ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 27 अप्रैल 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501

✦••• जय श्री हरि •••✦

🧾 आज का पंचाग 🧾सोमवार 27 अप्रैल 2026

आप सभी सनातनियों को “मोहिनी एकादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनाएं।।महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।*जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल☸️ काली सम्वत् 5127🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव☣️ आयन – उत्तरायण☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु☀️ मास – बैशाख मास🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष📅 तिथि – सोमवार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 06:16 PM तक उपरांत द्वादशी✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।💫 नक्षत्र- नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी 09:18 PM तक उपरांत उत्तर फाल्गुनी🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। इस नक्षत्र के अधिपति देवता ‘भग’ (सौभाग्य और समृद्धि के देवता) हैं।⚜️ योग – ध्रुव योग 09:35 PM तक, उसके बाद व्याघात योग⚡ प्रथम करण : वणिज 06:08 AM तक✨ द्वितीय करण : विष्टि 06:16 PM तक, बाद बव🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक🌞 सूर्योदयः – प्रातः 05:36:00🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:32:00👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:17 ए एम से 05:01 ए एम🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:39 ए एम से 05:44 ए एम🌟 अभिजित मुहूर्त : प्रातः 11:53 ए एम से 12:45 पी एम✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:31 पी एम से 03:23 पी एम🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:53 पी एम से 07:14 पी एम🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:54 पी एम से 07:59 पी एम💧 अमृत काल : दोपहर 02:41 पी एम से 04:20 पी एम🗣️ निशिता मुहूर्त रात्रि 11:57 पी एम से 12:40 ए एम, अप्रैल 28🔥 अग्निवास पाताल : शाम 06:15 पी एम तक🚓 यात्रा शकुन- सोमवार को मीठा दूध पीकर यात्रा करें।👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मोहिनी एकादशी व्रत सर्वे (स्मार्त )/ सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती/ त्रिशूर पूरम/ भद्रा/ (हिन्दू संत पेजावर मठ) स्वामी विश्वेशतीर्थ प्राकट्योत्सव/ मुगल बादशाह मुहम्मद शाह स्मृति दिवस, भारतीय अभिनेत्री जोहरा सहगल जन्म दिवस, दिल्ली नेशनल डिफेंस कॉलेज स्थापना दिवस, राष्ट्रव्यापी गौ सम्मान दिवस, समुद्री स्तनधारी बचाव दिवस, मोर्स कोड दिवस, राष्ट्रीय डेविल डॉग केक दिवस, राष्ट्रीय लाड़ले कुत्ते दिवस, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरिश रावत जन्म दिवस, स्वतन्त्रता सेनानी मनीभाई देसाई जयन्ती, प्रसिद्ध अभिनेता फिरोज ख़ान स्मृति दिवस, अभिनेता व राजनीतिज्ञ विनोद खन्ना स्मृति दिवस, खगोलशास्त्री शंकर बालकृष्ण दीक्षित पुण्य तिथि, अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दिवस (International Design Day)✍🏼 *तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।। 🗼 *_Vastu tips* 🛕प्राचीन वास्तु विज्ञान के अनुसार किसी भी भूखंड की हर दिशा को नौ बराबर भागों में बाँटा जाता है जिन्हें वास्तु पद कहते हैं। कुल बत्तीस बाह्य पद होते हैं और प्रत्येक पद का एक अधिपति देवता, एक ऊर्जा और एक निश्चित फल है। विश्वकर्मा प्रकाश में चारों दिशाओं के शुभ पदों का विस्तार से वर्णन मिलता है।