राजमाता और पीपल,

हरीश मिश्र, लेखक ( स्वतंत्र पत्रकार )
राजमाता विजयाराजे सिंधिया, भारतीय जनसंघ की संस्थापक नेताओं में से एक थीं। राजसी वैभव से निकलकर उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रसेवा और जनसेवा को समर्पित किया था।
यह तस्वीर 70 के दशक की है, जब राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने गांधी प्रतिमा के सामने पीपल के वृक्ष की छांव में आमसभा को संबोधित किया था ।
वह दौर आज से बिल्कुल अलग था। जनसंघ की सभा में जाना भी साहस का परिचायक माना जाता था। आज संघ और भाजपा से जुड़े दिखाई देने वाले अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिवारों की राजनीतिक जड़ें उस समय कांग्रेस से जुड़ी हुई थीं।
वक्त बदला, विचार बदले, राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और राजनीति का रंग भी बदलता गया।
जो कभी कांग्रेस में जालीदार टोपी पहनकर दिखाई देते थे, उनमें से कुछ आज काली टोपी लगाकर सिद्ध पुरुष बनने का दावा करते नजर आते हैं।
यह तस्वीर केवल एक आमसभा की झलक नहीं है। उस समय का वह पीपल का वृक्ष भी इन जनसभाओं का मूक साक्षी हुआ करता था।
विकास के नाम पर पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले 4 जून 2020 को वह पीपल वृक्ष काट दिया गया। ना आज वृक्ष वहां है, ना ही राजमाता, लेकिन उनसे जुड़ी स्मृतियां, तस्वीरों में और लोगों की यादों में आज भी जीवित हैं।
समय बदलता है, चेहरे बदलते हैं, राजनीति बदलती है…
लेकिन इतिहास अपनी गवाही नहीं बदलता।
इतिहास की कुछ तस्वीरें समय के उस दौर को फिर हमारे सामने लाकर खड़ा कर देती हैं, जिसे हम पीछे छोड़ आए हैं।
यह तस्वीर सिर्फ एक आमसभा की तस्वीर नहीं, रायसेन के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के एक दौर की याद है।

पर्यावरण दिवस से ठीक एक दिन पहले, 4 जून 2020 को विकास के नाम पर रायसेन की राजनीति और इतिहास का साक्षी रहा वह विशाल पीपल वृक्ष काट दिया गया।



