धार्मिकमध्य प्रदेश

इस बार 10 दिनों का होगा नवरात्र, 18 से 19 अक्टूबर तक अष्टमी : पं. हरिनारायण शास्त्री

रिपोर्टर: सतीश मैथिल
सांचेत । इस बार 10 दिनों का होगा नवरात्र, 18 से 19 अक्टूबर तक अष्टमी पंडित हरिनारायण शास्त्री ने बताया शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
शारदीय नवरात्र रविवार से कलश स्थापना के साथ शुरू हुआ जो इस बार अष्टमी तिथि दो दिन होने के कारण 10 दिनों तक चलेगा।
शक्ति की आराधना, आस्था और आत्मशुद्धि का महापर्व शारदीय नवरात्र रविवार से कलश स्थापना के साथ शुरू हो गया है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के साथ अगले 10 दिनों तक घरों, मंदिरों और पूजा पंडालों में भक्तिमय वातावरण रहेगा
सांचेत के शक्तिपीठ मंदिरों को सजाया गया है। इस बार अष्टमी तिथि दो दिन होने के कारण देवी की उपासना 10 दिनों तक चलेगी।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का हाथी पर आगमन और हाथी पर ही विदाई सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और खुशहाली का संकेत है। धार्मिक परंपरा में दुर्गा सप्तशती के पाठ को विशेष फलदायी माना गया है।
इसके 13 अध्यायों में देवी की महिमा, शक्ति और असुरों पर विजय की कथाओं का वर्णन है। देवी की आराधना से भय, नकारात्मकता और संकटों से लड़ने का आत्मबल मिलता है।
महागौरी का पूजन दो दिन
पंडित हरिनारायण शास्त्री ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को पूरे दिन और रात रहेगी। 19 अक्टूबर की सुबह 8:04 बजे तक रहेगी।
तिथि की इस अवधि के कारण महागौरी की पूजा और अष्टमी से जुड़े अनुष्ठानों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहेगा। महासप्तमी 17 अक्टूबर को और महानवमी का व्रत एवं पूजन 20 अक्टूबर को होगा।
अलग-अलग परंपराओं से पूजन
मां दुर्गा का पूजन वैदिक, बंगाली और शाक्त परंपराओं के अनुसार मां दुर्गा की पूजा की जाती है। इन पद्धतियों में पूजा-विधान, भोग और आरती की परंपराएं अलग-अलग हैं।
वैदिक पद्धति में कलश पर नारियल स्थापित किया जाता है, जबकि कुछ शाक्त परंपराओं में कलश पर दीपक रखने की विधि प्रचलित है।
नवरात्र का संदेश है कि शक्ति केवल बाहरी विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि अपने भीतर के भय, अहंकार और नकारात्मकता पर विजय पाने की प्रेरणा है
मां को ये भोग करे अर्पण
द्वितीया- शक्कर का भोग लगाकर दान करें। ऐसा करने से चिरायु का वरदान मिलता है।
तृतीया- दूध चढ़ाएं और उसे ब्राह्मण को दान कर दे। इससे ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।
चतुर्थी- मालपुआ का नैवेद्य अर्पण करें। इससे मनोबल बढ़ता है।
पंचमी- केले का भोग लगाना चाहिए। इससे बुद्धि का विकास होता है।
षष्टी- मधु (शहद) चढ़ाएं। इससे सौंदर्य की प्राप्ति होती है।
सप्तमी- गुड़ से निर्मित भोग अर्पित करने से शोक से मुक्ति होती है।
अष्टमी- नारियल का भोग लगाना चाहिए। इससे सभी इच्छाएं पूर्ति होती हैं।
नवमी- हलवा-पूड़ी, खीर और पुआ बनाकर चढ़ाना चाहिए। इससे सुख-शांति आती है।

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