*पूर्व दिशा में तीसरा पद जयन्त और चौथा पद इन्द्र शुभ हैं। इन्द्र पद को सर्वोत्तम माना गया है क्योंकि यह यश, ऐश्वर्य और गृहस्वामी की उन्नति का प्रतीक है। उत्तर दिशा में सत्ताइसवाँ पद मुख्य, अट्ठाइसवाँ पद भल्लाट और उन्नतीसवाँ पद सोम उत्तम हैं। सोम पद विशेष रूप से धन, सुख और पारिवारिक शान्ति के लिए श्रेष्ठ कहा गया है। पश्चिम दिशा में बीसवाँ पद वरुण और इक्कीसवाँ पद असुर में द्वार उचित माना गया है। दक्षिण दिशा में ग्यारहवाँ पद वितथ और बारहवाँ पद बृहत्क्षत पर मुख्य द्वार हो तो वह घर अपार धन और प्रसिद्धि देता है। शास्त्र ने किसी दिशा को वर्जित नहीं किया, केवल सही गणित समझाया है। ❇️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ फ्रिज का ठंडा पानी पीने से तुरंत राहत मिलती है ऐसा लगता है पर ऐसा है नहीं बहुत से नुकसान छुपे हुए है फ्रिज के ठंडे पानी पीने मै जैसे कि *पाचन पर असर: बहुत ठंडा पानी पीने से पेट की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। खाना खाते समय या तुरंत बाद पिया तो पाचन धीमा हो सकता है। खाना पचाने वाले एंजाइम सही तापमान पर काम करते हैं, ठंडा पानी उन्हें सुस्त कर देता है। इसीलिए खाने के साथ गुनगुना/सादा पानी बेहतर।*गला और साइनस : जिन्हें जुकाम, टॉन्सिल, साइनस की दिक्कत रहती है, उनका गला बैठ सकता है या बलगम बढ़ सकता है। ठंडा पानी म्यूकस को गाढ़ा कर देता है। *सिरदर्द : बहुत ठंडा पानी एकदम से पीने से कुछ लोगों को “ब्रेन फ्रीज” जैसा सिरदर्द हो जाता है। माइग्रेन वाले लोगों में ट्रिगर हो सकता है।*दिल की धड़कन: वेगस नर्व पर असर की वजह से कुछ लोगों की धड़कन एक पल के लिए धीमी हो सकती है। आम तौर पर खतरनाक नहीं, पर जिनको हार्ट की दिक्कत है उन्हें सावधान रहना चाहिए। *बॉडी को मेहनत करनी पड़ती है: शरीर को 37°C पर रहना है। तुम 4°C का पानी पियोगे तो बॉडी उसे गर्म करने में एनर्जी लगाएगी। वर्कआउट के तुरंत बाद पिया तो क्रैम्प आ सकते हैं।*ठंडा पानी कब न पिएं : खाना खाते समय या तुरंत बाद *गला खराब हो, बुखार हो, खांसी हो जिम/दौड़ के तुरंत बाद*कब पी सकते हो: वो भी मटके का ठंडा पानी हो जैसे गर्मी में, नॉर्मल कंडीशन में, संत श्री आशाराम जी बापू तो कहते है खाना खाने के 1 घंटा 30 मिनट बाद ही पानी पीना चाहिए घूंट-घूंट करके पियो तो दिक्कत नहीं। 🥠 आरोग्य संजीवनी 🫔कितने दिनों तक पीना चाहिए अर्जुन की छाल का प्रभाव धीरे-धीरे और गहरा होता है। इसे लेने की सही समय-सीमा नीचे दी गई है:*सामान्य कोर्स: आमतौर पर इसे 2 से 3 महीने (60-90 दिन) तक लगातार लेना सबसे प्रभावी माना जाता है।*ब्रेक लें: आयुर्वेद के अनुसार, 3 महीने तक लेने के बाद 15 से 20 दिनों का गैप देना चाहिए। इसके बाद आप इसे फिर से शुरू कर सकते हैं। यह आपके शरीर को दवा के प्रति संवेदनशील बनाए रखता है। *मौसम का ध्यान: अर्जुन की छाल की तासीर ठंडी होती है, इसलिए सर्दियों में इसमें थोड़ी सोंठ या दालचीनी मिलाकर लेना बेहतर होता है।*सही समय क्या है इसे लेने के दो सबसे उत्तम समय हैं: *सुबह खाली पेट (सबसे उत्तम): सुबह उठकर बिना कुछ खाए अर्जुन की छाल का काढ़ा या चाय पीना हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए सबसे अच्छा है।*रात को सोने से पहले: यदि आप इसे दूध के साथ (अर्जुन क्षीर पाक) लेते हैं, तो इसे रात के खाने के 1-2 घंटे बाद सोने से पहले ले सकते हैं। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️एक बार भगवान् विष्णु अपने वैकुण्ठ लोक में सोये हुए थे। स्वप्न में वे क्या देखते हैं कि करोड़ों चंद्रमाओं की कान्तिवाले, त्रिशूल डमरूधारी, स्वर्णाभरण भूषित, सुरेन्द्र वन्दित, अनिमादि सिद्धिसेवित त्रिलोचन भगवान शिव प्रेम और आन्दातिरेक से उन्मत्त होकर उनके सामने नृत्य कर रहे हैं। उन्हें देखकर भगवान विष्णु हर्ष से गदगद हो सहसा शय्यापर बैठ गये और कुछ देर तक ध्यानस्थ बैठे रहे।*उन्हें इस प्रकार बैठे देखकर श्री लक्ष्मी जी उनसे पूछने लगीं कि भगवन! आपके इस प्रकार बैठने का क्या कारण है ?