
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
*_जय श्री हरि_*
🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*बुधवार 10 जून 2026_*
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *_दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
*_बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*_बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन – उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – ज्यैष्ठ मास_*
🌓 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – बुधवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष दशमी तिथि 12:58 AM तक उपरांत एकादशी_*
🖍️ *_तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 09:21 AM तक उपरांत रेवती_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं। उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अहिर्बुध्न्य (जल सर्प या गहरे समुद्र का ड्रैगन) हैं।_*
⚜️ *_योग – आयुष्मान योग 06:29 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग 04:02 AM तक, उसके बाद शोभन योग_*
⚡ *_प्रथम करण : वणिज 01:52 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : विष्टि 12:58 AM तक, बाद बव_*
🔥 *_गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:21:46_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:18:45_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:02 ए एम से 04:42 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:22 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:40 पी एम से 03:36 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : संध्या काल 07:17 पी एम से 07:37 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : संध्या काल 07:19 पी एम से 08:19 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 12:01 ए एम, जून 11 से 12:41 ए एम, जून 11_*
🚓 *_यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।_*
🤷🏻♀️ *_आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 25वाँ दिन/ भद्रा/ पञ्चक जारी/ गण्ड मूल/ आडल योग/ विडाल योग/ विश्व आधुनिक कला दिवस, विश्व भूगर्भ जल दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी बलराज भल्ला जयन्ती, भारतीय उद्योगपति राहुल बजाज जन्म दिवस, स्वतन्त्रता सेनानी दामोदर मेनन जयन्ती, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी गोपीनाथ बोरदोलोई जयन्ती, राष्ट्रीय प्रेम दिवस, राष्ट्रीय आइस्ड टी दिवस, बेलमोंट स्टेक्स, राष्ट्रीय बॉलपॉइंट पेन दिवस, ईएचएस दिवस, राष्ट्रीय एग रोल दिवस, विश्व नेत्रदान दिवस, दृष्टिदान संकल्प दिवस, राष्ट्रीय जड़ी-बूटी, मसाला दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🛕 *_Vastu tips_* 🗼
वास्तु की माने तो घर में मौजूद हर दिशा विशेष प्रकार की ऊर्जा को प्रभावित करती है। पूजा कक्ष घर का वह स्थान माना जाता है, जहां की आध्यात्मिक ऊर्जा पूरे घर में फैलती है। सही दिशा में बना मंदिर सुख, शांति और समृद्धि का कारण बन सकता है, जबकि गलत दिशा में बना पूजा स्थल कई तरह की दिक्कतें बढ़ा सकता है। इसलिए मंदिर की दिशा का सही चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
*_पूजा घर के लिए सबसे शुभ दिशा पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा में देवी-देवताओं का वास बताया है। सुबह के समय इस दिशा में सूर्य की किरणों और प्राकृतिक ऊर्जाओं का विशेष प्रभाव पड़ता है, जिससे घर में पॉजिटिविटी आती है। वास्तु विशेषज्ञ भी सबसे पहले इसी दिशा में मंदिर स्थापना करने की सलाह देते हैं।
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
*किन ग्रहों के खराब होने से होता है चेहरे का लकवा?*
*_चंद्रमा : चंद्रमा को हमारे मन और मस्तिष्क का कारक माना जाता है। अगर चंद्रमा कुंडली में कमजोर हो, अशुभ ग्रहों से दृष्ट या पीड़ित हो, तो यह मानसिक तनाव और मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है, जिसमें चेहरे का लकवा भी शामिल है।
