
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 06 अप्रैल 2026
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
*सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है। *जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
*सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 02:10 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र अनुराधा 02:56 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं। इसके देवता मित्र (द्वादश आदित्य में से एक) हैं।
⚜️ योग – सिद्धि योग 03:25 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : बालव 02:11 PM तक
✨ द्वितीय करण : कौलव 03:22 AM तक, बाद तैतिल
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:57:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:20:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:34 ए एम से 05:20 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:57 ए एम से 06:06 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:59 ए एम से 12:49 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:40 पी एम से 07:03 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:42 पी एम से 07:50 पी एम
💧 अमृत काल : शाम 03:19 पी एम से 05:07 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:00 ए एम, अप्रैल 07 से 12:46 ए एम, अप्रैल 07
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:06 ए एम से 02:57 ए एम, अप्रैल 07
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विंछुड़ो/ गण्ड मूल/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ भारतीय जनता पार्टी स्थापना दिवस, भारतीय राजनीति के पुरोधा, किसानों के मसीहा, चौधरी देवीलाल स्मृति दिवस, प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रतिभा देवी स्मृति दिवस, बालीवुड अभिनेता संजय सूरी जन्म दिवस, राजनीतिज्ञ प्यारेलाल खण्डेलवाल जन्म दिवस, भारतीय जिमनास्टर प्रणति नायक जन्म दिवस, सुचित्रा सेन जन्म दिवस, दिलीप बलवंत वेंगसरकर जयन्ती, जयंतो नाथ चौधरी पुण्य तिथि, राष्ट्रीय कारमेल पॉपकॉर्न दिवस, अंतर्राष्ट्रीय अलैंगिकता दिवस, विकास और शांति के लिए खेल का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, ग्राम स्वराज दिवस, डांडी सत्याग्रह दिवस (1930)
✍🏼 *तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
बाथरूम में नमक रखने के फायदे 👉
घर का माहौल अच्छा और पॉजिटिव रहे, इसके लिए लोग कई तरह के उपाय करते हैं। वास्तु शास्त्र में भी कुछ आसान और असरदार तरीके बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर घर की नकारात्मकता को कम किया जा सकता है।
*ऐसा ही एक आसान उपाय है बाथरूम में कांच की कटोरी में नमक रखना। यह उपाय बहुत सरल है और इसे कोई भी बिना ज्यादा खर्च के कर सकता है। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार घर का हर हिस्सा ऊर्जा से जुड़ा होता है। खासकर बाथरूम और टॉयलेट को ऐसी जगह माना जाता है, जहां नकारात्मक ऊर्जा ज्यादा बनती है।
*अगर इस ऊर्जा को संतुलित न किया जाए, तो इसका असर घर के बाकी माहौल पर भी पड़ सकता है। ऐसे में नमक को एक ऐसा तत्व माना जाता है, जो आसपास की नकारात्मकता को सोखने में मदद करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखता है। *बाथरूम में गंदगी और नमी ज्यादा होती है, इसलिए वहां नकारात्मक ऊर्जा जल्दी इकट्ठा हो जाती है। नमक इस ऊर्जा को अपने अंदर खींच लेता है, जिससे घर का माहौल बेहतर रहता है। एक कांच की कटोरी लें और उसमें मोटा नमक (सेंधा या समुद्री नमक) भर दें। इस कटोरी को बाथरूम के किसी कोने में रखें, जहां उस पर सीधे पानी न पड़े।
*ध्यान रखें कि कांच की कटोरी ही इस्तेमाल करें। नमक को हर 7 से 10 दिन में बदल देना चाहिए. पुराना नमक दोबारा इस्तेमाल न करें, उसे फेंक दें या नाली में बहा दें। इस उपाय से घर का माहौल हल्का और पॉजिटिव महसूस होता है,तनाव कम होता है और घर में शांति बनी रहती है। ♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*कभी भी उस इंसान के पीछे ना भागो, मतलब ये है की जो इंसान आपसे बात तक करना पसंद नही करता, क्योंकि ऐसा करने के बाद भी अगर आप उसके पीछे घूमोगे तो आपकी इज्जत कम होना तय है