*भगवान ने कुछ देर तक प्रश्न का कोई उत्तर न दे आनंद में निमग्न चुपचाप बैठे रहे। अंत में उन्होंने गदगद-कंठ से बताया कि अभी अभी स्वप्न में मैनें भगवान श्री महेश्वर का दर्शन किया है, उनकी छबि ऐसी अपूर्व आनंदमय एवं मनोहर थी कि देखते ही बनती थी। मालूम होता है, शंकर ने मुझे स्मरण किया है। अहोभाग्य! चलो, कैलाश चलकर हमलोग महादेव के दर्शन करें। *यह कहकर दोनों कैलाश की ओर चल दिए। मुश्किल से आधी दूर गए होंगे कि क्या देखते हैं भगवान शंकर स्वयं गिरिजा जी के साथ उनकी ओर चले आ रहे हैं। अब भगवान के आनंद का क्या ठिकाना ? मानो घर बैठे निधि मिल गयी। पास आते ही दिनों परस्पर बड़े प्रेम से मिले। प्रेम आनंदाश्रु बहाने लगा और शरीर पुलकायमान हो गया। दोनों ही एक-दूसरे लिपटे हुए कुछ देर मूकवत खड़े रहे।*प्रश्नोत्तर होने पर ज्ञात हुआ कि शंकर जी को भी रात्रि में इसी प्रकार का स्वप्न आया था जिसमें विष्णु भगवान को वे उसी रूप में देख रहे हैं, जिस रूप में वे अब उनके सामने हैं खड़े थे। दोनों के स्वप्न वृत्तान्त जानने पर दोनों ही एक दूसरे से अपने यहाँ लिवा ले जाने का आग्रह करने लगे। नारायण कहते वैकुण्ठ चलो और शम्भु कहते कैलाश कि ओर प्रस्थान कीजिये। दोनों के आग्रह में इतना अलौकिक प्रेम था कि यह निर्णय करना कठिन हो गया कि कहाँ चला जाय? *इतने ही में क्या देखते हैं कि वीणा बजाते, हरिगुण गाते नारद जी कहीं से आ रहे। बस फिर क्या था ? लगे दोनों ही उनसे निर्णय कराने कि कहाँ चला जाय ? बेचारे नारद जी तो स्वयं हतप्रभ थे उस अलौकिक मिलन को देखकर। वे तो स्वयं अपनी सुध-बुध भूल गये और लगे मस्त होकर दोनों का गुणगान करने। अब निर्णय कौन करे? अन्त में यह तय हुआ कि भगवती उमा जो कह दे वही ठीक है। भगवे उमा तो पहले तो कुछ देर चुप रही। अन्त में वे दोनों को लक्ष्य करके बोलीं…*हे नाथ ! हे नारायण ! आप लोगों के निश्चल, अनन्य एवं अलौकिक प्रेम को देखकर तो यही लगता है कि आपके निवास अलग-अलग नहीं हैं, जो कैलाश है वही वैकुण्ठ है और जो वैकुण्ठ है वही कैलाश है, केवल नाम ही भेद है। यही नहीं मुझे तो शरीर देखने में दो हैं। और तो और, मुझे तो अब यह स्पष्ट दिखता है कि आपकी भार्यायां भी एक ही हैं, दो नहीं हैं। जो मैं हूँ वही लक्ष्मी हैं और जो लक्ष्मी हैं वही मैं हूँ। केवल इतना ही नहीं, मेरी अब यह दृढ धारणा हो गयी है कि आप लोगों में से एक के प्रति जो द्वेष करता है, वह मानो दूसरे के प्रति ही करता है। एक की पूजा जो करता है, वह स्वाभाविक ही दूसरे की भी करता है और जो एक को अपूज्य मानता है, वह दूसरे की भी पूजा नहीं करता। मैं तो यह समझती हूँ कि आप दोनों में जो भेद मानता है, उसका चिरकाल तक घोर पतन होता है। *मैं देखती हूँ कि आप मुझे इस प्रसंग में अपना मध्यस्थ बनाकर मानो मेरी प्रवंचना कर रहे है।अब मेरी यह प्रार्थना है कि आप लोग दोनों ही अपने-अपने लोक को पधारिये। श्री विष्णु यह समझे कि हम शिवरूप से वैकुण्ठ जा रहे हैं और महेश्वर यह माने कि हम विष्णुरूप से कैलाश गमन कर रहे हैं।*इस उत्तर को सुनकर दोनों परम प्रसन्न हुए और भगवती उमा की प्रसंसा करते हुए दोनों प्रनामालिंगन के अनंतर हर्षित हो अपने-अपने लोक को प्रस्थान किये। *लौट कर जब श्री विष्णु वैकुण्ठ पहुंचे तो श्री लक्ष्मी जी उनसे पूछने लगीं कि प्रभु! सबसे अधिक प्रिय आपको कौन है? इस पर भगवान बोले प्रिये! मेरे प्रियतम केवल श्री शंकर हैं! वास्तव में मै ही जनार्दन हूँ और मैं ही महादेव हूँ। अलग-अलग नहीं है हम एक ही हैं। मुझमें और शंकर जी मैं कोई अंतर नहीं है। शंकर जी के अतिरिक्त शिव जी कि चर्चा करने वाला शिव भगत भी मुझे अत्यंत प्रिय है। इसके विपरीत जो शिव पूजा नहीं करते, वे मुझे कदापि प्रिय नहीं हो सकते।═══════◄••❀••►═══════⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।

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