*_बुध : बुध ग्रह का संबंध तंत्रिका तंत्र से है। यदि बुध अशुभ स्थिति में हो, या नीच का हो (कुंडली में कमजोर स्थिति में हो), तो यह तंत्रिका तंत्र की समस्याओं का कारण बन सकता है, जिससे चेहरे की नसें प्रभावित हो सकती हैं।
*_राहु: राहु ग्रह को भ्रम और रहस्यों का कारक माना जाता है। राहु का अशुभ प्रभाव मानसिक और तंत्रिका तंत्र से संबंधित विकार उत्पन्न कर सकता है। यदि राहु का प्रभाव चंद्रमा या बुध पर पड़ता है, तो इससे चेहरे का लकवा हो सकता है।
*_शनि :शनि ग्रह का संबंध भी तंत्रिका तंत्र और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से है। शनि की दशा या महादशा में, जब यह अशुभ स्थिति में होता है या नीच का होता है, तो यह व्यक्ति को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे चेहरे के लकवे, से प्रभावित कर सकता है।
🫒 *आरोग्य संजीवनी* 🍈
*_हरड़ के लाभ_*
🔹🔹🔹🔹
हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है।
*_छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन ३ बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं, इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं।
*_छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें, रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है।
*_कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें। एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं।
*_हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटी ) ठीक हो जाती है।
*_हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है।
*_हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है।
📚 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
*चंद्र-राहु युति: प्रभाव और विश्लेषण_*
जब कुंडली में चंद्रमा और राहु एक साथ होते हैं, तो यह ‘ग्रहण योग’ बनाता है। इसके प्रभाव जातक की मानसिक स्थिति पर निर्भर करते हैं:_*
नकारात्मक प्रभाव: यदि चंद्रमा पीड़ित, अस्त या नीच का हो, तो व्यक्ति अत्यधिक नकारात्मक सोच (Overthinking), मानसिक भ्रम (Illusion), व्यर्थ की चिंता और असुरक्षा की भावना से ग्रस्त रह सकता है। गंभीर स्थितियों में यह मानसिक अस्थिरता का कारण भी बन सकता है।_*
सकारात्मक प्रभाव: यदि चंद्रमा मजबूत स्थिति में हो और शुभ प्रभाव में हो, तो यही युति जातक को विलक्षण अंतर्ज्ञान (Intuition), गहरी कल्पना शक्ति और शोध क्षमता प्रदान करती है। यही कारण है कि कई महान शोधकर्ताओं, दार्शनिकों और योगियों की कुंडली में यह योग एक वरदान की तरह कार्य करता है।_*
🌙 *_चंद्रमा को मजबूत करने के उपाय_*
चंद्रमा की मानसिक शांति और एकाग्रता को सुधारने के लिए निम्नलिखित उपाय अत्यंत प्रभावी हैं:_*
पूर्णिमा का व्रत और उपासना: प्रत्येक पूर्णिमा का व्रत रखें। यदि व्रत संभव न हो, तो कम से कम एक घंटा एकांत में बैठकर ईश्वर का ध्यान या पूजा-पाठ अवश्य करें।_*
चंद्रमा को अर्घ्य: शुक्ल पक्ष (बढ़ते चंद्रमा) में प्रतिपदा (प्रथम तिथि) से 11 दिनों तक और कृष्ण पक्ष में षष्ठी से अमावस्या तक चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य जल में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर अर्पित करना अधिक शुभ माना जाता है।_*
शिवलिंग का अभिषेक: प्रतिदिन शिवलिंग पर दो चम्मच कच्चा दूध और शुद्ध जल अर्पित करें। भगवान शिव चंद्रमा के स्वामी हैं, इसलिए यह उपाय मन को स्थिरता प्रदान करता है।_*
नियमित ध्यान (Meditation): अपने मन को शांत और केंद्रित करने के लिए प्रतिदिन कम से कम 15-20 मिनट ध्यान का अभ्यास करें।_*
सकारात्मक वातावरण: सदैव सकारात्मक लोगों के बीच रहें। अपनी सोच को शुद्ध रखें और नकारात्मक चर्चाओं से स्वयं को दूर रखें।_*
प्रकृति से जुड़ाव और अफर्मेशंस: खुले आकाश के नीचे खड़े होकर ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा महसूस करें और अपने लिए सकारात्मक संकल्प (Affirmations) दोहराएं।
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⚜️ *_दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
*_दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।


