फालतू खर्च पर लगाम साहू समाज की बड़ी पहल, पितृ पक्ष में श्राद्ध और पटा विसर्जन को ‘सूक्ष्म’ रूप देने की अपील
रिपोर्टर: शिवकुमार साहू
सिलवानी । बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली को देखते हुए साहू समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक प्रगतिशील और सराहनीय कदम उठाया है। समाज के प्रबुद्ध जनों और पदाधिकारियों ने पितृ पक्ष के दौरान होने वाले श्राद्ध और पटा (तर्पण) विसर्जन के आयोजनों को आडंबर मुक्त व सूक्ष्म (सरल) रूप देने पर विशेष विचार-विमर्श किया है। रायसेन जिला साहू समाज के जिला अध्यक्ष केशराम साहू ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ दूरभाष पर चर्चा करते हुए कहा कि श्राद्ध का मूल उद्देश्य पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है, न कि भारी-भरकम खर्च या बड़ा आयोजन करके समाज में प्रदर्शन करना। वर्तमान समय में कई परिवार नौकरियों और व्यवसाय के कारण बाहर रहते हैं, जिससे लंबी और जटिल प्रक्रियाओं के लिए समय निकालना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में परंपराओं में समयानुसार सुधार बेहद जरूरी है।
*इन बदलावों पर बनी सहमति और समाज से अपील*
साहू समाज द्वारा आयोजक परिवारों से अपील की गई है कि वे श्राद्ध और पटा विसर्जन के कार्यक्रम को बेहद सादगी से संपन्न करें और निम्न बदलावों को अपनाएं
*सीमित भोजन व्यवस्था*
समाज के सैकड़ों लोगों को बुलाकर बड़ा भोज आयोजित करने के बजाय केवल ब्राह्मण, कन्याओं और अपने परिवार के सदस्यों को भोजन कराकर इसे सूक्ष्म रूप में किया जाए।
*कन्या भोज को प्राथमिकता*
परंपरा के अनुसार 5 या 7 कन्याओं को आदरपूर्वक भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाए।
*बचत का सही उपयोग*
बड़े भोज में होने वाले अनावश्यक खर्च को बचाकर पूर्वजों के नाम पर गरीब बच्चों की शिक्षा या चिकित्सा सहायता में दान करने का व्यावहारिक सुझाव दिया गया है।
*समाज के हर वर्ग को मिलेगी राहत*
इस नई पहल से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक और मानसिक दबाव कम होगा। साहू समाज के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि समाज का हर परिवार इस प्रगतिशील सोच को अपनाएगा, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी और नई पीढ़ी को भी एक सकारात्मक संदेश मिलेगा।



