मध्य प्रदेश

तारण तरण जैन समाज ने निकाला चल समारोह,समाजजनों ने उतारी आरती

सिलवानी । नगर में रविवार को तारण तरण दिगंबर जैन समाज के द्वारा भव्य चल समारोह निकाला गया। जिससे नगर धर्ममय देखा गया। इतिहास रत्नाकर, अध्यात्म रत्न, बाल ब्रम्हचारी संत बसंत’ जी महाराज के नगर के जैन चैत्यालय में चल रहे वर्षा वास के समापन अवसर पर भव्य चल समारोह आयोजित किया गया। बृान ब्रम्हचारी संत बसंत जी महाराज के सानिध्य में चल समारोह निकाला गया। जैन चैत्याजय से आरम हुआ चल समारोह हौली चौक, बुधवारा बाजार, समैया मार्केट, कुशवाहा धर्मशाला, सागर रोड, बजरंग चौराहा आदि प्रमुख मार्गो से गुजर कर प्रारंभिक स्थल पर पहुंच कर समाप्त हुआ। चल समारोह में महान अध्यात्मिक संत तारण तरण मंडलाचार्य महाराज के द्वारा लिखित जिनवाणी ग्रथ को चांदी जड़ित पालकी में विराजमान किया था। जिसे कि समाजजन श्रद्धा पूर्वक कंधे पर उठाए जयकारा लगाते हुए चल रहे थे। चल समारोह मार्ग पर पालकी जी की समाजजनो के द्वारा आरती उतारी गई। चल समारोह मार्ग को तोरण द्वार रंगोली तथा स्वाग करते हुए फ्लेक्सो से सजाया गया था। भजन मंडली के सदस्य भजनों का गायन कर रहे थे, महिलाए परंपरागत परिधान में शामिल होकर जयकारा लगा रही थी। बालिकाए डांडिया करती हुई चल रही थी। कार्यक्रम में सहभागिता करने अनेकों नगर व शहरों से समाजजन आए। समाप्ति पर तारण तरण जैन समाज के पदाधिकारियों ने सभी का आभार माना।
सुबह के समय जैन चैत्यालय में वर्षावास समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां पर मंत्रजप भावपूजा, मंदिर विधि, आरती, प्रसाद वितरण, चंदन आदि कार्यक्रम संपन्न किए गए। यहां पर संक्षिप्त व्याख्याण माला में इतिहास रत्नाकर, अध्यात्म रत्न ,बाल ब्रम्हचारी संत बसंत जी महाराज कहा कि महान अध्यात्मिक संत तारण तरण मंडलाचार्य महाराज ने तारण स्वामी ने आत्मान्नुमुखी हो की प्रेरणा दी है। मोह निद्रा में सुख नही हैं समय है मोह रुपी निंद्रा से जागने का। नगर में वर्षों से चली आ रही स्वाध्याय, तत्प चर्चा, भाव पूजा के क्रम को लगातार जारी रखा जाना चाहिए। छोटा सा कार्य कब विराट रूप ले ले पता ही नही चलता है। सिलवानी की भूमि तारण तरण मंडलाचार्य महाराज की चरण रज से अलंकृत है। ग्राम आमापानी गुरु तारण स्वामी की साधना, चितन का केंद्र रहा है। ग्रंथों में मेसरा ग्राम श्रुत स्थान के रूप में दर्ज है। सकारात्मक चिंतन करना आवश्यक है। बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।

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