*कामुक कहानियां, पॉर्न फिल्में, की लत आपके दिमाग को पूरी तरह कंट्रोल कर लेती है पूरी तरह वाश कर देती है, इसलिए इन चीज़ों जितनी दूरी बनाए रखेंगे उतना अच्छा रहेगा। *इस स्क्रीनशॉट के जमाने मे अपनी निजी बाते किसी के साथ इंटरनेट पे शेयर ना करे।
*किसी इंसान को आपसे प्यार करने के लिए मजबूर ना करे, क्योकि ऐसे रिश्ते ज्यादा दिन नही टिकते । *गलत लोगो के साथ रिश्ते बनाने से लाख बेहतर है कि आप अकेले रह ले, यह आपके लिए सही रहेगा।
*सबसे बड़ी बात कि इस मतलबी दुनिया मे किसी से ज्यादा उम्मीद ना करे। *माँ बाप का दिल दुखाने की गलती कभी ना करे।
🩸 *आरोग्य संजीवनी* 💊
*निम्बू पानी: निम्बू का रस गर्म पानी में मिलाकर पैरों को धोने से जलन कम हो सकती है। निम्बू के रस में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स जलन को शांत करने में मदद कर सकते हैं। *गर्म तेल मालिश: नींबू या सरसों के तेल को थोड़े गर्म करें और इसे पैरों के तलवों पर मालिश करें। यह पैरों की जलन को कम करने में मदद कर सकता है।
*घी मालिश: ताजा घी को हल्का गर्म करें और इसे आपके पैरों के तलवों पर देर तक मालिश करें। यह त्वचा को शीतल करने में मदद करेगा और जलन को कम करेगा। *तुलसी का पेस्ट: तुलसी की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाएं और इसे पैरों के तलवों पर लगाएं। तुलसी के गुण त्वचा को शांति प्रदान करने में मदद कर सकते हैं।
*संतरे का रस: संतरे का रस पैरों के तलवों पर लगाने से जलन कम हो सकती है। संतरे में मौजूद विटामिन C और तरबूजी त्वचा को ठंडा करने में मदद कर सकते हैं। *पुदीने की पत्तियाँ: पुदीने की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाएं और इसे पैरों पर लगाएं। इससे जलन कम हो सकती है और त्वचा को ठंडा करने में मदद मिलती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
माण्डव्य ऋषि गहन तपस्या में लीन थे। एक दिन, कुछ चोर राजकोष लूटकर भागते हुए उनकी कुटिया के पास से गुज़रे। पीछा कर रहे सिपाहियों से बचने के लिए चोरों ने सारा लूटा हुआ धन ऋषि की कुटिया में छिपा दिया और स्वयं जंगल में भाग निकले।
*थोड़ी ही देर में सिपाही वहाँ पहुँचे। कुटिया की तलाशी ली गई। चोर तो मिले नहीं, पर लूट का धन वहीं पड़ा मिला। सिपाहियों ने सोचा—सामने जो साधु बैठा है, वही चोर है। शायद पकड़े न जाने के लिए इसने तपस्वी का वेश धर रखा है। *बिना कोई सोच-विचार किए सिपाही ऋषि को पकड़ कर राजा के सामने ले गए। राजा ने भी बिना कोई जाँच किए, न कोई प्रश्न, न कोई सुनवाई—माण्डव्य ऋषि को सूली पर चढ़ा देने का आदेश सुना दिया।
*सूली पर लटकते हुए भी ऋषि शांत थे। उनके मन में एक ही प्रश्न था—”आखिर मैंने ऐसा कौन-सा पाप किया है जिसका यह दंड मिल रहा है?” ऋषि तो आत्म ज्ञानी थे। उन्होंने अपने इस जीवन की गहराई से समीक्षा की, फिर पिछले जन्मों की ओर ध्यान केंद्रित किया। सौ जन्म तक का अवलोकन करने पर भी कुछ भी ऐसा दिखाई नहीं दिया कि कोई पाप किया है । *आखिरकार उन्होंने भगवान की शरण ली।
*तब एक दिव्य वाणी हुई— “ऋषिवर, अपना एक सौ एकवां जन्म देखो।” *ध्यान गहराया। एक दृश्य उभरा— एक आठ-दस वर्ष का बालक है। उसके एक हाथ में एक कीट (कीड़ा) है, दूसरे हाथ में नुकीला काँटा। बालक खेल-खेल में उस कीट को बार-बार चुभाता है। कीट तड़प रहा है, और बालक इस पीड़ा को देखकर आनंदित हो रहा है।
*माण्डव्य ऋषि का हृदय काँप उठा। उन्होंने समझ लिया—वह निर्दोष नहीं हैं। उस बालक की क्रूरता आज उन्हें तपस्वी होकर भी सूली तक ले आई है। *विचार उठे—”क्या मेरी वर्षों की तपस्या भी उस एक क्षण की क्रूरता को मिटा नहीं सकी?” परंतु वे मौन थे, शांत थे।
*उधर, कुछ सज्जन जिन्होंने ऋषि को वर्षों से तपस्या में देखा था, राजा के पास पहुँचे। उन्होंने राजा को सारी सच्चाई बताई। राजा को जब अपनी भूल का अहसास हुआ तो वह काँप उठा। उसने स्वयं ऋषि से क्षमा माँगी और उन्हें सम्मानपूर्वक मुक्त कर दिया। *मगर तब तक माण्डव्य ऋषि के भीतर बहुत कुछ बदल चुका था। उन्होंने सूक्ष्मतम न्याय की गहराई को अनुभव कर लिया था। उन्होंने आँखें मूँद लीं, भीतर से उस कीट से क्षमा माँगी, और पुनः अपनी तपस्या में लीन हो गए।
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●
⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

