Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 05 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 05 अक्टूबर 2023
05 अक्टूबर 2023 दिन गुरुवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि सप्तमी तिथि है। आज सातवें दिन का श्राद्ध किया जाएगा। वर्ष भर में किसी भी महीने, किसी भी पक्ष की सप्तमी तिथि में मृत्यु हुई हो उनकी तिथि आज ही मनायी जाएगी। आज पूर्व दिशा में बुध देवता अस्त हो रहे हैं। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “सातवें दिन के श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – आश्विन माह कृष्ण पक्ष षष्ठी – 05:41 ए एम, उपरांत सप्तमी पूर्ण रात्रि तक
✏️ तिथि स्वामी – षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र स्कन्द कुमार है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र म्रृगशीर्षा 07:40 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। तथा नक्षत्र देवता सोम है।
🔕 योग – वरीयान योग 05:22 AM तक, उसके बाद परिघ योग
⚡ प्रथम करण : गर – 05:31 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 05:41 ए एम, अक्टूबर 05 तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:08:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:52:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:38 ए एम से 05:27 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:08 पी एम से 02:55 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:04 पी एम से 06:28 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:04 पी एम से 07:17 पी एम
💧 अमृत काल : 03:14 पी एम से 04:51 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:46 पी एम से 12:34 ए एम, अक्टूबर 05
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
❄️ रवि योग : 06:29 पी एम से 06:16 ए एम, अक्टूबर 05
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को स्वर्ण दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/सप्तमी श्राद्ध, विश्व शिक्षक दिवस, उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन जयन्ती, लेखक व उपन्यासकार दुर्गा प्रसाद खत्री पुण्य तिथि, वरिष्ठ नागरिक दिवस, राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस, प्रसिद्ध वीरागंना रानियों में से एक रानी दुर्गावती जन्म दिवस, प्रमुख साहित्यकार भगवतीचरण वर्मा स्मृति दिवस, विश्व आवास दिवस, अन्तरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस, वन्यजीव सप्ताह (2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर)
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏚️ Vastu tips 🌋
अलग-अलग फलों की प्राप्ति के लिए लगाएं ये लाफिंग बुद्धा
अपनी निर्णय क्षमता को बढ़ाने के लिए घर में हंसते हुए बुद्धा की मूर्ति या तस्वीर लगाएं। इससे घर में खुशहाली बढ़ेगी और आपका कॉन्फिडेंस लेवल भी बढ़ेगा।
अपनी किस्मत चमकाने और हर कार्य में सफलता पाने के लिए घर या दुकार में आराम करते हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति रखें।
घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कंधे पर पैसों की पोटली टांगे हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति रखें। इससे आपकी पैसों से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।
व्यापार में मुनाफा पाने के लिए दुकान या ऑफिस दोनों हाथ को ऊपर उठाए हुए लाफिंग बुद्धा की मूर्ति रखें। इससे आपकी बिजनेस से जुड़ी सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दबी हुई नसों को खोलने का क्या कोई अचूक उपाए है?
दोस्तों आज में आपको बताऊंगी की दबी दबी हुई नस को आप कैसे खोल सकते हैं।
आपको पान वाला चूना लेने है। ध्यान रहे पान वाला ही चूना लेना है। एक चूना जो सेंट वाला आता है वो नहीं लेना है। एक चुटकी रोज़ खाली पेट लेना है। और ये तब तक करना है जब तक आपकी नस खुल नहीं जाती। घबराइए मत अगर आप नियमित रूप से करेंगे तो 2 से 3 दिन में खुल जायेगी। अगर फिर भी नहीं खुलती है। तो आप दवाई जरूर ले। कहां की नस दबी हुई है दवाई इस पर निर्भर करती है। या डॉक्टर को दिखाएं।
अब बात आती है यह होता कैसे है?
यह अगर आप लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहते हैं। इसलिए हो सकता है।
या अगर आप हवाई यात्रा ज्यादा करते हैं। यह इससे भी हो सकता है।
तो घबराइए मत अगर बीमारी है। तो उसका इलाज भी है। ठीक है।
🍶 आरोग्य संजीवनी
बार-बार कफ जमने के कारण
उपाय : उपयुक्त पोषण लें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें। व्यर्थ का मानसिक तनाव न लें। अगर कोई समस्या हो तो अपने बुद्धि से सुलझाने की कोशिश कर निश्चिंत रहें।
शारीरिक व्यायाम तन-मन के लिए हितकारी है।
अपने उम्र तथा परिश्रम के हिसाब से उचित मात्रा में नींद लें।
रात को खाना खाने के बाद ब्रश करें। इससे आपके मुँह में कम कीटाणु रहेंगे।
घर पर साफ-सफाई रखें।
घर के बाहर अपने मुँह-नाक को रुमाल/दुपट्टे से ढकें।
बाहर का खाना जिसमें कच्चे फल-सब्जी या दुषित पानी का खतरा हो कम-से-कम खाएँ या दूर रहें।
अगर अभी गला खराब है तो दिन में 2-4 बार फिल्टर किया हुआ साफ पानी को गर्म करके उसमें साफ नमक डालकर गले में कुल्ला करें।
अदरक और काली मिर्च कफ को कम करके गले को आराम देता है।
ज्यादा ठंडे पानी का प्रयोग न करें। आईसक्रीम जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
सांस्कृतिक जड़ें कई अंधविश्वासों की तरह, इस विश्वास की जड़ें सांस्कृतिक परंपराओं और मान्यताओं में हैं। यह अक्सर धार्मिक और सामाजिक प्रभावों के संयोजन से उत्पन्न होता है जिसने समय के साथ इन वर्जनाओं को आकार दिया है।
अनजान का डर बता दे की, अंधविश्वास अक्सर अज्ञात के डर और किसी के भाग्य को नियंत्रित करने की इच्छा से उत्पन्न होता है। कुछ व्यक्तियों से बचने के मामले में, यह लोगों के लिए अपने जीवन पर नियंत्रण की भावना महसूस करने का एक तरीका हो सकता है, खासकर अनिश्चितता के समय में।
तर्कसंगतता की जांच क्या इसका कोई वैज्ञानिक आधार है?
अंधविश्वासों को अक्सर तर्कहीन विश्वास माना जाता है, कुछ व्यक्तियों को आश्चर्य हो सकता है कि क्या विशिष्ट लोगों से बचने का कोई वैज्ञानिक आधार है। इसका उत्तर मुख्यतः ठोस साक्ष्य के बजाय मनोविज्ञान और धारणा में निहित है।
अंधविश्वास को तोड़ना चुनौतीपूर्ण विश्वास अंधविश्वास, जिसमें कुछ व्यक्तियों से दूर रहने का अंधविश्वास भी शामिल है, पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह याद रखना आवश्यक है कि ये मान्यताएँ ठोस सबूतों पर आधारित नहीं हैं।
समझ को बढ़ावा देना अंधविश्वासों को कायम रखने के बजाय, समाज को सभी व्यक्तियों के प्रति समझ और सहानुभूति को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, चाहे उनकी परिस्थितियाँ या शारीरिक विशेषताएं कुछ भी हों। मानवीय विश्वासों और अंधविश्वासों की टेपेस्ट्री में, यह विचार कि विशिष्ट व्यक्तियों को छूने से दुर्भाग्य आ सकता है, एक अजीब धागे के रूप में खड़ा है। इसका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व हो सकता है, मगर इन दावों का समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
(इति समाप्ति)
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⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

