक दिन, कलावती ने अपनी मां से पूछा कि वह हर पूर्णिमा को व्रत क्यों रखती हैं। उसकी मां ने उसे सत्यनारायण भगवान के व्रत की महिमा बताई। *कलावती ने भी अपनी मां की बात सुनकर सत्यनारायण भगवान का व्रत रखने का संकल्प लिया। जब कलावती बड़ी हुई, तो उसका विवाह एक धनी और सुखी युवक के साथ हुआ।
*एक दिन, कलावती अपने पति के साथ नाव में बैठकर कहीं जा रही थी। रास्ते में, उनकी नाव समुद्र में डूब गई और वे दोनों ही डूबने लगे। कलावती ने सत्यनारायण भगवान का स्मरण किया और उनसे अपनी रक्षा करने की प्रार्थना की। *सत्यनारायण भगवान ने उनकी प्रार्थना सुनी और उनकी नाव को बचा लिया। कलावती और उसका पति सकुशल किनारे पर आ गए। उन्होंने सत्यनारायण भगवान का धन्यवाद किया और हर पूर्णिमा को व्रत रखने का संकल्प लिया।
*तब से, कलावती और उसका पति हर पूर्णिमा को श्रद्धापूर्वक व्रत रखते थे और सत्यनारायण भगवान की पूजा करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, सत्यनारायण भगवान ने उन्हें सभी सुख-समृद्धि प्रदान की और अंत में उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। *यह कथा चैत्र पूर्णिमा व्रत की महिमा को दर्शाती है। इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए, हर किसी को श्रद्धा और भक्ति के साथ चैत्र पूर्णिमा का व्रत अवश्य रखना चाहिए।

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